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Chandigarh News: बाल अधिकार आयोग ने सोशल मीडिया पर अश्लीलता फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के दिए आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब राज्य बाल अधिकार आयोग ने एक पत्र जारी करते हुए पंजाब राज्य के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (साइबर क्राइम) को सोशल मीडिया पर अश्लीलता फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश दिए हैं।
पंजाब राज्य बाल अधिकार आयोग के चेयरमैन कंवरदीप सिंह की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि सोशल मीडिया का प्रभाव बच्चों पर बढ़ता जा रहा है। कुछ लोग पैसा कमाने की खातिर सोशल मीडिया पर गलत कंटेंट व सामग्री लगातार अपलोड कर रहे हैं, जिसका बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर अश्लील भाषा, दोहरे-अर्थ वाली वीडियो, नशे और गन कल्चर को उत्साहित करने वाली वीडियो को तुरंत प्रभाव से सोशल मीडिया से हटाने और बैन करने के लिए कार्रवाई की जाए। उन्होंने हिदायत की कि ऐसी सामग्री पर नजर रखने के लिए मुख्य दफ्तर में एक नोडल ऑफिसर नामित किया जाए।
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यदि ऐसे कंटेंट विदेशों से अपलोड होते हैं तो उनकी साइट पर पाबंदी लगाने के लिए कार्रवाई की जाए। अपलोड कंटेंट को देख कर कंटेंट तैयार करने और सोशल मीडिया पर अपलोड करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध मामले दर्ज किए जाएं। आयोग की ओर से जारी हिदायतों पर 15 दिन के अंदर-लिखित तौर पर अवगत करवाने के लिए भी कहा है।
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चंडीगढ़। पंजाब राज्य बाल अधिकार आयोग ने एक पत्र जारी करते हुए पंजाब राज्य के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (साइबर क्राइम) को सोशल मीडिया पर अश्लीलता फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश दिए हैं।
पंजाब राज्य बाल अधिकार आयोग के चेयरमैन कंवरदीप सिंह की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि सोशल मीडिया का प्रभाव बच्चों पर बढ़ता जा रहा है। कुछ लोग पैसा कमाने की खातिर सोशल मीडिया पर गलत कंटेंट व सामग्री लगातार अपलोड कर रहे हैं, जिसका बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर अश्लील भाषा, दोहरे-अर्थ वाली वीडियो, नशे और गन कल्चर को उत्साहित करने वाली वीडियो को तुरंत प्रभाव से सोशल मीडिया से हटाने और बैन करने के लिए कार्रवाई की जाए। उन्होंने हिदायत की कि ऐसी सामग्री पर नजर रखने के लिए मुख्य दफ्तर में एक नोडल ऑफिसर नामित किया जाए।
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यदि ऐसे कंटेंट विदेशों से अपलोड होते हैं तो उनकी साइट पर पाबंदी लगाने के लिए कार्रवाई की जाए। अपलोड कंटेंट को देख कर कंटेंट तैयार करने और सोशल मीडिया पर अपलोड करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध मामले दर्ज किए जाएं। आयोग की ओर से जारी हिदायतों पर 15 दिन के अंदर-लिखित तौर पर अवगत करवाने के लिए भी कहा है।