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पीयू में कक्षाएं बंद हुए आज एक साल पूरा, ऑनलाइन चल रही पढ़ाई
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में कक्षाओं का संचालन बंद हुए बुधवार को एक साल पूरा हो गया। 18 मार्च के बाद से कक्षाएं नहीं लगीं। पीयू पूरी तरह 20 मार्च को बंद हो गई थी। इस बंदी के दौरान पीयू को करोड़ों का नुकसान हुआ। आय आधी हो गई। शोध के जरिए बीच में कुछ सफलताएं हासिल हुई थीं, लेकिन रिसर्च पेपरों की संख्या में कमी आई। जुलाई से पीयू ने ऑनलाइन पढ़ाई की तरफ कदम रखा और इसके बाद छात्रों ने घर पर बैठे ही कक्षाएं लगाईं।
पिछले साल मार्च में कोरोना का प्रसार देश में हो रहा था। पीयू में पढ़ाई चल रही थी, लेकिन कक्षाएं 18 मार्च को बंद कर दी गईं, क्योंकि इसके बाद दो से तीन दिन की छुट्टियां पड़ गईं और पीयू स्थायी रूप से बंद कर दी गई। शुरुआत के दो माह तक न पढ़ाई हुई और न कोई अन्य कार्य। सबको यही लग रहा था कि वेतन मिलेगा या नहीं। हालांकि काम चलता रहा। पीयू के 20 छात्रावासों के बंद होने से आय बंद हो गई। इसके अलावा 30 से अधिक विभागीय कैंटीन बंद हो गईं। किराया पीयू को माफ करना पड़ा। अन्य मदों से मिलने वाला शुल्क भी नहीं मिल पाया। चाहे वह प्रमाण पत्रों की जांच को हो या फिर कोई अन्य। बताया जाता है कि पीयू को 40 करोड़ तक का नुकसान हुआ। परीक्षा शुल्क आदि भी नहीं वसूला गया।
ऑनलाइन पढ़ाई में इस तरह सफलता मिली
जुलाई से ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन की ओर कदम बढ़ाया गया। ऑनलाइन शिक्षा का सफल संचालन शुरू में नहीं हो पाया, क्योंकि न तो शिक्षक पूरी तरह इस कला में पारंगत थे और न ही विद्यार्थी। इसके लिए पीयू ने प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। पीयू समेत कई विश्वविद्यालयों के एक हजार से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। पढ़ाई शुरू हुई, लेकिन परीक्षा आयोजित नहीं हो पाई और छात्रों को प्रमोट करना पड़ा। हालांकि अंतिम वर्ष के छात्रों की ऑनलाइन परीक्षाएं हुईं। यही परीक्षा अभी भी विद्यार्थियों की चल रही है। अब तक कैंपस के दरवाजे विद्यार्थियों के लिए नहीं खोले गए हैं। इस बीच 13 से अधिक शिक्षकों ने 40 रिसर्च पेपर लिखे, जो कोरोना से संबंधित थे। इसके अलावा सैफ लैब ने फाइलें व करेंसी सैनिटाइजेशन के लिए मशीन तैयार की। अन्य कार्य भी किए गए।
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इनसेट---
सीनेट व सिंडिकेट का कार्यकाल बिना चुनाव के पूरा हुआ
पहली बार ऐसा हुआ कि पीयू में सीनेट व सिंडिकेट के चुनाव हुए बिना ही उनका कार्यकाल पूरा हुआ। सीनेट के चुनाव के लिए कार्यक्रम तय हुआ और दो बार स्थगित किया गया। चुनाव के लिए प्रदर्शन भी हुए, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। आखिरी में 30 अक्तूबर को सीनेट व 31 दिसंबर को सिंडिकेट का कार्यकाल पूरा हो गया। बिना दोनों सदनों के पीयू का संचालन हो रहा है। अब पीयू शासन सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति कार्य कर रही है।
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पिछले साल मार्च में कोरोना का प्रसार देश में हो रहा था। पीयू में पढ़ाई चल रही थी, लेकिन कक्षाएं 18 मार्च को बंद कर दी गईं, क्योंकि इसके बाद दो से तीन दिन की छुट्टियां पड़ गईं और पीयू स्थायी रूप से बंद कर दी गई। शुरुआत के दो माह तक न पढ़ाई हुई और न कोई अन्य कार्य। सबको यही लग रहा था कि वेतन मिलेगा या नहीं। हालांकि काम चलता रहा। पीयू के 20 छात्रावासों के बंद होने से आय बंद हो गई। इसके अलावा 30 से अधिक विभागीय कैंटीन बंद हो गईं। किराया पीयू को माफ करना पड़ा। अन्य मदों से मिलने वाला शुल्क भी नहीं मिल पाया। चाहे वह प्रमाण पत्रों की जांच को हो या फिर कोई अन्य। बताया जाता है कि पीयू को 40 करोड़ तक का नुकसान हुआ। परीक्षा शुल्क आदि भी नहीं वसूला गया।
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ऑनलाइन पढ़ाई में इस तरह सफलता मिली
जुलाई से ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन की ओर कदम बढ़ाया गया। ऑनलाइन शिक्षा का सफल संचालन शुरू में नहीं हो पाया, क्योंकि न तो शिक्षक पूरी तरह इस कला में पारंगत थे और न ही विद्यार्थी। इसके लिए पीयू ने प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। पीयू समेत कई विश्वविद्यालयों के एक हजार से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। पढ़ाई शुरू हुई, लेकिन परीक्षा आयोजित नहीं हो पाई और छात्रों को प्रमोट करना पड़ा। हालांकि अंतिम वर्ष के छात्रों की ऑनलाइन परीक्षाएं हुईं। यही परीक्षा अभी भी विद्यार्थियों की चल रही है। अब तक कैंपस के दरवाजे विद्यार्थियों के लिए नहीं खोले गए हैं। इस बीच 13 से अधिक शिक्षकों ने 40 रिसर्च पेपर लिखे, जो कोरोना से संबंधित थे। इसके अलावा सैफ लैब ने फाइलें व करेंसी सैनिटाइजेशन के लिए मशीन तैयार की। अन्य कार्य भी किए गए।
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सीनेट व सिंडिकेट का कार्यकाल बिना चुनाव के पूरा हुआ
पहली बार ऐसा हुआ कि पीयू में सीनेट व सिंडिकेट के चुनाव हुए बिना ही उनका कार्यकाल पूरा हुआ। सीनेट के चुनाव के लिए कार्यक्रम तय हुआ और दो बार स्थगित किया गया। चुनाव के लिए प्रदर्शन भी हुए, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। आखिरी में 30 अक्तूबर को सीनेट व 31 दिसंबर को सिंडिकेट का कार्यकाल पूरा हो गया। बिना दोनों सदनों के पीयू का संचालन हो रहा है। अब पीयू शासन सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति कार्य कर रही है।