विशेष: ब्रिटिश आर्मी छोड़ बोस के सैनिक बनकर लड़े, अंग्रेजों ने द्वितीय विश्व युद्ध का शहीद बताया
- बगावत छिपाने के लिए अंग्रेजों ने किया था आजाद हिंद फौज के शहीदों के साथ बड़ा धोखा
- केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय में आजाद हिंद फौज के दस्तावेजों से हो रहा खुलासा
- हरियाणा के 600 से अधिक आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का रिकॉर्ड फाइलों में ही दफन
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सुभाष चंद बोस ने देशवासियों से अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट होने के आह्वान किया था। इसके बाद ब्रिटिश आर्मी में बगावत शुरू हो गई थी। अंग्रेज इस बगावत को सार्वजनिक नहीं होने देना चाहते थे। बगावत अंदर ही अंदर इस कदर चलती रही कि भारतीय मूल के बहुत से सिपाहियों ने ब्रिटिश सेना छोड़ आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए।
बोस के ये लड़ाके विभिन्न मोर्चों पर अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद भी हुए। मगर बड़ी हैरानी की बात यह है कि अंग्रेजी हुकूमत ने इस बगावत को छिपाने के इरादे से इन सैनिकों को द्वितीय विश्व युद्ध का शहीद बता दिया। इतना नहीं अगस्त 1947 में देश आजाद होने के बाद अंग्रेजी हुकूमत द्वारा भारतीय हुक्मरानों को ब्रिटिश आर्मी में भारतीय मूल के शहीद जवानों का जो रिकार्ड सौंपा गया, उसमें भी आजाद हिंद फौज के कई सिपाहियों को द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों की ओर से लड़ते हुए शहीद बताया गया। इस तरह बोस के ये जांबाज लड़ाके जिन्होंने अंग्रेजों से बगावत कर देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, वे गुमनाम हो गए।
लेकिन केंद्र सरकार द्वारा सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिंद फौज से जुड़े तमाम रिकार्ड को सार्वजनिक करने के बाद आजाद हिंद फौज के सिपाहियों से संबंधित दस्तावेजों से अब उक्त खुलासे हो रहे हैं। ये रिकॉर्ड केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय में राष्ट्रीय अभिलेखागार की इंडियन नेशनल आर्मी नोमिनल रोल संबंधी विंग में मौजूद हैं। हरियाणा के चरखी दादरी के ढाणी फौगाट गांव निवासी इतिहासविद श्रीभगवान फौगाट पिछले कई सालों से इसका अध्ययन कर रहे हैं।
125 केस ढूंढ चुके हैं फौगाट
फौगाट ने बताया कि वे इस तरह के करीब 125 केस तो ढूंढ चुके हैं। जिनमें बोस के शहीद सिपाहियों को अंग्रेजों ने अपने रिकॉर्ड में द्वितीय विश्व युद्ध का शहीद बताया था। उनके परिजन भी आज तक इसी बात को सही मान रहे हैं। फौगाट के अनुसार मगर जब उन्होंने आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का रिकॉर्ड खंगाला तो ऐसे शहीदों का नाम, बेल्ट नंबर, पता बोस की फौज के रिकॉर्ड में भी मिला।
इस रिकॉर्ड को ढूंढकर वे प्रदेश सरकार की हरियाणा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति को 400 से अधिक सिपाहियों का रिकॉर्ड भेज चुके हैं ताकि समिति इस रिकॉर्ड से उनके परिजनों को अवगत करवाए। वे कई बार प्रदेश सरकार से भी मांग कर चुके हैं कि वे प्रदेश के द्वितीय युद्ध में शहीद जवानों के नाम भी उन्हें उपलब्ध करवाए। फौगाट ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक हरियाणा में 2500 से अधिक सैनिक बोस की फौज में थे। जिसमें से 600 से अधिक ऐसे भी थे, जो पहले ब्रिटिश फौज का हिस्सा थे।
इसलिए मनाया जाता है आजाद हिंद सरकार स्थापना दिवस
सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्तूबर 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार या आर्जी हुकूमत-ए-आजाद हिंद के नाम से एक भारतीय अस्थाई सरकार स्थापित की। जापान ने 23 अक्तूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार को मान्यता भी दे दी। बोस अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुंचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ दिया। इसके बाद बहुत से भारतीय मूल के युवाओं ने ब्रिटिश आर्मी में छोड़ दी और वे बोस के साथ हो लिए।