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स्मार्ट सिटी चंडीगढ़, योजना-जरूरत-चुनौतियां और फायदा

Mon, 21 Sep 2015 03:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 21 Sep 2015 03:02 PM IST
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chandigarh smarty city project review

2020 तक चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी के तौर पर डेवलप करने का लक्ष्य है। लेकिन स्मार्ट सिटी बनाने की डगर यूटी प्रशासन के लिए आसान नहीं होगी।

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चंडीगढ़ टॉप 98 स्मार्ट सिटी के लिए चुने गए शहरों में शामिल हो चुका है। लेकिन असली मुकाबला अब टॉप 20 में शामिल होने के लिए है। चंडीगढ़ को अन्य शहरों के मुकाबले हाईटेक और एडवांस माना जाता है। लेकिन स्मार्ट सिटी में शुमार होने के लिए अभी कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
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यूटी प्रशासन को दिसंबर 2015 तक स्मार्ट सिटी प्रपोजल तैयार कर मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन डेवलपमेंट को सौंपना होगा। स्मार्ट सिटी की तैयारियों को लेकर अमर उजाला ने विभिन्न मुद्दों और जमीनी हकीकत की जांच पड़ताल की। 
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शहर खुद को कैसे करेगा स्मार्ट सिटी के लिए तैयार

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स्मार्ट सिटी प्रपोजल तैयार करते हुए सिर्फ कंसल्टेंट कंपनियां ही नहीं, उसमें आम लोगों की भागीदारी अधिक महत्वपूर्ण रहेगी। प्रपोजल में यूटी को खास ऐसे प्रोजेक्ट चिन्हित करने होंगे, जिन्हें तय समय में पूरा किया जा सके।

शहर में 24 घंटे बिजली-पानी की सप्लाई, कुछ स्पेशल एरिया को पूरी तरह स्मार्ट सिटी बनाना, शहर का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, लोगों के लिए ई-सर्विसेज शुरू करनी होगी।

शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने के साथ सार्वजनिक जगहों पर वाई-फाई सुविधा, बिजली के स्मार्ट मीटर, शहर को सोलर सिटी के तौर पर डेवलप करना शहर के लिए बड़ी चुनौती रहेगी।

फंड के लिए केंद्र पर रहेंगी निगाहें

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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने के लिए शहर को कम से कम 1 हजार करोड़ फंड की जरूरत होगी। फंड के लिए भी प्रशासन को अपने संसाधनों से अधिक केंद्र सरकार पर निर्भर रहना पड़ेगा। टॉप 20 स्मार्ट सिटी में चुने जाने पर भी चंडीगढ़ को पहले साल 200 करोड़ और अगले चार साल तक हर साल 100 करोड़ की ग्रांट मिलेगी।

नियमों के तहत केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले फंड के बराबर ही (करीब 500) करोड़ यूटी को अपने स्तर पर इकट्ठा करना होगा। प्रशासन ने पैसा जुटाने के लिए हाउस टैक्स लगाया है। नगर निगम को भी फंड में भूमिका निभानी होगी।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के कहना है कि प्रशासन को फंड जुटाने के लिए बिजली पानी के रेट बढ़ाने होंगे। कई अन्य सर्विस चार्ज में भी इजाफा किया जाएगा। ऐसे में स्मार्ट सिटी से आम लोगों की जेब पर बोझ पड़ेगा।

दो तरह से होगा स्मार्ट सिटी डेवलेप

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प्रोजेक्ट अफसर दानिश अशरफ ने बताया कि स्मार्ट सिटी को एरिया बेस्ड सोल्यूशन और पेन सिटी दो थीम पर डेवलप किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पेन सिटी के तहत शहर में वाईफाई जैसी सुविधा देनी होंगी। एरिया बेस्ट डेवलेपमेंट के तहत शहर के कुछ हिस्सों को ग्रीन फील्ड डेवलपमेंट के तहत डेवलप किया जाएगा। जबकि रेट्रो फिटिंग मॉडल के तहत मौजूदा धरोहर में बिना अधिक बदलाव किए स्मार्ट सिटी के तौर पर डेवलप किया जा सकेगा।

