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Chandigarh News: चंडीगढ़ में नहीं खत्म हुआ बाल श्रम, 5 साल में दर्ज हुए 10 केस
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चंडीगढ़ में नहीं खत्म हुआ बाल श्रम, 5 साल में दर्ज हुए 10 केस
- हर साल 12 जून को मनाया जाता है विश्व बाल श्रम निषेध दिवस, चंडीगढ़ भी बाल श्रम से अछूता नहीं
- होटल, रेस्तरां, चाय स्टॉल, निर्माण स्थलों और बड़े घरों में घरेलू कामगार के रूप में देखे जाते हैं बाल श्रम
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। देश के सबसे विकसित और योजनाबद्ध शहरों में शामिल चंडीगढ़ में भी बाल श्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में शहर में बाल श्रम के 10 मामले दर्ज किए गए हैं। होटल, रेस्तरां, चाय स्टॉल, निर्माण स्थलों और बड़े घरों में घरेलू कामगार के रूप में काम करते हुए बच्चे अब भी देखे जा सकते हैं।
हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को शिक्षा व सुरक्षित बचपन दिलाना है। चंडीगढ़, जो देश का एक विकसित और योजनाबद्ध शहर है, वहां भी बाल श्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 और 2019 में बाल श्रम का कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ लेकिन 2020 में एक, 2021 में सात और 2022 में दो मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि बाल श्रम चंडीगढ़ में आज भी समाज की छिपी हुई परतों में जड़ें जमाए हुए है।
युवा स्तंभ एनजीओ के प्रेसिडेंट उपेंद्र ने बताया कि झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और प्रवासी मजदूरों के बच्चे बाल श्रम के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे बच्चों को अक्सर होटलों, रेस्तरां, चाय स्टॉलों, निर्माण स्थलों और यहां तक कि बड़े घरों में घरेलू कामगार के रूप में काम करते हुए देखा जा सकता है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण ये बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और कम उम्र में ही काम करने को मजबूर हो जाते हैं।
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केंद्र सरकार के पेंसिल पोर्टल पर भी हुईं 9 शिकायतें
प्लेटफॉर्म फॉर इफेक्टिव एनफोर्समेंट फॉर नो चाइल्ड लेबर (पेंसिल) पोर्टल पर कुल 9 शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह पोर्टल श्रम और रोजगार मंत्रालय की तरफ से चलाया जाता है। इस पोर्टल का उद्देश्य देश में बाल श्रम की समस्या का समाधान करना और बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है। कोई भी व्यक्ति पोर्टल पर जाकर बाल श्रम की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायत संबंधित जिले के नोडल अधिकारी को खुद भेजी जा सकती है। शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देख सकता है। पोर्टल केंद्र, राज्य, जिला प्रशासन, प्रोजेक्ट सोसाइटीज और आम जनता को जोड़ता है, जिससे बाल श्रम मामलों पर कार्रवाई संभव होती है। बचाए गए बच्चों के पुनर्वास एवं शिक्षा के लिए भी पोर्टल का उपयोग किया जाता है।
14 साल से कम के बच्चों से कोई भी श्रम करवाना अपराध
देश में बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम करवाना अपराध है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे अलग है। बाल श्रम न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करता है बल्कि उनके मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर भी गहरा असर डालता है। समाजसेवी शिशु पाल ने बताया कि प्रशासन को बाल श्रम की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी तंत्र, जागरूकता अभियान और शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बच्चों की शिक्षा के लिए काम करने वाले विक्रांत तंवर ने कहा कि बाल श्रम को रोकने में आम नागरिकों की भूमिका भी अहम है, जिन्हें ऐसे मामलों को चुपचाप नजरअंदाज करने की बजाय संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करनी चाहिए।
चंडीगढ़ में बाल श्रम के आंकड़े
वर्ष दर्ज मामले
2018 0
2019 0
2020 1
2021 7
2022 2
स्त्रोतः राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी)
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- हर साल 12 जून को मनाया जाता है विश्व बाल श्रम निषेध दिवस, चंडीगढ़ भी बाल श्रम से अछूता नहीं
- होटल, रेस्तरां, चाय स्टॉल, निर्माण स्थलों और बड़े घरों में घरेलू कामगार के रूप में देखे जाते हैं बाल श्रम
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। देश के सबसे विकसित और योजनाबद्ध शहरों में शामिल चंडीगढ़ में भी बाल श्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में शहर में बाल श्रम के 10 मामले दर्ज किए गए हैं। होटल, रेस्तरां, चाय स्टॉल, निर्माण स्थलों और बड़े घरों में घरेलू कामगार के रूप में काम करते हुए बच्चे अब भी देखे जा सकते हैं।
हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को शिक्षा व सुरक्षित बचपन दिलाना है। चंडीगढ़, जो देश का एक विकसित और योजनाबद्ध शहर है, वहां भी बाल श्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 और 2019 में बाल श्रम का कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ लेकिन 2020 में एक, 2021 में सात और 2022 में दो मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि बाल श्रम चंडीगढ़ में आज भी समाज की छिपी हुई परतों में जड़ें जमाए हुए है।
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युवा स्तंभ एनजीओ के प्रेसिडेंट उपेंद्र ने बताया कि झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और प्रवासी मजदूरों के बच्चे बाल श्रम के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे बच्चों को अक्सर होटलों, रेस्तरां, चाय स्टॉलों, निर्माण स्थलों और यहां तक कि बड़े घरों में घरेलू कामगार के रूप में काम करते हुए देखा जा सकता है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण ये बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और कम उम्र में ही काम करने को मजबूर हो जाते हैं।
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केंद्र सरकार के पेंसिल पोर्टल पर भी हुईं 9 शिकायतें
प्लेटफॉर्म फॉर इफेक्टिव एनफोर्समेंट फॉर नो चाइल्ड लेबर (पेंसिल) पोर्टल पर कुल 9 शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह पोर्टल श्रम और रोजगार मंत्रालय की तरफ से चलाया जाता है। इस पोर्टल का उद्देश्य देश में बाल श्रम की समस्या का समाधान करना और बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है। कोई भी व्यक्ति पोर्टल पर जाकर बाल श्रम की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायत संबंधित जिले के नोडल अधिकारी को खुद भेजी जा सकती है। शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देख सकता है। पोर्टल केंद्र, राज्य, जिला प्रशासन, प्रोजेक्ट सोसाइटीज और आम जनता को जोड़ता है, जिससे बाल श्रम मामलों पर कार्रवाई संभव होती है। बचाए गए बच्चों के पुनर्वास एवं शिक्षा के लिए भी पोर्टल का उपयोग किया जाता है।
14 साल से कम के बच्चों से कोई भी श्रम करवाना अपराध
देश में बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम करवाना अपराध है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे अलग है। बाल श्रम न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करता है बल्कि उनके मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर भी गहरा असर डालता है। समाजसेवी शिशु पाल ने बताया कि प्रशासन को बाल श्रम की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी तंत्र, जागरूकता अभियान और शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बच्चों की शिक्षा के लिए काम करने वाले विक्रांत तंवर ने कहा कि बाल श्रम को रोकने में आम नागरिकों की भूमिका भी अहम है, जिन्हें ऐसे मामलों को चुपचाप नजरअंदाज करने की बजाय संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करनी चाहिए।
चंडीगढ़ में बाल श्रम के आंकड़े
वर्ष दर्ज मामले
2018 0
2019 0
2020 1
2021 7
2022 2
स्त्रोतः राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी)