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दिल्ली सरकार 'स्मॉग' के गलत आंकड़े पेश करके लगा रही हरियाणा पर इल्जाम: मुख्य सचिव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
Updated Mon, 12 Nov 2018 11:30 AM IST
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दिल्ली में स्मॉग
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स्मॉग को लेकर दिल्ली सरकार गलत आंकड़े पेश करके हरियाणा पर वायु प्रदूषण से संबंधित इल्जाम लगा रही है। ये कहना है हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस ढेसी का। ऐसे दर्शाया जा रहा है कि हरियाणा के हर खेत में पराली को आग लगाई जा रही हो। मगर वास्तविकता तो यह है कि हरियाणा में 100 में से मात्र दो किसान ही पराली जला रहे हैं।
प्रदेश के सिर्फ दो जिलों सिरसा और फतेहाबाद में ही यह आंकड़ा ज्यादा हैं। मुख्य सचिव रविवार दोपहर बाद एचएयू के फैकल्टी हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उनके साथ आयुक्त राजीव रंजन व उपायुक्त अशोक कुमार मीणा भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव ढेसी ने आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि हरियाणा में 13 लाख हेक्टेयर में धान की फसल होती है।
औसतन एक हेक्टेयर में पांच टन तक पराली होती है। इस तरह प्रदेश में 65 लाख मीट्रिक टन तक पराली का औसतन उत्पादन होता है। इसमें से 62 लाख 82 हजार मीट्रिक टन धान अब तक मंडियों में आ चुका है। इससे स्पष्ट है कि हरियाणा में लगभग धान कटाई का काम पूरा हो चुका है। सिर्फ फतेहाबाद-सिरसा में कटाई लेट शुरू होती है, इसलिए वहां काम शेष है।
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प्रदेश के सिर्फ दो जिलों सिरसा और फतेहाबाद में ही यह आंकड़ा ज्यादा हैं। मुख्य सचिव रविवार दोपहर बाद एचएयू के फैकल्टी हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उनके साथ आयुक्त राजीव रंजन व उपायुक्त अशोक कुमार मीणा भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव ढेसी ने आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि हरियाणा में 13 लाख हेक्टेयर में धान की फसल होती है।
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औसतन एक हेक्टेयर में पांच टन तक पराली होती है। इस तरह प्रदेश में 65 लाख मीट्रिक टन तक पराली का औसतन उत्पादन होता है। इसमें से 62 लाख 82 हजार मीट्रिक टन धान अब तक मंडियों में आ चुका है। इससे स्पष्ट है कि हरियाणा में लगभग धान कटाई का काम पूरा हो चुका है। सिर्फ फतेहाबाद-सिरसा में कटाई लेट शुरू होती है, इसलिए वहां काम शेष है।
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2017 में 12 हजार 473 स्थानों पर जलाई गई थी पराली
मुख्य सचिव ढेसी
मुख्य सचिव ने बताया कि कुछ सालों से हरसेक के जरिये सेटेलाइट से पराली जलाने के आंकड़े लिए जा रहे हैं। साल 2017 में पूरे प्रदेश में 12 हजार 473 स्थानों पर पराली जलाई गई थी, जबकि इस साल अब तक 7 हजार 273 स्थानों पर आगजनी हुई है। इससे स्पष्ट है कि हरियाणा का किसान लगातार जागरूक हुआ है।
किसानों को पराली को जलाने के दुष्परिणामों की जानकारी मिल रही है, इसलिए उन्होंने पराली जलाने के बजाय उसके दूसरे विकल्प अपनाने शुरू कर दिए हैं। मुख्य सचिव ढेसी ने कहा कि पराली जलाने के सबसे अधिक मामले सिरसा और फतेहाबाद में आते हैं। साल 2017 में 12 हजार 473 में से 3 हजार 800 मामले फतेहाबाद में, जबकि 2 हजार 347 मामले सिरसा में सामने आए थे।
इस तरह 50 प्रतिशत से अधिक मामले इन दो ही जिलों में होते हैं, इसलिए यह सवाल उठता है कि फिर दिल्ली प्रदूषित कैसे हुई। अगर दिल्ली पर असर होता तो वह उसके साथ लगते एनसीआर के जिलों में पराली जलने से होता। सिरसा और फतेहाबाद से तो दिल्ली बहुत दूर है।
किसानों को पराली को जलाने के दुष्परिणामों की जानकारी मिल रही है, इसलिए उन्होंने पराली जलाने के बजाय उसके दूसरे विकल्प अपनाने शुरू कर दिए हैं। मुख्य सचिव ढेसी ने कहा कि पराली जलाने के सबसे अधिक मामले सिरसा और फतेहाबाद में आते हैं। साल 2017 में 12 हजार 473 में से 3 हजार 800 मामले फतेहाबाद में, जबकि 2 हजार 347 मामले सिरसा में सामने आए थे।
इस तरह 50 प्रतिशत से अधिक मामले इन दो ही जिलों में होते हैं, इसलिए यह सवाल उठता है कि फिर दिल्ली प्रदूषित कैसे हुई। अगर दिल्ली पर असर होता तो वह उसके साथ लगते एनसीआर के जिलों में पराली जलने से होता। सिरसा और फतेहाबाद से तो दिल्ली बहुत दूर है।