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पंजाब: मुख्य सचिव और मंत्रियों का विवाद ठंडे बस्ते में गया, कैप्टन पद से हटाने के इच्छुक नहीं

Fri, 22 May 2020 09:44 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 22 May 2020 09:44 AM IST
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chief secretary vs cabinet ministers in punjab, captain amrinder singh
कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला
पंजाब के मुख्य सचिव और कैबिनेट मंत्रियों के बीच बहस को लेकर छिड़ा विवाद अब ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बुधवार को अपने आवास पर नाराज नेताओं को लंच पर बुलाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्य सचिव अच्छा काम कर रहे हैं और उनके खिलाफ कोई शिकायत भी नहीं मिली है। वहीं, सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी करते रहे नाराज मंत्री और विधायकों ने भी मुख्यमंत्री से केवल इतना ही कहा कि वे इस मामले को जल्द सुलझाएं।
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सूत्रों का कहना है कि लंच कार्यक्रम में उपस्थित किसी भी नेता ने मुख्यमंत्री से यह मांग नहीं की कि वे मुख्य सचिव को हटा दें। बल्कि सभी नेताओं ने यह चिंता जताई कि अफसर उनकी बात नहीं सुनते, इसलिए उन पर एक्शन लेना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने अफसरों पर सख्ती का भरोसा भी दिलाया और नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी के परहेज करने की हिदायत भी दी। हालांकि मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव पर आरोपों को लेकर कोई गंभीरता न दिखाते हुए इस मामले को मनप्रीत बादल के लौटने तक टालने के संकेत भी दे दिए।
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दरअसल लंच कार्यक्रम में मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक राजा वड़िंग ही दो ऐसे व्यक्ति मौजूद थे, जो मुख्य सचिव को हटाने की सार्वजनिक तौर पर मांग उठाते रहे हैं। लेकिन जो मंत्री (मनप्रीत बादल और चरनजीत चन्नी) इस मामले के मुख्य पात्र हैं, की गैरमौजूदगी के कारण मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांग जोरदार तरीके से नहीं रख सके। मनप्रीत बादल इस समय अपने पिता के निधन की दुखद परिस्थितियों में उलझे हुए हैं और चरनजीत चन्नी का सारा ध्यान तृप्त बाजवा से हुए झगड़े की ओर मुड़ गया है। वहीं मुख्य सचिव पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं।
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अन्य मंत्री, जिन्होंने मनप्रीत और चन्नी के साथ मुख्यमंत्री को विवाद सुलझाने संबंधी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे, इस मामले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अगस्त में रिटायर हो रहे मुख्य सचिव करन अवतार सिंह को उनके पद पर बनाए रखेंगे और मनप्रीत बादल के सेवा में लौटने के बाद कुछ और विभाग मुख्य सचिव से वापस लेकर ऐसी स्थिति बनाई जाएगी कि विवाद के मुख्य पात्रों के बीच दोबारा किसी विषय को लेकर आमना-सामना न हो।


सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री इस मामले में मुख्य सचिव से एक माफीनामा लिखवाकर विवाद खत्म कर सकते हैं। इस तरह मुख्य सचिव भी अपने पद पर बने रहेंगे और मंत्रियों को अहम को लगी ठेस भी मिट जाएगी।
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