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हरियाणाः नशे के खिलाफ जंग में शुरू हुआ क्रेडिट वार, सीएम मनोहर लाल ने मारी बाजी

Tue, 21 Aug 2018 09:50 AM IST
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 21 Aug 2018 09:50 AM IST
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Chief Minister of seven states meeting in Chandigarh, against drug addiction
नशे के खिलाफ बैठक करते मुख्यमंत्री मनोहर लाल

हरियाणा सहित देश में अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा सधी हुई रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है। उत्तर भारत के राज्यों में नशे के बढ़ते प्रकोप का हर हाल में खात्मा करने का कार्ड भाजपा की ओर से खेल दिया गया है। इस समय पंजाब नशाखोरी से सबसे अधिक प्रभावित राज्य है। हरियाणा में भी नशा तस्करों का जाल तेजी से फैला है, हिमाचल प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। 

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चंडीगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली व राजस्थान में नशाखोरी की समस्या इतनी गंभीर नहीं, जितनी पंजाब के बाद हरियाणा और हिमाचल में बनती जा रही है। पंजाब के बाद अब हरियाणा भी नशे की आग में जलना शुरू हो चुका है। पंजाब के साथ लगते बार्डर एरिया में बड़े पैमाने पर ड्रग्स के अलावा सिंथेटिक ड्रग्स की चपेट में युवा आ चुके हैं। हरियाणा की युवा पीढ़ी भी पंजाब की तरह नशे में डूबकर न रह जाए, इसे देखते हुए सीएम मनोहर लाल नशे के खिलाफ जंग में मुख्य भूमिका में आए हैं। 
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उन्होंने नशे के खिलाफ उत्तर भारत के राज्यों को न केवल एक मंच पर लाने का काम किया, बल्कि नशे के खिलाफ जंग को लेकर शुरू हुई क्रेडिट वार में भी बाजी मार गए। नशे के खात्मे के लिए रणनीति बनाने को बुलाई गई पहली क्षेत्रीय कांफ्रेंस की मेजबानी भी हरियाणा ने की। प्रदेश में इस समय भाजपा की सरकार है। हिमाचल, राजस्थान, उत्तराखंड भी भाजपा शासित राज्य हैं।
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दिल्ली व पंजाब में ही आम आदमी पार्टी व कांग्रेस की सरकार है। पंजाब के राज्यपाल के नाते चंडीगढ़ के प्रशासक भूमिका राज्यपाल बीपी सिंह बदनौर निभा रहे हैं। उनकी पृष्ठभूमि भी भाजपा की रही है। ऐसे में नशे के खिलाफ जंग के ऐलान को सीधे तौर पर भाजपा का ही मास्टर प्लान माना जा सकता है।

पंजाब में नशे के मुद्दे पर ही चार सीटें जीती आप

Chief Minister of seven states meeting in Chandigarh, against drug addiction
बैठक में मौजूद राज्यों के मुख्यमंत्री
पंजाब की राजनीति में नशे का मुद्दा चुनाव में अहम भूमिका निभाता है। बीते लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी पहली बार चुनावी दंगल में उतरने के बावजूद चार लोकसभा सीटें जीत गई। उसे नशे के मुद्दे को चुनावी रण में खूब भुनाया। बीते विधानसभा चुनाव में भी नशे का मुद्दा मुख्य रहा। कांग्रेस इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई का आश्वासन देकर सत्ता पाने में कामयाब रही। कैप्टन अमरिंदर सिंह सीएम की कुर्सी संभालने के बाद ही नशे के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई में जुटे हुए हैं। मगर, उन्हें व्यापक समर्थन नहीं मिल रहा था। अब हरियाणा सहित अन्य राज्यों ने साथ आने से उनकी नशे के खिलाफ मुहिम को और बल मिलेगा।

पंचकूला में संयुक्त सचिवालय खुलवाने में मनोहर रहे कामयाब
नशे के खिलाफ जंग का वॉर रूम पंचकूला में संयुक्त सचिवालय के तौर पर बनेगा। यह हरियाणा के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है। पंजाब-हरियाणा की राजधानी होने के बावजूद चंडीगढ़ इसे खुलवाने में नाकाम रहा। वॉर रूम के हरियाणा में होने से प्रदेश में नशे के खिलाफ लड़ाई और तेजी से लड़ी जा सकेगी।
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