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Chandigarh: बसों में बाहर के पेट्रोल पंपों से नहीं भरेगा डीजल, अपने बंद पड़े पंप फिर करेगा शुरू सीटीयू
Tue, 04 Apr 2023 11:23 AM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 04 Apr 2023 11:23 AM IST
सार
17 मार्च 2022 को सीटीयू की गवर्निंग बॉडी की बैठक में फैसला हुआ था कि सीटीयू बल्क में डीजल न खरीद कर रिटेल में शहर के पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदेगा। इसके लिए सेक्टर-34, 43 और 44 के पेट्रोल पंप का चयन किया गया, जहां रोजाना सीटीयू के 450 से ज्यादा बसें करीब 36 हजार लीटर डीजल डलवाती हैं।
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सीटीयू बस
- फोटो : file photo
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विस्तार
चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) की लोकल और लॉन्ग रूट की 450 से ज्यादा बसों में रोजाना तीन निजी पेट्रोल पंपों से डीजल भरवाया जा रहा है। भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद इस मामले में विजिलेंस की जांच भी चल रही है। इस बीच अब सीटीयू ने फैसला लिया है कि वह अब बाहर के पेट्रोल पंपों से डीजल नहीं भराएंगे। डिपो के अंदर बंद पड़े पंपों को फिर से शुरू किया जाएगा और उन्हीं से बसों में डीजल की आपूर्ति होगी।
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सीटीयू के पास चार डिपो हैं। इन डिपो के अंदर पहले से ही पंप बने हुए हैं, लेकिन एक साल से बाहर से डीजल भरवाने की वजह से पंपों में कई छोटी-बड़ी खराबियां आ गई हैं। उन्हें अपडेट भी किया जाना है। सीटीयू ने इस पर काम शुरू कर दिया है। डिपो के पंपों तक तेल पहुंचाने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) और भारत पेट्रोलियम (बीपी) के साथ समझौता हुआ है।
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इसके तहत सीटीयू के डिपो नंबर-एक और तीन में आईओसीएल व डिपो नंबर-दो और चार में बीपी की तरफ से तेल पहुंचाया जाएगा। फिर से डिपो के पंप शुरू करने के पीछे विभाग का तर्क है कि मार्केट में बल्क पेट्रोल के दाम अब रिटेल के दाम के बराबर आ गए हैं, इसलिए सीटीयू ने बल्क में तेल लेने का फैसला किया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक-दो दिनों में डिपो से तेल डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
निजी पंपों पर लगे सीटीयू के कर्मियों की भी विभाग में होगी वापसी
17 मार्च 2022 को सीटीयू की गवर्निंग बॉडी की बैठक में फैसला हुआ था कि सीटीयू बल्क में डीजल न खरीद कर रिटेल में शहर के पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदेगा। इसके लिए सेक्टर-34, 43 और 44 के पेट्रोल पंप का चयन किया गया, जहां रोजाना सीटीयू के 450 से ज्यादा बसें करीब 36 हजार लीटर डीजल डलवाती हैं। इसकी कीमत रोजाना करीब 30 लाख रुपये है। इसके बाद निजी पंपों पर सीटीयू ने अपने चालक, क्लर्क स्टाफ, रिकॉर्ड और डाटा मेंटेन करने के लिए भी कई कर्मचारियों की तैनाती की है। अब जब बसों में डीजल डिपो के अंदर ही डाला जाएगा तो इन सभी कर्मचारियों की विभाग में वापसी हो जाएगी।
डीजल भराने के लिए कैसे तीन पंपों का हुआ चयन, चल रही है विजिलेंस जांच
सीटीयू ने एक साल डीजल बाहर से भरवाया है। इसको लेकर विजिलेंस जांच भी चल रही है। रोजाना करीब 36 हजार डीजल सीटीयू की बसों में डलता है। आयल कंपनी से पेट्रोल पंप को प्रति लीटर कुछ रुपये डीलर्स कमीशन के रूप में मिलता है। विजिलेंस का आरोप है कि अगर सीटीयू रोजाना 36 हजार लीटर डीजल सिटको या नगर निगम के पेट्रोल पंप से भराता, तो डीजल के पैसे के साथ डीलर्स कमीशन भी प्रशासन के दोनों विभाग के पास आता।
