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चंडीगढ़: मलोया के 2195 फ्लैट्स को किराए पर देने का रास्ता साफ

Thu, 03 Sep 2020 11:34 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 03 Sep 2020 11:34 PM IST
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clear rent Maloya Chandigarh administration signed NOU Union Ministry Housing and Urban Development
सांकेतिक तस्वीर।

मलोया में हाउसिंग बोर्ड द्वारा बनाए गए 2195 फ्लैट्स को किराए पर देने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के साथ एमओयू साइन कर लिया है। बीते दिनों मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन के बीच हुए करार के अनुसार, यह मकान मजदूरों, कर्मचारियों आदि को 25 साल के लिए दिए जाएंगे। अब हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन के अधिकारियों की एक कमेटी बनाई जा रही है, जो इन मकानों के लिए किराए की राशि तय करेगी।

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मलोया में हाउसिंग बोर्ड ने 4960 स्मॉल फ्लैट्स का निर्माण किया था, जिसमें से फिलहाल 2445 फ्लैट्स खाली हैं लेकिन कालोनी नंबर चार में अभी 250 लोग ऐसे हैं, जो मकान पाने के हकदार हैं लेकिन किन्हीं कारणों से उनके फार्म लंबित हैं इसलिए हाउसिंग बोर्ड उनके 250 मकानों को छोड़कर बाकी 2195 मकानों को किराए पर देगा। यह मकान केंद्र सरकार की अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कांप्लेक्स स्कीम (एआरएचसी) के तहत दिए जाएंगे।
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इस स्कीम के लिए चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है और सेक्रेटरी हाउसिंग को नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सीईओ यशपाल गर्ग ने बताया कि बीते दिनों चंडीगढ़ ने केंद्रीय शहरी और आवास मंत्रालय के साथ एमओयू साइन किया है। इसके बाद अब इन मकानों के लिए किराया तय किया जाएगा, जिसके लिए जल्द दी प्रशासन और हाउसिंग बोर्ड की एक ज्वाइंट कमेटी बनाई जाएगी। किराया मार्केट सर्वे के आधार पर तय किया जाएगा। शुरुआती जानकारी के अनुसार किराया 2500 से 3000 रुपये तक हो सकता है, हालांकि कमेटी ही किराया तय करेगी। हर दो साल बाद 8 प्रतिशत और पांच साल बाद 20 प्रतिशत किराया बढ़ाया जाएगा।

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चंडीगढ़ में ऐसे लागू होगी यह स्कीम

प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि योजना को शहर में लागू करने और मकान के आवंटन के लिए एक एजेंसी को हायर किया जाएगा। यह एजेंसी किराएदारों से किराया वसूल करेगी और फिर अपना खर्चा निकाल कर हाउसिंग बोर्ड को एक तय राशि अदा करेगी, जो भी एजेंसी सबसे ज्यादा राशि अदा करेगी, उसे ही प्रशासन द्वारा हायर किया जाएगा। एजेंसी पर ही मकानों की मरम्मत आदि का जिम्मा होगा।

इस स्कीम को दो हिस्सों में बांटा गया है। सबसे पहले सरकारी पैसे से बने और खाली पड़े आवासीय परिसरों को एआरएचसी में बदला जाएगा और उन्हें 25 साल के लिए सस्ते किराए पर मजदूरों और गरीबों को प्रदान किया जाएगा। योजना के दूसरे हिस्से में सरकारी और निजी कंपनियों को अपनी जमीन पर 25 साल के लिए एआरएचसी बनाने के लिए कई तरह की छूट दी जाएंगी। बता दें कि 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में इस योजना का एलान किया गया था।

कर्मचारियों, मजदूरों और छात्रों को मिलेगा योजना का लाभ
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना का लाभ शहर के मजदूर वर्ग को होगा। कोरोना वायरस महामारी के कारण रोजगार के बेहतर मौकों के लिए गांवों और छोटे कस्बों से शहर आने वाले प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों का उल्टा पलायन हुआ है। आमतौर पर किराया बचाने के लिए ये मजदूर झुग्गी-झोपड़ियों, अनाधिकृत कालोनियों और शहर के बाहरी इलाकों में रहते हैं। इसके अलावा बेहतर मौकों की तलाश में गांवों से शहर आने वाले और मैन्युफैक्चरिंग, स्वास्थ्य, निर्माण, होटलों और व्यावसायिक संगठनों में काम करने वाले कर्मचारियों, मजदूरों और छात्रों को इस योजना से काफी लाभ मिलेगा।

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