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नगर निगम की बैठक में जमकर हंगामा, भाजपा के मौखिक प्रस्ताव पर कमिश्नर ने जताई असहमति

Thu, 31 Jan 2019 10:49 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 31 Jan 2019 10:49 AM IST
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Clash on Vendors Act in Nagar Nigam Chandigarh Meeting
नगर निगम चंडीगढ़ की बैठक
चंडीगढ़ नगर निगम सदन की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। अवैध वेंडरों से जुर्माना वसूलने के मामले में पूर्व मेयर व भाजपा पार्षद अरुण सूद और नगर निगम कमिश्नर के बीच तीखी बहस हुई। अरुण सूद जुर्माने की इस रकम को वापस लेने की मांग कर रहे थे जबकि कमिश्नर ने दो टूक कह दिया कि जब तक सदन में बाकायदा लिखित प्रस्ताव लाकर उसे पास नहीं किया जाएगा तब तक जुर्माना खत्म करना संभव नहीं है। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने मौखिक रूप से सदन में इस संबंधी प्रस्ताव रखा, जिस पर कमिश्नर का अपना डिस्सेंट नोट (असहमति पत्र) लिखवाना पड़ा।
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नगर निगम सदन की बैठक में पार्षद अरुण सूद ने कहा कि अवैध वेंडरों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाना ठीक नहीं है, इसे नगर निगम को वापस ले लेना चाहिए। इस पर नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि ऐसा संभव नहीं है क्योंकि ऐसे प्रस्ताव को सदन में पास कराने के लिए एजेंडा लाया जाना जरूरी है। इस पर अरुण सूद ने सदन में मौखिक रूप से प्रस्ताव रख दिया कि अवैध वेंडरों से 10 हजार रुपये का जुर्माना खत्म किया जाए। पार्षद आशा जसवाल ने इस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया। फिर अरुण सूद के प्रस्ताव को भाजपा के अन्य सदस्यों ने भी सहमति प्रदान कराई।
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इसके बाद नगर निगम कमिश्नर ने सूद को समझाने की कोशिश की लेकिन जब वह नहीं माने तो सचिव संजय झा ने नगर एक्ट के प्रावधानों को पढ़कर बताया। इसके बाद भी सूद के नहीं मानने पर नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने असहमति पत्र लिखवा दिया और कहा कि सदन को चलाने की मर्यादा बहुत जरूरी है। अगर सदन मर्यादा के अनुसार नहीं चलेगी तो भावना को ठेस पहुंचेगी। इस पर अरुण सूद ने कहा कि कई बार आप ऐसा बोलते हैं तो बात चुभ जाती है।
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इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्षद बबला ने भाजपा पार्षदों से कहा कि पहले आप लोगों ने ही अवैध वेंडरों पर यह जुर्माना लगाया और आज खुद ही इसे हटाने की बात क्यों कर रहे हैं। चुनाव सिर पर आते ही भाजपा ने अपना रंग बदल लिया। भाजपा पार्षदों ने कमिश्नर के कहने के बावजूद बिना एजेंडा लाए ही उक्त प्रस्ताव को मौखिक ही सत्तापक्ष की ओर से पास कर दिया कि दुकानदारों से दस हजार रुपये का जुर्माना न वसूला जाए। कमिश्नर ने भी इस पर कहा कि सदन में पास किए गए प्रस्ताव को स्थानीय निकाय सचिव को भेज देंगे।


सूद ने कहा कि हमने इसे यहां पास कर दिया है स्थानीय निकाय सचिव इसे पास करें या नही करें उनकी मर्जी। हमने तो अपनी जिम्मेदारी को पूरा कर दिया है। प्रशासन ने दुकानदारों की ओर से दुकानों के आगे सामान रखने पर 10 हजार रुपये के जुर्माना का प्रावधान किया था, जिसे भाजपा पार्षदों ने जबरदस्ती रद्द करने का प्रस्ताव पास कर दिया। सत्ता पक्ष ने कहा कि सदन की बात सुना नहीं तो हाउस बंद करो। सतीश कैंथ और कांग्रेसी पार्षद ने इस पर कहा कि भाजपा अधिकारियों पर दबाव बनाकर काम करवाना चाहती है।

 
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