पंजाब: चरणजीत चन्नी ही होंगे कांग्रेस के सीएम पद के उम्मीदवार, आलाकमान आज लगा सकता है नाम पर मुहर
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने पार्टी के शक्ति एप पर कार्यकर्ताओं की राय मांगी थी, जिसमें मौजूदा सीएम चरणजीत चन्नी सबसे आगे हैं।
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पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे के लिए चल रहा विवाद लगभग समाप्त हो गया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने पार्टी के शक्ति एप पर कार्यकर्ताओं की राय मांगी थी, जिसमें मौजूदा सीएम चरणजीत चन्नी सबसे आगे चल रहे हैं। अब हाईकमान ने भी चन्नी को ही कांग्रेस का सीएम उम्मीदवार घोषित करने की तैयारी कर ली है। आज इसकी आधिकारिक पुष्टि की जा सकती है।
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे के एलान का फैसला होते ही दावेदारों ने ताल ठोंकनी शुरू कर दी थी। पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू और मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की प्रबल दावेदारी के बीच बीते 72 घंटे में ही दो और वरिष्ठ नेताओं ने खुद को मुख्यमंत्री पद के तौर पर पेश किया है। ये नाम हैं उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और सांसद प्रताप सिंह बाजवा।
सीएम कुर्सी के लिए सिद्धू लगातार जता रहे थे इच्छा
सीएम पद के लिए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच खींचतान किसी से छिपी नहीं है। कैप्टन के खिलाफ नवजोत सिद्धू द्वारा चलाई गई मुहिम का पटाक्षेप भी उस समय हुआ था जब कैप्टन से मुख्यमंत्री की कुर्सी छिनने के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने चरणजीत चन्नी का नाम आगे कर दिया और सिद्धू मौका चूक गए।
कैप्टन के मुख्यमंत्री और पार्टी छोड़ने के बाद अगले मुख्यमंत्री के दावेदारों में जाट सिख को प्राथमिकता देने की बात आई तो सिद्धू ने अपनी दावेदारी पेश कर दी थी। इस पर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी खुद को जाट सिख बता अपना दावा ठोक दिया। इस खींचतान को देखते हुए अनुसूचित जाति से संबंधित चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर हाईकमान ने मुहर लगा दी थी।
चन्नी मुख्यमंत्री बन गए लेकिन नवजोत सिद्धू ने अपने वही तेवर बरकरार रखे, जो उन्होंने कैप्टन के खिलाफ बनाए थे। चन्नी के कामकाज में सीधा हस्तक्षेप भी हुआ लेकिन तब तक विधानसभा चुनाव नजदीक आ जाने के कारण विवादों को पृष्ठभूमि में डाल दिया गया। बावजूद इसके सिद्धू ने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने की मांग तेज कर दी, जिसे देखते हुए हाईकमान जोकि चन्नी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का एलान कर चुका था, ने चुप्पी साध ली लेकिन इसका परिणाम पार्टी पर भारी पड़ता दिखाई देने लगा क्योंकि पंजाब में अनुसूचित जाति वर्ग के बीच यह बात घर कर गई कि कांग्रेस चुनाव जीतने के बाद चन्नी को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी और मौजूदा नियुक्ति केवल अनुसूचित जाति के वोट हासिल करने के लिए की गई है।
अनुसूचित जाति वर्ग की यह आशंका और नाराजगी कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच गई है लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर चन्नी को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करते हैं तो प्रदेश प्रधान सिद्धू क्या कदम उठाएंगे? सिद्धू लगातार इस पद के लिए हाईकमान पर दबाव बनाते रहे हैं और इस संबंध में लिया जाने वाला फैसला मौजूदा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की दशा और दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।