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अमला लेकर मकानों की हालत देखने पहुंचे चीफ इंजीनियर, मौके पर बोले- जगह हमारी नहीं
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चंडीगढ़। प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा शनिवार को अपने सभी एसई और एक्सईएन को लेकर सेक्टर-20 स्थित मकानों की हालत देखने पहुंचे। मौका मुआयना कर कहा कि यह जगह नगर निगम की है। इस पर क्षेत्रीय पार्षद तरुणा मेहता नाराज हो गईं।
उन्होंने कहा कि पार्षदों के साथ हुई बैठक में निगम और प्रशासन दोनों के अधिकारी थे। उसी समय तय हो जाता कि जगह निगम की है तो अब तक काम भी करा दिया गया होता। पूरी टीम को लाने के बाद प्रशासन को पता चल रहा है कि जमीन निगम की है। पार्षद को नाराज होते देख चीफ इंजीनियर ने सभी एसई व एकसईएन से कहा कि जांच कर सोमवार को यहां की पूरी रिपोर्ट दें।
प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल के साथ कुछ दिन पहले पार्षदों की बैठक हुई थी। इस दौरान तरुणा मेहता ने मस्जिद के पास सेक्टर-20 ए की कॉलोनी में बने मकानों की स्थिति से अवगत कराया था। पार्षद ने बताया था कि सरकारी आवास में रहने वाले भी हमारे ही लोग हैं। इन मकानों में एमओएच के 116, पुलिस विभाग के 108 और अन्य विभागों के 108 कर्मचारी रहते हैं। कई सरकारी मकानों के अंदर कचरे व मलबे के ढेर लगे हैं। दरवाजे व खिड़कियां टूटी पड़ी हैं। छत से पानी टपक रहा है। फर्श पर ही कबाड़ व टूटे पेड़ों की टहनियां पड़ी हैं। दीवारों का प्लास्टर व पेंट उतरा हुआ है। खुले एरिया में घास से जंगल बन चुका है और चूहों ने सारा एरिया खोद दिया है। सीवर लाइन चोक है और मकान कभी भी गिर सकते हैं।
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हालात यह है कि वहां रहने वाले लोग भी अपने विभागों को लिखकर दे चुके हैं उन्हें इन मकानों में नहीं रहना है। इसके बावजूद इसे कोई ठीक नहीं करा रहा। नगर निगम का कहना है कि यह भूमि प्रशासन की है इसलिए वह यहां कोई काम नहीं करा सकते हैं। इस पर धर्मपाल ने चीफ इंजीनियर को मौका मुआयना कर आवश्यक कार्य कराने को कहा था लेकिन मौके पर जाकर चीफ इंजीनियर ने कहा कि यह भूमि निगम की है। इस संबंध में वह नगर निगम को पत्र लिखकर सूचना भी देंगे।
बॉक्स
मकान आवंटन के दस्तावेज सिर्फ 35 के पास
मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि कुछ दिन यहां विकास कार्य कराने के लिए प्रशासन से कहा गया तो उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मकान आवंटित हुए हैं उनके घर के आगे टाइल्स लगा देते हैं। सभी लोगों से दस्तावेज मांगे तो केवल 35 लोग ही अपने दस्तावेज दिखा सके। अन्य लोगों के पास दस्तावेज ही नहीं थे। लोगों ने बताया कि ज्यादातर लोग यहां बिना अलॉटमेंट के रह रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि पार्षदों के साथ हुई बैठक में निगम और प्रशासन दोनों के अधिकारी थे। उसी समय तय हो जाता कि जगह निगम की है तो अब तक काम भी करा दिया गया होता। पूरी टीम को लाने के बाद प्रशासन को पता चल रहा है कि जमीन निगम की है। पार्षद को नाराज होते देख चीफ इंजीनियर ने सभी एसई व एकसईएन से कहा कि जांच कर सोमवार को यहां की पूरी रिपोर्ट दें।
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प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल के साथ कुछ दिन पहले पार्षदों की बैठक हुई थी। इस दौरान तरुणा मेहता ने मस्जिद के पास सेक्टर-20 ए की कॉलोनी में बने मकानों की स्थिति से अवगत कराया था। पार्षद ने बताया था कि सरकारी आवास में रहने वाले भी हमारे ही लोग हैं। इन मकानों में एमओएच के 116, पुलिस विभाग के 108 और अन्य विभागों के 108 कर्मचारी रहते हैं। कई सरकारी मकानों के अंदर कचरे व मलबे के ढेर लगे हैं। दरवाजे व खिड़कियां टूटी पड़ी हैं। छत से पानी टपक रहा है। फर्श पर ही कबाड़ व टूटे पेड़ों की टहनियां पड़ी हैं। दीवारों का प्लास्टर व पेंट उतरा हुआ है। खुले एरिया में घास से जंगल बन चुका है और चूहों ने सारा एरिया खोद दिया है। सीवर लाइन चोक है और मकान कभी भी गिर सकते हैं।
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हालात यह है कि वहां रहने वाले लोग भी अपने विभागों को लिखकर दे चुके हैं उन्हें इन मकानों में नहीं रहना है। इसके बावजूद इसे कोई ठीक नहीं करा रहा। नगर निगम का कहना है कि यह भूमि प्रशासन की है इसलिए वह यहां कोई काम नहीं करा सकते हैं। इस पर धर्मपाल ने चीफ इंजीनियर को मौका मुआयना कर आवश्यक कार्य कराने को कहा था लेकिन मौके पर जाकर चीफ इंजीनियर ने कहा कि यह भूमि निगम की है। इस संबंध में वह नगर निगम को पत्र लिखकर सूचना भी देंगे।
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मकान आवंटन के दस्तावेज सिर्फ 35 के पास
मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि कुछ दिन यहां विकास कार्य कराने के लिए प्रशासन से कहा गया तो उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मकान आवंटित हुए हैं उनके घर के आगे टाइल्स लगा देते हैं। सभी लोगों से दस्तावेज मांगे तो केवल 35 लोग ही अपने दस्तावेज दिखा सके। अन्य लोगों के पास दस्तावेज ही नहीं थे। लोगों ने बताया कि ज्यादातर लोग यहां बिना अलॉटमेंट के रह रहे हैं।