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क्लोरीन गैस लीक, मची अफरा-तफरी, 4 फायरकर्मी बेहोश
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 19 May 2016 09:35 AM IST
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चंडीगढ़ में लीक हुई क्लोरीन गैस
- फोटो : अमर उजाला
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सेक्टर-26 स्थित ट्रांसपोर्ट एरिया में बुधवार सुबह बड़ा हादसा होते-होते बच गया। यहां स्थित कमल गुड्स कैरियर में क्लोरीन गैस का सिलेंडर लीक होने के कारण अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ती देख ट्रांसपोर्टर ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। मौके पर पहुंचे फायर कर्र्मियों में से चार गैस रिसाव पर काबू पाते समय बेहोश हो गए। उन्हें पीसीआर और स्वास्थ्य विभाग की सहायता से जीएमएसएच-16 में भर्ती करवाया गया। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद गैस रिसाव रोकने में सफलता मिली।
इस दौरान पुलिस ने मौजूद भीड़ को दूर किया और आसपास का एरिया सील कर दिया। जब तक गैस रिसाव पर काबू नहीं पाया जा सका, तब तक इस एरिया में लोगों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया। इस दौरान मौके पर डिफेंस, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और फायर विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही। पुलिस अब इस जांच में जुटी है कि यह सिलेंडर आया कहां से। एएसपी ईस्ट गुरपाल सिंह सिद्धू का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। अगर ट्रांसपोर्टर की गलती पाई गई तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
मौके पर पहुंचीं फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां
जानकारी के अनुसार सुबह करीब 10:20 बजे ट्रांसपोर्ट एरिया से पुलिस के पास कॉल आई। कॉलर ने बताया कि गोदाम में रखा क्लोरीन गैस का सिलेंडर लीक कर रहा है। पुलिस ने दमकल विभाग को सूचना दी। 4 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायरकर्मियों ने मास्क लगाकर लीक हो रहे सिलेंडर पर पानी की बौछारें डालनी शुरू कर दी, ताकि लीक होने वाली गैस का प्रभाव हवा में कम किया जा सके। इस दौरान अचानक चार फायरकर्मियों की हालत खराब होने लगी। उन्हें जीएमएसएच-16 में भर्ती करवाया गया।
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क्रेन मंगवाई और गड्ढा खोदा फिर सिलेंडर उसमें रख भरा पानी
गैस का प्रभाव का प्रभाव कम न होने के बाद क्रेन मंगाई गई। क्रेन की सहायता से एक बड़ा गड्ढा खोदकर उसमें लीक होने वाला सिलेंडर रखा गया। उस गड्ढे में ऊपर तक पानी भरने के बाद गैस का प्रभाव कम हुआ। फायर विभाग की टीम को गैस को कंट्रोल करने में करीब 3 घंटे का समय लगा। गैस चढ़ने के कारण मनीमाजरा फायर स्टेशन के फायरमेन नवीन, वरिंद्र सिंह, जसपाल सिंह व इंडस्ट्रियल एरिया फेस-1 में तैनात फायरमेन राजकुमार बेहोश हुए। सभी को अस्पताल में जाते ही ऑक्सीजन लगाकर प्राथमिक उपचार दिया गया।
जब कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ी तो पता चला गैस लीक हो रही है
जिस जगह क्लोरीन सिलेंडर रखा गया था, उस प्लॉट में ट्रांसपोर्टर्स के कुल 8 कार्यालय हैं। प्रत्येक कार्यालय में तकरीबन 25 से 30 कर्मचारी की ड्यूटी होती है। गैस रिसाव के बाद जब कर्मचारियों की हालत खराब हुई तो टांसपोर्टर मुकेश को गैस रिसाव का एहसास हुआ।
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इस दौरान पुलिस ने मौजूद भीड़ को दूर किया और आसपास का एरिया सील कर दिया। जब तक गैस रिसाव पर काबू नहीं पाया जा सका, तब तक इस एरिया में लोगों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया। इस दौरान मौके पर डिफेंस, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और फायर विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही। पुलिस अब इस जांच में जुटी है कि यह सिलेंडर आया कहां से। एएसपी ईस्ट गुरपाल सिंह सिद्धू का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। अगर ट्रांसपोर्टर की गलती पाई गई तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
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मौके पर पहुंचीं फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां
जानकारी के अनुसार सुबह करीब 10:20 बजे ट्रांसपोर्ट एरिया से पुलिस के पास कॉल आई। कॉलर ने बताया कि गोदाम में रखा क्लोरीन गैस का सिलेंडर लीक कर रहा है। पुलिस ने दमकल विभाग को सूचना दी। 4 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायरकर्मियों ने मास्क लगाकर लीक हो रहे सिलेंडर पर पानी की बौछारें डालनी शुरू कर दी, ताकि लीक होने वाली गैस का प्रभाव हवा में कम किया जा सके। इस दौरान अचानक चार फायरकर्मियों की हालत खराब होने लगी। उन्हें जीएमएसएच-16 में भर्ती करवाया गया।
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क्रेन मंगवाई और गड्ढा खोदा फिर सिलेंडर उसमें रख भरा पानी
गैस का प्रभाव का प्रभाव कम न होने के बाद क्रेन मंगाई गई। क्रेन की सहायता से एक बड़ा गड्ढा खोदकर उसमें लीक होने वाला सिलेंडर रखा गया। उस गड्ढे में ऊपर तक पानी भरने के बाद गैस का प्रभाव कम हुआ। फायर विभाग की टीम को गैस को कंट्रोल करने में करीब 3 घंटे का समय लगा। गैस चढ़ने के कारण मनीमाजरा फायर स्टेशन के फायरमेन नवीन, वरिंद्र सिंह, जसपाल सिंह व इंडस्ट्रियल एरिया फेस-1 में तैनात फायरमेन राजकुमार बेहोश हुए। सभी को अस्पताल में जाते ही ऑक्सीजन लगाकर प्राथमिक उपचार दिया गया।
जब कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ी तो पता चला गैस लीक हो रही है
जिस जगह क्लोरीन सिलेंडर रखा गया था, उस प्लॉट में ट्रांसपोर्टर्स के कुल 8 कार्यालय हैं। प्रत्येक कार्यालय में तकरीबन 25 से 30 कर्मचारी की ड्यूटी होती है। गैस रिसाव के बाद जब कर्मचारियों की हालत खराब हुई तो टांसपोर्टर मुकेश को गैस रिसाव का एहसास हुआ।