लिटरेचर फेस्टः थियेटर, कविता और इतिहास से रूबरू हुए बच्चे

ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 30 Mar 2014 12:57 PM IST
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Children Literature Fest in Chandigarh

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टैगोर थिएटर में बच्चे अपने पसंदीदा लेखकों से मिलने के इंतजार में थे। सेशन की शुरुआत हुई मुंबई की लेखिका संपूर्णा चटर्जी के कविताओं को समझने और लिखने के विषय पर।
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संपूर्णा ने बच्चों को एक-एक शब्द चुनकर उन शब्दों से एक नई कविता बनाने को कहा। कविता से आगे बढ़ते हुए बच्चों ने दिल्ली के थिएटर आर्टिस्ट सुकेश अरोड़ा से थिएटर के जरिए कहानी बनाने का पाठ पड़ा। कुछ इस तरह से शुरू हुआ चिल्ड्रन लिट्रेचर फेस्टिवल का दूसरा दिन।
अदब फाउंडेशन और दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल द्वारा आयोजित चिल्ड्रन फेस्टिवल में दूसरे दिन भी दिल्ली और मुंबई के लेखकों ने बच्चों को साहित्य से संबंधित विषय पर वर्कशॉप ली।
कविता का मतलब सिर्फ जॉनी-जॉनी यस पापा नहीं: संपूर्णा  
बच्चों की कविताओं के लिए एक गलत धारणा है, सब उसे सिर्फ जॉनी-जॉनी यस पापा तक ही सोचते है, बल्कि इस दिशा में कई लेखकों ने बहुत ही अच्छी कविताएं लिखी हैं।

संपूर्णा ने बताया डार्जिलिंग में स्कूल के दिनों से ही लिखने का शौक पैदा हुआ। कालेज के बाद, कोलकाता में एक विज्ञापन एजेंसी ज्वाइन की। फिर 2004 में सुकुमार राय की बंगाली कविताओं का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करके कविताओं की पहली किताब जारी की। तब से करीब 13 किताबें लिख चुकी हूं।

थिएटर विषय के तौर पर पढ़ाना चाहिए: सुकेश
दिल्ली के रंगकर्मी सुकेश ने बताया कि बचपन में माता-पिता उन्हें इंजीनियर बनने के लिए प्रेरित करते थे, लेकिन उन्होंने थिएटर को कैरियर के रूप में चुना। स्कूल के बाद थिएटर निर्देशक बैरी जॉन्स के साथ बारीकियां सीखी।

इस दौरान अफ्रीका के एक स्कूल में ड्रामा टीचर की नौकरी भी की। भारत आने पर खुद की थिएटर कंपनी ‘येलो कैट’ खोली, जिसमें, स्कूली बच्चों को ट्रेनिंग, कला और पढ़ाई से संबंधित वर्कशॉप दी जाती है।

बच्चों के लिए इतिहास लिखना कठिन: देविका
 
स्वामी विवेकानंद और हर्ष वर्धन जैसे लोगों की जिंदगी पर लिखने वाले दिल्ली की लेखिका डा. देविका रंगाचारी ने कहा कि इतिहास में महत्व रखने वाले लोगों पर बच्चों के लिए लिखना बहुत मुश्किल है। बच्चे इतिहास से जल्दी ऊब जाते हैं। इसलिए इनमें थोड़ा ड्रामा भी रचना पड़ता है।

देविका ने बताया दिल्ली से इतिहास में एमए करने के बाद लिखना शुरू किया। उन्होंने बताया टीवी में जो भी इतिहास से संबंधित नाटक आते है, उसमें सिर्फ पांच फीसदीफैक्ट होता है, बाकी कहानी गढ़ी जाती है। देविका अभी तक 17 किताबें लिख चुकी हैं। उनकी दो नई किताबें क्वीन ऑफ कश्मीर और एक अन्य किताब (नाम अभी तय नहीं) का विमोचन जल्द ही किया जाएगा।  
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