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हरियाणा: लाखों महिला कर्मचारियों को मुख्यमंत्री का तोहफा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 11 Dec 2015 12:13 PM IST
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक बड़ा फैसला लेते हुए महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव की शर्तें हटाने के निर्देश दिए हैं। वीरवार को सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला कर्मचारियों की बढ़ती सेवा अवधि के मुताबिक आकस्मिक अवकाश बढ़ाने की मांग पर भी जल्द फैसला देने का आश्वासन दिया। कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा दिए जाने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मसले पर पड़ोसी राज्यों की नीतियों का अध्ययन करेगी।
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कहा कि अगर जरूरत हुई तो बीमा योजना से जोड़कर कर्मचारियों को कैशलैस इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी। सरकारी नौकरियों में बैकलॉग को पूरा करने की मांग पर मनोहर लाल ने अधिकारियों को जल्द से जल्द इस दिशा में जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। आरक्षण के आधार पर पदोन्नति हासिल करने वाले अधिकारियों को रिवर्ट न करने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में सरकार तथ्यों के आधार पर न्यायालय में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी।
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मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स नीति के तहत काम कर रहे मुलाजिमों का ईपीएफ व ईएसआई काटे जाने के बारे में की मांग पर कहा कि प्रत्येक मुलाजिम का ईपीएफ-ईएसआई का पैसा कटे और उनकी तनख्वाह सीधे उनके बैंक खाते में जाए। मनोहर लाल ने अधिकारियों को श्रम कानूनों का अनुपालन कड़ाई से सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
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कर्मियों के वेतन और मानदेय बढ़ाने पर होगा विचार
सीएम ने कहा कि सरकार लगभग 30 हजार पदों की भर्ती प्रक्रिया आरम्भ कर चुकी है। जल्द 20 हजार पदों पर भर्तियां शुरू कर दी जाएंगी। उनकी सरकार किसी भी कर्मचारी को नौकरी से निकालने की पक्षधर नहीं है। गेस्ट टीचरों के मामले में भी सरकार ने पूरी सहानुभूति के साथ न्यायालय में अपना पक्ष रखा है। स्कूल चौकीदारों का मानदेय बढ़ाए जाने संबंधी मांग पर जल्द ही विचार करने का आश्वासन दिया। इसके अलावा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की मेस कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने संबंधी मांग पर भी उन्होंने अधिकारियों से इस मामले की जानकारी जुटाने को कहा।
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माधवन आयोग की रिपोर्ट को दिया जा रहा है अंतिम रूप
सातवें आयोग की सिफारिशें को लागू करने तथा छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सातवें आयोग की सिफारिशों को स्वीकार किए जाने के बाद प्रदेश सरकार भी उसे जल्द से जल्द लागू करेगी। माधवन आयोग का गठन किया था, जो वेतन विसंगतियों को लेकर कार्य को अंतिम रूप दे रहा है।
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हरियाणा के कर्मचारी ले रहे हैं पंजाब से ज्यादा लाभ
सीएम ने कहा कि पंजाब के समान वेतनमान लागू करने की दिशा में अध्ययन किया जा रहा है, लेकिन अभी तक इस कार्य में कुछ बाधाएं भी सामने आई हैं। अध्ययन में यह पाया गया है कि अनेक मामलों में हरियाणा के कर्मचारी पंजाब के कर्मचारियों से ज्यादा लाभ ले रहे हैं।
मसलन पंजाब की कई नौकरियों में शैक्षणिक योग्यताएं हरियाणा से अलग हैं। पंजाब के कर्मचारी को 25 साल की सेवा के बाद पूरी पेंशन मिलती है। हरियाणा में यह 20 साल की सेवा अवधि के बाद ही कर्मचारी को मिल जाती है।