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बॉलीवुड में क्लासिकल डांस को लेकर खुलकर बोलीं ये मशहूर नृत्यांगना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 11 Aug 2016 06:26 PM IST
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क्लासिकल डांसर विजयलक्ष्मी का इंटरव्यू
- फोटो : अमर उजाला
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बॉलीवुड में क्लासिकल डांस के प्रयोग को लेकर मशहूर नृत्यांगना विजयलक्ष्मी ने खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि सभी लोग बॉलीवुड डांस को देखना पसंद करते हैं और क्लासिकल डांस को नजरअंदाज किया जा रहा है। यहीं कारण है कि क्लासिकल डांस के लिए फंडिंग का प्रबंध भी नहीं हो पाता। लेकिन विदेशी लोग भारत की संस्कृति के पीछे भाग रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब बड़े ही बॉलीवुड की जकड़ में रहेंगे तो बच्चों में क्लासिकल डांस व म्यूजिक की लगन कैसे पैदा की जा सकती है? मोहिनीअट्टम नृत्यशैली स्त्री की सुंदरता के साथ-साथ उसकी शक्ति को भी प्रदर्शित करता है। यह कहना है केरल के शास्त्रीय नृत्य मोहिनीअट्टम की नृत्यांगना विजयलक्ष्मी का। वह स्पिक मैके द्वारा गवर्नमेंट स्कूलों में शुरू की गई वर्कशॉप के सिलसिले में सिटी ब्यूटीफुल आई हुई हैं।
अपने सफर की कहानी बयां की: विजयलक्ष्मी ने कहा कि नृत्य की कला उन्हें बचपन में अपनी मां भारती शिवाजी से मिली। पांच साल की उम्र में उन्होंने मोहिनीअट्टम सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि भारती एक मां के साथ-साथ अच्छी गुरु भी हैं। वह मुझे एक गुरु की तरह नृत्य सिखातीं और ढंग से न सीखने पर मुझे डांटती भी। आज मैं जिस जगह हूं उनकी बदौलत ही हूं।
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भारत के शास्त्रीय नृत्य के प्रति लोगों में रुचि के बारे में उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे इस बात से काफी दुख पहुंचता है कि ज्यादातर लोगों को शास्त्रीय नृत्य की जानकारी नहीं है। अगर कुछे जानते भी होंगे तो उन्हें भी भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी नृत्य के बारे में जानकारी होगी, लेकिन मोहिनीअट्टम से अधिकतर लोग अनजान हैं।
स्त्रीत्व पर फोकस करता है मोहिनीअट्टम
मोहिनीअट्टम को अपनी मां की तरह नए-नए रूप में पेश करने वाली विजयलक्ष्मी ने बताया कि मोहिनीअट्टम नृत्य में स्त्री की सुंदरता के साथ-साथ उसकी शक्ति भी नजर आती है। इससे औरतों में शारीरिक तौर पर स्फूर्ति और जान आती है। इसके अलावा समाज में बदलाव लाने के लिए डांस को एक माध्यम के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। विजयलक्ष्मी ने अपनी एक कोरियोग्राफी में केरल के 2000 वर्ष पुराने मार्शल आर्ट कलरीपायट्टु को इसमें शामिल किया था।
नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर पेश कर चुकी हैं नृत्य
संस्कृति नृत्य पुरस्कार और राष्ट्रीय एकता अवॉर्ड पाने वाली विजयलक्ष्मी को भारत सरकार के संस्कृति विभाग की ओर से फेलोशिप भी मिल चुकी है। इसके अलावा इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स ने मोहिनाअट्टम पर शोध करने के लिए स्पांसर किया गया। अपनी मां और गुरु भारती शिवाजी के साथ मिलकर विजयलक्ष्मी ने मोहिनीअट्टम पर पुस्तक भी लिखी। वह नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर कई बार इस नृत्य शैली को पेश कर चुकी हैं।क्या है
मोहिनीअट्टम नृत्य शैली
