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कैसे बचाएं पानी, जानना है तो 20 को आए यहां
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 19 Dec 2013 03:17 PM IST
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आप अगर पानी की यूं ही बर्बादी करेंगे तो एक दिन यह खत्म होने वाला है। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि सीआईआई-त्रिवानी वाटर इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट का कहना है।
आबादी के बढ़ने के संग पानी की मांग बढ़ी है पर इसको अब कंट्रोल में करना होगा। वाटर सिक्योरिटी पर सीआईआई चंडीगढ़ और त्रिवानी वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट द्वारा एक कान्क्लेव का आयोजन किया जाने वाला है।
यह आयोजन 20 दिसंबर को होगा। त्रिवानी वाटर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में पानी की डिमांड 110 मिलियन गैलेन प्रति दिन है। जबकि, यहां पानी की उपलब्धता 69.25 मिलियन गैलन है।
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यहां की परिस्थितियों दिनों दिन बदल रही हैं। रोजाना ग्राउंड वाटर एक्सट्रैक्शन 20 एमजीडी हो रहा है। यह कुल सप्लाई का सप्लाई का 29 फीसदी है।
वहीं, पंजाब में ग्राउंड वाटर लेवल लगातार नीचे जा रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित जिले नवांशहर, जालंधर, कपूरथला, मोगा, पटियाला, रोपड़, फतेहगढ़ साहिब, संगरूर, मानसा, बठिंडा, होशियारपुर, गुरदासपुर और अमृतसर शामिल हैं।
ज्यादा खपत की वजह से अंडरग्राउंड रिजर्व वाटर भी कम होता जा रहा है, जिससे वाटर लेवल पांच से दस मीटर तक नीचे चला गया है। ऐसा 1973 से लेकर 1996 के बीच हुआ है।
ऐसा देखा गया है कि प्रति साल वाटर लेवल की गिरावट 23 सेमी है। कुछ शहरी इलाकों और इंडस्ट्रियल टाउन में पानी के स्तर में गिरावट 0.5 से 0.6 मीटर तक होने लगी है।
सीआईआई नॉर्दर्न रीजन के रीजनल डायरेक्टर पिकेंदर पाल सिंह ने कहा कि पानी के दुरुपयोग के कारण नॉर्दर्न इंडिया में पानी के रिसोर्स कम हो चुके हैं।
ऐसी परिस्थितियों में वाटर मैनेजमेंट के मुद्दों पर चरचा और नई रणनीति तैयार करने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। इसको देखते हुए सीआईआई और त्रिवानी वाटर इंस्टीट्यूट ने नॉर्दर्न रीजन वाटर कानक्लेव का आयोजन करने का निर्णय लिया है।
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आबादी के बढ़ने के संग पानी की मांग बढ़ी है पर इसको अब कंट्रोल में करना होगा। वाटर सिक्योरिटी पर सीआईआई चंडीगढ़ और त्रिवानी वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट द्वारा एक कान्क्लेव का आयोजन किया जाने वाला है।
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यह आयोजन 20 दिसंबर को होगा। त्रिवानी वाटर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में पानी की डिमांड 110 मिलियन गैलेन प्रति दिन है। जबकि, यहां पानी की उपलब्धता 69.25 मिलियन गैलन है।
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यहां की परिस्थितियों दिनों दिन बदल रही हैं। रोजाना ग्राउंड वाटर एक्सट्रैक्शन 20 एमजीडी हो रहा है। यह कुल सप्लाई का सप्लाई का 29 फीसदी है।
वहीं, पंजाब में ग्राउंड वाटर लेवल लगातार नीचे जा रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित जिले नवांशहर, जालंधर, कपूरथला, मोगा, पटियाला, रोपड़, फतेहगढ़ साहिब, संगरूर, मानसा, बठिंडा, होशियारपुर, गुरदासपुर और अमृतसर शामिल हैं।
ज्यादा खपत की वजह से अंडरग्राउंड रिजर्व वाटर भी कम होता जा रहा है, जिससे वाटर लेवल पांच से दस मीटर तक नीचे चला गया है। ऐसा 1973 से लेकर 1996 के बीच हुआ है।
ऐसा देखा गया है कि प्रति साल वाटर लेवल की गिरावट 23 सेमी है। कुछ शहरी इलाकों और इंडस्ट्रियल टाउन में पानी के स्तर में गिरावट 0.5 से 0.6 मीटर तक होने लगी है।
सीआईआई नॉर्दर्न रीजन के रीजनल डायरेक्टर पिकेंदर पाल सिंह ने कहा कि पानी के दुरुपयोग के कारण नॉर्दर्न इंडिया में पानी के रिसोर्स कम हो चुके हैं।
ऐसी परिस्थितियों में वाटर मैनेजमेंट के मुद्दों पर चरचा और नई रणनीति तैयार करने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। इसको देखते हुए सीआईआई और त्रिवानी वाटर इंस्टीट्यूट ने नॉर्दर्न रीजन वाटर कानक्लेव का आयोजन करने का निर्णय लिया है।