जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी में बवाल, आपस में भिड़े छात्र संगठन
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जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के विरोध में एसएफएस ने स्टूडेंट सेंटर पर प्रोटेस्ट रखा था। इसी बीच एबीवीपी के पदाधिकारी भी जश्न मनाने पहुंच गए। इसे लेकर दोनों छात्र संगठन आमने-सामने आ गए।
हाथापाई की स्थिति बनी तो पुलिस पहुंच गई। कई घंटे बवाल चला। पुलिस के साथ हाथापाई और धक्का-मुक्की हुई। मामला बढ़ता देखकर भारी संख्या में फोर्स बुलाई गई। आखिर में दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत करवाया गया।
एसएफएस, आईसा, पीएसयू ललकार समेत कई छात्र संगठनों ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के विरोध में स्टूडेंट सेंटर पर दो बजे प्रोटेस्ट रखा था।
प्रोटेस्ट के लिए इन छात्र संगठनों के पदाधिकारी एकत्रित हो रहे थे। इसी दौरान एबीवीपी के पदाधिकारी पहुंच गए और उन्होंने जम्मू कश्मीर पर लिए गए फैसले पर जश्न मनाना शुरू कर दिया। तेजी से नारेबाजी शुरू हो गई।
इसी दौरान दो बजे दूसरे छात्र संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों छात्र संगठनों के पदाधिकारी आमने-सामने आ गए। मामला बढ़ा तो उन्हीं संगठनों के कुछ पदाधिकारियों ने बीच-बचाव किया। किसी को आगे नहीं बढ़ने दिया। कुछ पदाधिकारियों ने धक्का-मुक्की की।
करीब 30 मिनट तक यह खींचतान, धक्का-मुक्की व नारेबाजी चलती रही। उसके बाद पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों के पदाधिकारियों को अलग-अलग किया, लेकिन छात्र नहीं माने। घंटों खींचतान चलती रही। हाथापाई हुई। पुलिस के पसीने छूट गए। खतरा भांपकर बड़ी संख्या में फोर्स बुलानी पड़ी। घंटों चले बवाल के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाया। उसके बाद मामला शांत हुआ।
पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने नहीं की थी तैयारी
केंद्र की ओर से जम्मू कश्मीर पर आए निर्णय के बाद जश्न व विरोध की खबरें पीयू में तैर रही थीं। सभी को पता था कि प्रोटेस्ट होने वाला है लेकिन पुलिस व पीयू के सुरक्षा कर्मियों ने इसकी तैयारी नहीं की थी। इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
यही कारण रहा कि प्रोटेस्ट शुरू होने के आधे घंटे बाद सूचना मिली तो पुलिस पहुंची। यदि दोनों संगठनों के कुछ पदाधिकारियों ने पहले बीच-बचाव नहीं किया होता तो बड़ा बवाल हो सकता था। हालांकि, बाद में पुलिस ने मामला शांत जरूर करवाया।
लगे भारत विरोधी नारे
प्रोटेस्ट के दौरान भारत विरोधी नारे भी लगे। प्रोटेस्ट के दौरान एक छात्र संगठन के छात्र ने कहा, जहां पर किसानों पर अत्याचार होता है, महिलाओं का बलात्कार हो रहा है, विद्यार्थियों से शिक्षा छीनी जा रही है, नौजवानों को बेरोजगार किया जाता है, किसानों पर हमले होते हैं और मजदूरों को मजदूरी का पूरा मूल्य नहीं देती, जो धर्म के नाम पर देश को बांट रही है, देश की अखंडता, एकता के ऊपर हमला कर रही है और देश के संविधान को नहीं मानकर मनुस्मृति के इशारों पर जो चल रही है तो हम ऐसे भारत माता को रिजक्ट करते हैं।
अभी से यह हाल, चुनाव अभी बाकी
