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सीएचबी और प्रशासन के वास्तुकार विभाग में ठनी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Mar 2016 11:55 PM IST
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हाउसिंग बोर्ड के सभी कैटेगरी के मकानों की बालकनी और बरामदों में ग्रिल लगाने की मंजूरी देने के मामले में सीएचबी और प्रशासन के वास्तुकार विभाग में ठन गई है। बोर्ड की मंगलवार को हुई बैठक में सदस्यों ने बहुमत से एक बार फिर से ग्रिल लगाने की मंजूरी देने का फैसला ले लिया है। बैठक में मुख्य वास्तुकार कपिल सेतिया ने इस पर आपत्ति भी जताई। उन्होंने कहा कि इस फैसले से वह सहमत नहीं हैं।
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हाउसिंग बोर्ड इससे पहले अपने स्तर पर पिछले साल 19 अगस्त को ग्रिल लगाने की मंजूरी दे चुका है। मगर जब प्रशासन ने हाल ही में बोर्ड के मकानों में 13 जरूरत के अनुसार बदलाव करने की मंजूरी दी थी, उसी दौरान ग्रिल लगाने की मंजूरी को खारिज कर दिया गया था। बावजूद इसके मंगलवार को बोर्ड की बैठक में एक बार फिर से इस पर फैसला ले लिया गया है। हाउसिंग बोर्ड ने इस फैसले को अपनी वेबसाइट पर भी डाला हुआ है।
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तो सलाहकार के सामने रखी जाएगी लोगों की मांग
बोर्ड के सदस्यों के अनुसार अगर वास्तुकार विभाग इसके बावजूद कोई अड़चन डालता है तो लोगों की मांग को सलाहकार विजय देव के समक्ष रखा जाएगा।
वास्तुकार पलट चुके हैं बोर्ड के फैसले को
मालूम हो कि इससे पहले भी प्रशासन के मुख्य वास्तुकार बोर्ड के एक फैसले को पलट चुके हैं। वास्तुकार विभाग ने बोर्ड द्वारा फ्लोर वाइज मकान बेचने की मंजूरी देने के फैसले को खारिज कर दिया था।
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पुनर्वास योजना के तहत बने मकानों को भी दी ग्रिल की मंजूरी
बोर्ड ने पुनर्वास योजना के तहत जो मकान आवंटित किए थे, उन्हें भी ग्रिल लगाने की मंजूरी देने का फैसला लिया गया है। अभी तक अगर कोई अपनी बालकनी और बरामदों में ग्रिल लगाता था तो उसे वायलेशन में शामिल किया जाता था। सीएचबी ने ग्रिल के लिए एक स्टैंडर्ड डिजाइन भी तैयार कर दिया है।
बोर्ड के अनुसार हाउसिंग बोर्ड के मकानों के निवासी इस डिजाइन की ग्रिल अपने फ्लैट्स में लगा सकेंगे। डिजाइन को बोर्ड की साइट पर देखा जा सकता है और बोर्ड से भी लिया जा सकता है। ग्रिल के इस स्टैंडर्ड डिजाइन को बालकनी और बरामदे के साइज के हिसाब से मोडिफाई किया जा सकता है।
बोर्ड के सदस्य प्रेम कौशिक का कहना है कि बोर्ड की बैठक में मुख्य वास्तुकार को कह दिया गया है कि बहुमत से फैसला लिया गया है।
अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं
इस समय शहर में 64 हजार हाउसिंग बोर्ड के मकान हैं। बैठक में यह बात सामने आई कि जरूरत के अनुसार बदलाव करने के लिए बोर्ड से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।
मुख्य वास्तुकार कपिल सेतिया ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ग्रिल लगाने की पॉलिसी शहर के डिजाइन के विपरीत है और इसका गलत असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बालकनी मकान के एफएआर एरिया के बाहर बनेगी और लोगों की आदत को देखा जाए तो वह उसे पूरी तरह से कवर कर लेते हैं, जिसका असर कमरों की प्राकृतिक रोशनी पर पड़ेगा और हवा भी रुकेगी। अपनी आपत्ति वास्तुकार ने लिखित में भी दी है। मालूम हो कि शहर में किसी भी तरह के बदलाव के लिए वास्तुकार विभाग की मंजूरी चाहिए।