आरोप है कि इस तरह से डीजल बाहर से भरवाकर सीटीयू ने प्रशासन का काफी नुकसान कराया है। इस पूरी प्रक्रिया में विजिलेंस को भ्रष्टाचार की भी शिकायत मिली है। हालांकि विजिलेंस के सवालों का सीटीयू ने भी 15 पेज का जवाब दिया है। कहा कि बल्क से रिटेल में डीजल खरीदने के फैसले के बाद सीटीयू ने करीब 16 करोड़ रुपये बचाए हैं। प्रति लीटर पर पंप ने सीटीयू को 70 पैसे का डिस्काउंट दिया है, जो किसी भी रोडवेज को मिलने वाले डिस्काउंट में सबसे ज्यादा है। इससे सीटीयू ने करीब 54 लाख रुपये बचाए हैं।
सीटीयू की बसों में रोजाना भरता है करीब 36 हजार लीटर डीजल
डिपो नंबर-1 - 15 हजार लीटर (रोजाना)
डिपो नंबर-2 - 6.5 हजार लीटर (रोजाना)
डिपो नंबर-3 - 6.5 हजार लीटर (रोजाना)
डिपो नंबर-4 - 8 हजार लीटर (रोजाना)
बल्क में डीजल काम दाम अब रिटेल के बराबर आ गया है, इसलिए विभाग ने आईओसीएल और बीपी से बल्क में डीजल लेने का फैसला किया है। इसके लिए समझौता हो गया है। एक-दो दिनों में डिपो के पंपों से ही बसों में डीजल डालने का काम शुरू कर दिया जाएगा। - प्रद्युमन सिंह, निदेशक, परिवहन विभाग
17 मार्च 2022 को सीटीयू की गवर्निंग बॉडी की बैठक में फैसला हुआ था कि सीटीयू बल्क में डीजल न खरीद कर रिटेल में शहर के पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदेगा। इसके लिए सेक्टर-34, 43 और 44 के पेट्रोल पंप का चयन किया गया, जहां रोजाना सीटीयू के 450 से ज्यादा बसें करीब 36 हजार लीटर डीजल डलवाती हैं। इसकी कीमत रोजाना करीब 30 लाख रुपये है। इसके बाद निजी पंपों पर सीटीयू ने अपने चालक, क्लर्क स्टाफ, रिकॉर्ड और डाटा मेंटेन करने के लिए भी कई कर्मचारियों की तैनाती की है। अब जब बसों में डीजल डिपो के अंदर ही डाला जाएगा तो इन सभी कर्मचारियों की विभाग में वापसी हो जाएगी।
डीजल भराने के लिए कैसे तीन पंपों का हुआ चयन, चल रही है विजिलेंस जांच
सीटीयू ने एक साल डीजल बाहर से भरवाया है। इसको लेकर विजिलेंस जांच भी चल रही है। रोजाना करीब 36 हजार डीजल सीटीयू की बसों में डलता है। आयल कंपनी से पेट्रोल पंप को प्रति लीटर कुछ रुपये डीलर्स कमीशन के रूप में मिलता है। विजिलेंस का आरोप है कि अगर सीटीयू रोजाना 36 हजार लीटर डीजल सिटको या नगर निगम के पेट्रोल पंप से भराता, तो डीजल के पैसे के साथ डीलर्स कमीशन भी प्रशासन के दोनों विभाग के पास आता।
आरोप है कि इस तरह से डीजल बाहर से भरवाकर सीटीयू ने प्रशासन का काफी नुकसान कराया है। इस पूरी प्रक्रिया में विजिलेंस को भ्रष्टाचार की भी शिकायत मिली है। हालांकि विजिलेंस के सवालों का सीटीयू ने भी 15 पेज का जवाब दिया है। कहा कि बल्क से रिटेल में डीजल खरीदने के फैसले के बाद सीटीयू ने करीब 16 करोड़ रुपये बचाए हैं। प्रति लीटर पर पंप ने सीटीयू को 70 पैसे का डिस्काउंट दिया है, जो किसी भी रोडवेज को मिलने वाले डिस्काउंट में सबसे ज्यादा है। इससे सीटीयू ने करीब 54 लाख रुपये बचाए हैं।
सीटीयू की बसों में रोजाना भरता है करीब 36 हजार लीटर डीजल
डिपो नंबर-1 - 15 हजार लीटर (रोजाना)
डिपो नंबर-2 - 6.5 हजार लीटर (रोजाना)
डिपो नंबर-3 - 6.5 हजार लीटर (रोजाना)
डिपो नंबर-4 - 8 हजार लीटर (रोजाना)
बल्क में डीजल काम दाम अब रिटेल के बराबर आ गया है, इसलिए विभाग ने आईओसीएल और बीपी से बल्क में डीजल लेने का फैसला किया है। इसके लिए समझौता हो गया है। एक-दो दिनों में डिपो के पंपों से ही बसों में डीजल डालने का काम शुरू कर दिया जाएगा। - प्रद्युमन सिंह, निदेशक, परिवहन विभाग