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सिटीजन फोरम बोली, बंद हो शराब के ठेके
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Sun, 13 Apr 2014 01:31 PM IST
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शहर में घरों के समीप खुले प्लॉटों में खोले जा रहे शराब ठेकों के विरोध में सिटीजन डेवलपमेंट फोरम भी उतर आया है। फोरम ने इस मामले को लेकर शनिवार को एक आपात मीटिंग की।
साथ ही तय किया कि अगर एक्साइज विभाग ने जबरदस्ती घरों के समीप ठेके खोलने की कोशिश की। तो एक्साइज विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जनता के सहयोग से आंदोलन चलाया जाएगा।
फोरम के प्रधान ने बताया कि देखने में आया कि विभाग द्वारा ठेके बिल्कुल घरों के पास खोले जा रहे हैं। जिससे लोगों में रोष पाया जा रहा है। ठेके खुलने से जहां आम लोगों को दिक्तत आएगी। वहीं, महिलाओं का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा।
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यह बात भी सामने आई है कि ठेके खोलते समय आम लोगों की राय नहीं ली जाती है। जो कि पंजाब एक्साइज एक्ट 1914 के रूल नंबर 35 (2) के तहत जरूरी है। दूसरी तरफ आम जीवन से संबंधित जरूरी सेवाएं जैसे कि स्कूल, डिस्पेंसरियों व आम प्रयोग होने वाली चीजों के लोग हमेशा ही प्रार्थना करते रहते हैं।
जिन्हें सरकार द्वारा पूरा नहीं किया जाता है। जबकि नशों की दुकानों को सरकार द्वारा जबरदस्ती लोगों पर थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अगर ठेके खोलने के लिए जगह नहीं थी। तो इतनी बड़ी संख्या में ठेकों के लाइसेंस जारी नहीं करने चाहिए थे।
दूसरी तरफ इसी मामले को लेकर फेज-4 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की मीटिंग हुई। इसमें ठेकों को खुले में जगह अलॉट करने के लिए गमाडा की निंदा की गई।
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साथ ही तय किया कि अगर एक्साइज विभाग ने जबरदस्ती घरों के समीप ठेके खोलने की कोशिश की। तो एक्साइज विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जनता के सहयोग से आंदोलन चलाया जाएगा।
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फोरम के प्रधान ने बताया कि देखने में आया कि विभाग द्वारा ठेके बिल्कुल घरों के पास खोले जा रहे हैं। जिससे लोगों में रोष पाया जा रहा है। ठेके खुलने से जहां आम लोगों को दिक्तत आएगी। वहीं, महिलाओं का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा।
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यह बात भी सामने आई है कि ठेके खोलते समय आम लोगों की राय नहीं ली जाती है। जो कि पंजाब एक्साइज एक्ट 1914 के रूल नंबर 35 (2) के तहत जरूरी है। दूसरी तरफ आम जीवन से संबंधित जरूरी सेवाएं जैसे कि स्कूल, डिस्पेंसरियों व आम प्रयोग होने वाली चीजों के लोग हमेशा ही प्रार्थना करते रहते हैं।
जिन्हें सरकार द्वारा पूरा नहीं किया जाता है। जबकि नशों की दुकानों को सरकार द्वारा जबरदस्ती लोगों पर थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अगर ठेके खोलने के लिए जगह नहीं थी। तो इतनी बड़ी संख्या में ठेकों के लाइसेंस जारी नहीं करने चाहिए थे।
दूसरी तरफ इसी मामले को लेकर फेज-4 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की मीटिंग हुई। इसमें ठेकों को खुले में जगह अलॉट करने के लिए गमाडा की निंदा की गई।