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CLU कांड की सभी अर्जियों पर हाईकोर्ट की एकल बेंच ही करेगी सुनवाई
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Wed, 06 Apr 2016 03:07 PM IST
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कोर्ट
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हरियाणा में हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान जमीन के सीएलयू के लिए घूसखोरी की शिकायत पर पांच पूर्व विधायकों के खिलाफ लगे आरोपों से संबंधित सभी अर्जियों और शिकायतों की सुनवाई अब एकल बेंच में ही होगी।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को सरकार और पूर्व विधायकों की अर्जियों का निपटारा करते हुए सभी मामले एकल बेंच में भेज दिए। हालांकि आरोपी पूर्व विधायकों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है, क्योंकि डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है।
विधायकों ने हाईकोर्ट में खुद पर लगे आरोपों को चुनौती दी थी। तब हाईकोर्ट की एकल बेंच ने लोकायुक्त के फैसले पर रोक लगाते हुए सुनवाई स्थगित कर दी थी। उस वक्त इन विधायकों को बड़ी राहत मिली थी।
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मामले के अनुसार इनेलो ने एक सीडी पेशकर सीएलयू के लिए घूस मांगने का आरोप लगाया था। इस शिकायत पर लोकायुक्त ने सीडी की जांच की थी और पांच पूर्व विधायकों व सीपीएस को घूसखोरी का दोषी पाया था।
सरकार से एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी। लोकायुक्त ने विनोद भ्याणा, राव नरेंद्र सिंह, नरेश सेलवाल, जरनैल सिंह व राम निवास घोड़िल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी।
इसी बीच सरकार ने एकल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में अपील के माध्यम से चुनौती दी। कहा था कि पूर्व विधायकों केखिलाफ आरोप सही हैं, लिहाजा लोकायुक्त के फैसले को रद्द करने का आदेश खारिज किया जाए।
डिवीजन बेंच ने एकल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही लोकायुक्त की ओर से सरकार को एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश पर अमल करने का रास्ता साफ हो गया था।
एकल बेंच के फैसले पर रोक लगने के बाद सरकार ने इन विधायकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली थी। इसी बीच पांचों विधायकों ने भी एकल बेंच के फैसले पर लगी रोक हटाने के लिए डिवीजन बेंच में अर्जियां दाखिल की थीं।
पूर्व विधायकों की राह कठिन :
एकल बेंच में अभी पांचों विधायकों की याचिकाओं पर मामला विचाराधीन है। डिवीजन बेंच की ओर से एकल बेंच के फैसले पर रोक लगने के कारण एकल बेंच में दोबारा सुनवाई शुरू नहीं हुई थी। अब यह मामला फिर से एकल बेंच में चला गया है।
हालांकि एकल बेंच ने लोकायुक्त के फैसले पर रोक लगा दी थी, लेकिन डिवीजन बेंच की ओर से एकल बेंच के इस अंतरिम फैसले पर रोक लगने के बाद सरकार ने पूर्व विधायकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। माना जा रहा है कि यह एफआईआर रद्द कराने के लिए पूर्व विधायकों को अलग से याचिकाएं या अर्जियां दाखिल करनी पड़ेंगी। इस लिहाज से अभी इन पूर्व विधायकों की राह आसान नहीं दिख रही है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को सरकार और पूर्व विधायकों की अर्जियों का निपटारा करते हुए सभी मामले एकल बेंच में भेज दिए। हालांकि आरोपी पूर्व विधायकों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है, क्योंकि डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है।
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विधायकों ने हाईकोर्ट में खुद पर लगे आरोपों को चुनौती दी थी। तब हाईकोर्ट की एकल बेंच ने लोकायुक्त के फैसले पर रोक लगाते हुए सुनवाई स्थगित कर दी थी। उस वक्त इन विधायकों को बड़ी राहत मिली थी।
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मामले के अनुसार इनेलो ने एक सीडी पेशकर सीएलयू के लिए घूस मांगने का आरोप लगाया था। इस शिकायत पर लोकायुक्त ने सीडी की जांच की थी और पांच पूर्व विधायकों व सीपीएस को घूसखोरी का दोषी पाया था।
सरकार से एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी। लोकायुक्त ने विनोद भ्याणा, राव नरेंद्र सिंह, नरेश सेलवाल, जरनैल सिंह व राम निवास घोड़िल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी।
इसी बीच सरकार ने एकल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में अपील के माध्यम से चुनौती दी। कहा था कि पूर्व विधायकों केखिलाफ आरोप सही हैं, लिहाजा लोकायुक्त के फैसले को रद्द करने का आदेश खारिज किया जाए।
डिवीजन बेंच ने एकल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही लोकायुक्त की ओर से सरकार को एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश पर अमल करने का रास्ता साफ हो गया था।
एकल बेंच के फैसले पर रोक लगने के बाद सरकार ने इन विधायकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली थी। इसी बीच पांचों विधायकों ने भी एकल बेंच के फैसले पर लगी रोक हटाने के लिए डिवीजन बेंच में अर्जियां दाखिल की थीं।
पूर्व विधायकों की राह कठिन :
एकल बेंच में अभी पांचों विधायकों की याचिकाओं पर मामला विचाराधीन है। डिवीजन बेंच की ओर से एकल बेंच के फैसले पर रोक लगने के कारण एकल बेंच में दोबारा सुनवाई शुरू नहीं हुई थी। अब यह मामला फिर से एकल बेंच में चला गया है।
हालांकि एकल बेंच ने लोकायुक्त के फैसले पर रोक लगा दी थी, लेकिन डिवीजन बेंच की ओर से एकल बेंच के इस अंतरिम फैसले पर रोक लगने के बाद सरकार ने पूर्व विधायकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। माना जा रहा है कि यह एफआईआर रद्द कराने के लिए पूर्व विधायकों को अलग से याचिकाएं या अर्जियां दाखिल करनी पड़ेंगी। इस लिहाज से अभी इन पूर्व विधायकों की राह आसान नहीं दिख रही है।