यह नृत्य एकल रूप में पेश किया जाता है। मोहिनीअट्टम शब्द दो शब्दों मोहिनी अर्थात मोह लेने वाली अट्टम यानी मुद्राएं से मिलकर बना है। इस नृत्य शैली में भरतनाट्यम और कथकली का संगम देखने को मिलता है। कॉस्ट्यूम की बात करें तो इस नृत्य विधा में नृत्यांगना साड़ी पहनती है जिसके किनारों पर सुनहरा ब्रोकेड लगा होता है। इसमें अन्य नृत्य शैलियों की तुलना में कम आभूषण होते हैं। नृत्यांगना संगीत पर परफार्म करती है और गीत के बोल संस्कृत और मलयालम भाषा में होते है। इसमें म्धयालम (तबला), बासुरी, वीणा जैसे विविध वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है।
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उन्होंने कहा कि जब बड़े ही बॉलीवुड की जकड़ में रहेंगे तो बच्चों में क्लासिकल डांस व म्यूजिक की लगन कैसे पैदा की जा सकती है? मोहिनीअट्टम नृत्यशैली स्त्री की सुंदरता के साथ-साथ उसकी शक्ति को भी प्रदर्शित करता है। यह कहना है केरल के शास्त्रीय नृत्य मोहिनीअट्टम की नृत्यांगना विजयलक्ष्मी का। वह स्पिक मैके द्वारा गवर्नमेंट स्कूलों में शुरू की गई वर्कशॉप के सिलसिले में सिटी ब्यूटीफुल आई हुई हैं।
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अपने सफर की कहानी बयां की: विजयलक्ष्मी ने कहा कि नृत्य की कला उन्हें बचपन में अपनी मां भारती शिवाजी से मिली। पांच साल की उम्र में उन्होंने मोहिनीअट्टम सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि भारती एक मां के साथ-साथ अच्छी गुरु भी हैं। वह मुझे एक गुरु की तरह नृत्य सिखातीं और ढंग से न सीखने पर मुझे डांटती भी। आज मैं जिस जगह हूं उनकी बदौलत ही हूं।
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भारत के शास्त्रीय नृत्य के प्रति लोगों में रुचि के बारे में उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे इस बात से काफी दुख पहुंचता है कि ज्यादातर लोगों को शास्त्रीय नृत्य की जानकारी नहीं है। अगर कुछे जानते भी होंगे तो उन्हें भी भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी नृत्य के बारे में जानकारी होगी, लेकिन मोहिनीअट्टम से अधिकतर लोग अनजान हैं।
स्त्रीत्व पर फोकस करता है मोहिनीअट्टम
मोहिनीअट्टम को अपनी मां की तरह नए-नए रूप में पेश करने वाली विजयलक्ष्मी ने बताया कि मोहिनीअट्टम नृत्य में स्त्री की सुंदरता के साथ-साथ उसकी शक्ति भी नजर आती है। इससे औरतों में शारीरिक तौर पर स्फूर्ति और जान आती है। इसके अलावा समाज में बदलाव लाने के लिए डांस को एक माध्यम के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। विजयलक्ष्मी ने अपनी एक कोरियोग्राफी में केरल के 2000 वर्ष पुराने मार्शल आर्ट कलरीपायट्टु को इसमें शामिल किया था।
नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर पेश कर चुकी हैं नृत्य
संस्कृति नृत्य पुरस्कार और राष्ट्रीय एकता अवॉर्ड पाने वाली विजयलक्ष्मी को भारत सरकार के संस्कृति विभाग की ओर से फेलोशिप भी मिल चुकी है। इसके अलावा इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स ने मोहिनाअट्टम पर शोध करने के लिए स्पांसर किया गया। अपनी मां और गुरु भारती शिवाजी के साथ मिलकर विजयलक्ष्मी ने मोहिनीअट्टम पर पुस्तक भी लिखी। वह नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर कई बार इस नृत्य शैली को पेश कर चुकी हैं।क्या है
मोहिनीअट्टम नृत्य शैली
यह नृत्य एकल रूप में पेश किया जाता है। मोहिनीअट्टम शब्द दो शब्दों मोहिनी अर्थात मोह लेने वाली अट्टम यानी मुद्राएं से मिलकर बना है। इस नृत्य शैली में भरतनाट्यम और कथकली का संगम देखने को मिलता है। कॉस्ट्यूम की बात करें तो इस नृत्य विधा में नृत्यांगना साड़ी पहनती है जिसके किनारों पर सुनहरा ब्रोकेड लगा होता है। इसमें अन्य नृत्य शैलियों की तुलना में कम आभूषण होते हैं। नृत्यांगना संगीत पर परफार्म करती है और गीत के बोल संस्कृत और मलयालम भाषा में होते है। इसमें म्धयालम (तबला), बासुरी, वीणा जैसे विविध वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है।