चंडीगढ़: डीडीए निदेशक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, सरकारी कार व दफ्तर के फर्नीचर को अटैच करने का आदेश
भूपिंद्र ने अपनी शिकायत में बताया था कि उन्होंने डीडीए हाउसिंग स्कीम 2014 के तहत एक फ्लैट के आवंटन के लिए आवेदन किया था। आवेदन के बाद उन्हें नरेला में एक एमआइजी फ्लैट आवंटित किया गया था। इसके लिए उन्होंने एक जुलाई 2015 को 59 लाख 94 हजार 941 रुपये डीडीए को जमा किए लेकिन फ्लैट मिलने के बाद देखा गया कि फ्लैट रहने योग्य की स्थिति में नहीं था। उन्होंने इस बाबत कई बार डीडीए को लिखा लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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आदेश नहीं मानने पर चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के निदेशक हरीश कुमार और उपनिदेशक ब्रज मोहन गुप्ता के खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट जारी कर दिए हैं। उनके कारों और उनके कार्यालयों में पड़े सभी फर्नीचर और वस्तुओं को अटैच करने का आदेश दिया गया है।
डीडीए के खिलाफ एक शिकायत की सुनवाई करते हुए 20 मई 2021 को चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने उस पर डेढ़ लाख रुपये हर्जाना और 12 फीसदी प्रति वर्ष ब्याज के साथ 60 लाख 94 हजार 941 रुपये दो महीनों में वापस देने का आदेश जारी किया था। यह आदेश डीडीए के निदेशक हरीश कुमार और उप निदेशक ब्रज मोहन गुप्ता को जारी किया था लेकिन इस आदेश के बाद अभी तक डीडीए के पदाधिकारियों ने राशि नहीं लौटाई।
डीडीए के खिलाफ सेक्टर-35 के रहने वाले भूपिंद्र नागपाल ने शिकायत दी थी। राशि वापस न देने पर अब आयोग ने डीडीए के निदेशक और उपनिदेशक के खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट जारी किया है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भी आदेश की कापी भेज दी गई है।
आयोग ने वारंट जारी करते हुए कहा कि डीडीए की ओर से ऐसा बर्ताव बर्दास्त करने योग्य नहीं है। आदेश जारी होने के बाद भी शिकायतकर्ता को राशि न देना उपभोक्ता कानून के खिलाफ है। इस आदेश में आयोग ने दिल्ली कमिश्नर को दोनों आरोपितों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है। इसके साथ ही 50 हजार रुपये की राशि गिरफ्तारी के जमानती वारंट और एक-एक श्योरिटी भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 12 नवंबर 2021 को होगी।
निदेशक व अप निदेशक के दफ्तर के सभी सामानों को किया जाए अटैच: आयोग
आयोग ने डीडीए के निदेशक और उप निदेशक की आधिकारिक कारों और उनके कार्यालयों में पड़े सभी फर्नीचर और वस्तुओं को अटैच करने के लिए नई दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट को भी निर्देश जारी कर दिए हैं। आयोग ने 20 मई को डीडीए की ओर से पेश हुए वकील को एक सप्ताह के भीतर बैंक विवरण की आपूर्ति करने का आदेश दिया ताकि भूमि राजस्व के बकाया के रूप में एक करोड़ आठ लाख 47 हजार 305 रुपये की डिक्री राशि की वसूली के लिए इसे नीलामी के लिए भी संलग्न किया जा सके।