छात्र संगठनों में अभी से ऐसा टकराव हो रहा है, जबकि चुनाव आने में अभी एक माह है। बताया जा रहा है कि पीयू में पुलिस फोर्स की तैनाती इस बवाल को देखते हुए बढ़ा देनी चाहिए। स्टूडेंट सेंटर पर हर दिन प्रोटेस्ट हो रहे हैं। ऐसे में छात्र संगठन बड़ा हंगामा कर सकते हैं। इस बार पीयू प्रशासन के लिए चुनाव कराना आसान नहीं दिख रहा है।
नहीं पहुंचा पीयू प्रशासन
इतने बड़े मामले की खबर सबसे पहले पीयू प्रशासन को पहुंची। क्योंकि स्टूडेंट सेंटर पर ही कई अधिकारियों के ऑफिस हैं, जो स्टूडेंट्स के हितों की रक्षा या उनकी मदद करते हैं। घंटों बवाल हुआ लेकिन कोई भी अधिकारी इसको शांत कराने नहीं पहुंचा। यदि स्टूडेंट सेंटर पर कोई अधिकारी नहीं थे तो पीयू प्रशासन को सूचना मिलते ही भेजने थे, पर ऐसा नहीं किया गया। पीयू प्रशासन के इस रवैये को लेकर दूसरे छात्रों में आक्रोश है।
एसएफएस कश्मीरियों के साथ
एसएफएस ने प्रोटेस्ट में कहा कि वह कश्मीरियों के साथ है। धारा 370 गलत तरीके से हटाई गई। यह कश्मीरी लोगों की संप्रभुता और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा और क्रूर हमला है। इस संघर्ष में हजारों कश्मीरी लोगों की हत्या, अत्याचार, फर्जी मुठभेड़, बलपूर्वक गायब कर देना आदि होगा। सरकार की मंशा कश्मीर पर कब्जा करना है और कश्मीरी लोगों को बेदखल करना चाहती है। इस जमीन को कारपोरेट घरानों को सरकार देना चाहती है।
एबीवीपी ने बांटी मिठाई
एबीवीपी के पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार का निर्णय ऐतिहासिक है। इस निर्णय से लाखों, करोड़ों लोगों को लाभ मिलेगा। इससे आतंकवाद भी कम होगा। साथ ही कश्मीर में रहने वाले लोगों का भी विकास होगा। जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा है, इसलिए हर फैसला सरकार लेगी। आज तक सरकारों ने ऐसा नहीं किया। इस दौरान एबीवीपी के पदाधिकारियों ने मिठाई बांटी।
जम्मू की संवैधानिक स्थिति पर हमला
पीयू आईसा अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा है कि 370 धारा हटाने से जम्मू कश्मीर की संवैधानिक स्थिति पर हमला किया गया है। लोकतंत्र में ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था। कश्मीर की जनता पर ऐसे में दमन किया जाएगा। इसमें कई जानें भी जाएंगी लेकिन सरकार ने इस ओर नहीं सोचा। आईसा इसकी निंदा करती है।
राष्ट्रगान का अपमान
एबीवीपी की ओर से अचानक राष्ट्रध्वज लाया गया और उसी दौरान सभी छात्रों ने राष्ट्रगान शुरू कर दिया। इस दौरान दूसरी ओर प्रोटेस्ट चलता रहा। पुलिस भी छात्रों को समझाती रही। अधिकांश लोग सावधान की मुद्रा में नजर नहीं आए। कई लोगों ने कहा कि अचानक ऐसे राष्ट्रगान नहीं गाना चाहिए था। यह राष्ट्रगान का अपमान है।
जम्मू कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार ने जो निर्णय लिया है, वह गलत है। वहां की जनता का दमन किया गया है। उनको विश्वास में नहीं लिया गया। जनता क्या चाहती है, यह सरकार नहीं सुनना चाहती है। इसी के विरोध में हमने प्रोटेस्ट किया है, लेकिन कुछ लोगों ने हमें रोकने की कोशिश की। -कनुप्रिया, छात्र काउंसिल अध्यक्ष पीयू
जम्मू कश्मीर मुद्दे पर लिया गया फैसला स्वागत योग्य है। उसी के जश्न के लिए हम इकट्ठा हुए थे लेकिन कुछ अलगाववादी ताकतों ने हमें रोकने की कोशिश की थी। उन्होंने कश्मीर की आजादी के नारे भी लगाए। - कुलदीप पंघाल, अध्यक्ष एबीवीपी