Punjab News: पंजाब में तीन और टोल प्लाजा बंद, CM मान ने कहा- रोजाना बचेंगे 10.52 लाख रुपये
मुख्यमंत्री ने बताया कि टोल कंपनी ने हमारी सरकार से कोविड के समय के 101 दिन और किसान आंदोलन की आड़ में 432 दिनों का हवाला देते हुए 533 दिनों की मोहलत मांगी थी और हमने इस मांग को सिरे से नकार दिया।
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आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को राज्य के तीन और टोल प्लाजा बंद करवाने के मौके पर अकाली-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस की सरकारों की टोल कंपनियों के साथ मिलीभगत का पर्दाफाश किया। मजारी (नवांशहर), नंगल शहीदां और मानगढ़ (होशियापुर) टोल प्लाजा बंद करवाने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में सीएम मान ने कहा कि यह तीनों टोल बंद होने से लोगों के रोजमर्रा के 10.52 लाख रुपये बचेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौते के मुताबिक यह टोल 10 साल पहले बंद होने चाहिए थे परंतु तत्कालीन सरकारों ने टोल कंपनी पर मेहरबान होते हुए उल्टा कंपनी के खजाने को भरने में पूरी मदद की।
मुख्यमंत्री ने कहा, यह पंजाब की बदकिस्मती है कि हमारे राजनेताओं ने अपने ही लोगों के साथ वफा नहीं किया। पिछले समय में कांग्रेस और अकाली-भाजपा गठजोड़ की सरकारों ने अपने लोगों के हित सोचने के बजाय राज्य के खजाने को दोनों हाथों से लुटाया। इसकी स्पष्ट मिसाल इस प्रोजेक्ट से मिलती है कि कैसे सुखबीर सिंह बादल, विरोधी पक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा जो समझौते करने के मौके पर कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण मंत्री थे और अकाली सरकार के लोक निर्माण मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा छिपकर कंपनी के साथ मिलीभगत करके लोगों की जेबों पर डाका मारते रहे। इन नेताओं को लोगों के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने पंजाब निवासियों के साथ धोखा क्यों किया।
सीएम ने बताया कि 123.64 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत रोहन राजदीप टोलवेज कंपनी को 104.96 किमी सड़क बनानी थी और इस संबंध में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के समय छह दिसंबर, 2005 में समझौता हुआ और उस समय प्रताप सिंह बाजवा लोक निर्माण मंत्री थे।
कैप्टन सरकार ने कंपनी पर मेहरबान होते हुए 123.64 करोड़ रुपये के कुल प्रोजेक्ट में से 49.45 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी। कंपनी ने साल 2007 में नई सरकार के गठन से पहले छह मार्च 2007 को यह तीनों ही टोल चालू कर दिए थे। समझौते के अंतर्गत कंपनी ने पांच मार्च, 2013 तक सड़क पर कोलतार डालने का काम पूरा करना था लेकिन यह काम 30 अप्रैल, 2015 को पूरा किया गया जो 786 दिन देरी से था।
इस देरी के लिए कंपनी पर 24.30 करोड़ जुर्माना और 37.30 करोड़ रुपये ब्याज समेत कुल 61.60 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूल किया जा सकता था परंतु उस समय की अकाली-भाजपा सरकार ने जुर्माना वसूलने के बजाय माफ कर दिया जो पंजाब के लोगों को सरेआम धोखा देने वाला कदम था।
दूसरी बार कोलतार डालने का काम 5 मार्च, 2018 को पूरा होना था जो 979 दिनों की देरी के साथ 9 नवंबर, 2020 को पूरा हुआ परंतु कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने इस देरी के लिए नोटिस तक भी जारी न किया। इसके बाद तीसरी बार कोलतार डालने का काम जनवरी, 2023 तक पूरा होना था परंतु वह भी पूरा नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री ने बताया कि टोल कंपनी ने हमारी सरकार से कोविड के समय के 101 दिन और किसान आंदोलन की आड़ में 432 दिनों का हवाला देते हुए 533 दिनों की मोहलत मांगी थी और हमने इस मांग को सिरे से नकार दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह तीनों टोल 21 सितम्बर, 2013 तक बंद हो जाने चाहिए थे परंतु अकाली सरकार ने बंद नहीं किए। इससे 21 सितंबर, 2018 को फिर बंद किए जा सकते थे परंतु कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब निवासियों के हितों के उलट जाते हुए कंपनी को टोल चालू रखने की छूट दी। अगर आज भी अकालियों या कांग्रेस की सरकार होती तो यह टोल कभी बंद न होते।
विरोधी दलों के निजी फायदों का जिक्र करते हुए मान ने कहा कि इन दलों के साथ कंपनी की सांझ इतनी गहरी थी कि समझौता के क्लॉज में स्पष्ट दर्ज कर दिया गया। उल्लंघन होने की सूरत में कंपनी को 6.12 करोड़ रुपये से अधिक जुर्माना नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार उल्लंघन करने पर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और समझौते के नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जाएगा।