लुधियाना: फिर से सभी रूट पर दौड़ेंगी सिटी बसें, अब यात्रियों को चुकाना पड़ेगा दोगुना किराया, पढ़ें- नए रेट
लुधियाना शहर की सड़कों पर एक बार फिर सिटी बसें फर्राटा भरेंगी। कोरोना महामारी के बाद कुछ रूटों पर ही इन बसों का संचालन किया जा रहा हा था लेकिन अब बस किराया बढ़ाने को लेकर नगर निगम व कंपनी के बीच सहमति बनती दिख रही है। हालांकि लोगों को दोगुना किराया चुकाना पड़ेगा।
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लुधियाना में सिटी बस को चला रही होराइजन ट्रांसवे लिमिटेड और नगर निगम के बीच विवाद थम गया है। विवाद के चलते महानगर में महज दो रूट पर इस समय बसें दौड़ रही थी। कंपनी की ओर से सिटी बस सर्विस लिमिटेड बोर्ड के समक्ष कई सालों से रेट बढ़ाने की मांग की जा रही थी। बोर्ड की तरफ से उनकी बात को अनसुना किया जा रहा था।
इस काम में कंपनी को हर माह लाखों रुपये घाटा उठाना पड़ रहा था। आखिरकार यह मामला अदालत में चला गया था। इस मुद्दे को लेकर अब बोर्ड ने सिटी बस का किराया बढ़ाने पर अपनी सहमति दे दी है। बसों को चला रही कंपनी को अपना केस वापस लेने के लिए कहा गया है। इस फैसले के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि महानगर के सभी रूट पर सिटी बस दौड़ना शुरू कर देगी।
बोर्ड की तरफ से सिटी बस किराया दोगुना करने पर अपनी सहमति दे दी है। नए रेट को बुधवार से लागू कर दिया गया है। सिटी बस संचालन कर रही कंपनी के जीएम जसकीरत सिंह ने बताया कि अभी फैसले की कॉपी उनके पास नहीं पहुंची है जैसे आर्डर आ जाएंगे नए रेट लागू कर दिए जाएंगे।
वर्ष 2009 में केंद्र सरकार की मदद से सिटी बस सर्विस शुरू की गई है। जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत 200 बड़ी व मिनी बसें खरीदनी थी। नगर निगम ने 65.20 करोड़ रुपये खर्च कर 200 में से 120 बसें ही खरीदी। इसकी शुरुआत में नगर निगम ने कांट्रैक्ट पर ड्राइवर और कंडक्टर रखकर खुद 20 बसों का संचालन किया। इसके बाद पुणे की एक कंपनी से बसें चलाने का अनुबंध किया।
निगम को कंपनी को बसों के संचालन के लिए पैसा देना पड़ रहा था। वर्ष 2014 में छह माह तक सिटी बस सर्विस बंद रही। वर्ष 2015 में होराइजन ट्रांसवेज प्राइवेट लिमिटड के साथ 83 बसों को चलाने का करार किया गया। इसमें कंपनी को प्रति बस 15 सौ रुपये निगम को देने थे।
कंपनी के साथ एग्रीमेंट में लिखा गया था जब डीजल के दाम बढ़ेंगे तो बोर्ड रेट बढ़ाएगा। होराइजन कंपनी ने बसों का परिचालन शुरू किया था, उस समय डीजल का रेट 45 रुपये लीटर था। डीजल के दाम 100 रुपये को छूकर 85 रुपये लीटर तक आ चुके है। इस दौरान बोर्ड की तरफ से बस किराया में एक रुपये की बढ़ोतरी नहीं की गई। इस घाटे के चलते यह विवाद शुरू हो गया था।
कंपनी ने निगम को प्रति बस चार्ज देना बंद कर दिया था। निगम बार-बार रिकवरी का नोटिस भेज रह था। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बना था। 27 नवंबर को मेयर ने मामले का हल करने के लिए बैठक बुलाई थी। इसमें दोनों पक्षों में सहमति बन गई।
इतना बढ़ा किराया
- पांच रुपये की जगह 10 रुपये
- 10 रुपये की जगह 20 रुपये
- 15 रुपये की जगह 25 रुपये