लोगों से जोड़ने के लिए क्या किया
स्मार्ट सिटी प्रपोजल तैयार करते हुए पहली शर्त लोगों को प्रोजेक्ट से जोड़ना है। शहर की आबादी अर्बन और रूरल एरिया दोनों में रहती है। अधिकारियों के अनुसार लोगों को प्रोजेक्ट से जोड़ने के लिए ऑनलाइन और सीधे संवाद किया जा रहा है। 17 सितंबर से अधिकारी सभी 26 वार्ड में जाकर लोगों से स्मार्ट सिटी के बारे में कमेंट लिए जा रहे हैं। लोगों से क्वालिटी कंपैरिजन सर्वे के तहत फार्म भी भरवाए जा रहे हैं। जिसमें लोग लिखकर भी अपने सुझाव दे सकते हैं। ऑन लाइन लोगों के सुझाव के लिए प्रशासन ने मोबाइल ऐप,एसएमएस सेवा भी शुरू की है।

क्या-क्या किया यूटी प्रशासन ने
यूटी प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए ई पेमेंट सर्विस शुरू कर दी हैं। इस्टेट ऑफिस से लेकर नगर निगम से जुड़ी सुविधाओं का लाभ लोग घर बैठे ऑनलाइन प्राप्त करने लगे हैं। चंडीगढ़ के अधीन 13 गावों को स्मार्ट विलेज बनाने का काम जारी है। शहर को देश का पहला सोलर सिटी बनाया जा रहा है। ट्राइसिटी में मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू करने और रेलवे स्टेेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।  पूरे शहर पर नजर रखने के लिए 220 नए हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में ई-हास्पिटल सर्विस शुरू की गई हैं।

क्या रहेंगी शहर के लिए चुनौतियां

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- 5 लाख की आबादी के लिए बसाए गए शहर की जनसंख्या 12 लाख पार कर चुकी है।
-शहर को स्लम फ्री करने के लिए बड़े स्तर पर हाउसिंग स्कीम को पूरा करना होगा।
-साक्षरता के मुकाबले शहर में युवाओं के लिए रोजगार के काफी कम मौके हैं।
-शहर में करीब 20 स्कूल और 1100 शिक्षकों की कमी को पूरा करना होगा।
-शहर में पार्किंग और ट्रैफिक की व्यवस्था काफी गड़बड़ाई है।
-शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट लोगों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है।
-पीजीआई,जीएमसीएच-32 और जनरल अस्पताल-16 में मरीजों का बोझ काफी अधिक बढ़ चुका है। नए अस्पताल बनाने होंगे।
-2008 स्कीम के तहत 4 हजार कर्मचारियों को फ्लैट अलॉटमेंट अधर में अटकी हुआ है।
-सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स की जरूरत बढ़ गई है।
-स्टेट एक्शन प्लान के तहत 2020 तक शहर का 40 फीसदी एरिया ग्रीनरी से कवर होना जरूरी है।

स्मार्ट सिटी बनने पर क्या मिलेगा

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-शहर में स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम
-मेट्रो शुरू होने से जाम की दिक्कत काफी हद तक दूर होगी।
-लोगों को 24 घंटे बिजली पानी की सप्लाई मिल सकेगी।
-शहर में वाईफाई और जन सुविधाओं में बड़ा बदलाव आएगा।
-नए प्रोजेक्ट आने से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे।
-शहर में पयर्टन को बढ़ावा मिलेगा।
-विभिन्न प्रोजेक्ट के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट से फंड मिलने में आसानी होगी।

ये कहना है यूटी के अधिकारियों का

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देश के टॉप 20 स्मार्ट सिटी में शामिल होना बड़ा चैलेंज है। लेकिन प्रशासन लोगों की भागेदारी और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर ही प्रपोजल तैयार करेगा। फंड जुटाने के लिए भविष्य में कुछ कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। प्रपोजल को तैयार करने के लिए कंसल्टेंट, सीआईआई और आम लोगों के विचारों पर मंथन कर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
- अनुराग अग्रवाल, गृहसचिव और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट सचिव
   
स्मार्ट सिटी के लिए प्रपोजल मिनस्ट्री ऑफ अर्बन डेवलपमेंट गाइड लाइंस के तहत ही तैयार करनी होंगी। कंसल्टेशन से अधिक स्मार्ट सिटी के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखना होगा। जिसके लिए लोगों से सीधा संवाद बनाकर उनकी राय ली जाएगी। प्रोजेक्ट ग्राउंड लेवल पर कितना फिजिबल होगा, यह अधिक मायने रखता है। फंड जनरेट करने के लिए ऐसे प्रोजेक्ट तैयार करेंगे जिससे शहर में अधिक से अधिक रोजगार के मौके उपलब्ध हो सकें।
- दानिश अशरफ

स्मार्ट सिटी प्रपोजल तैयार करने में सभी पक्षों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। प्रशासन ने पहले ही काफी होमवर्क कर लिया है। टॉप 20 में आने की पूरी उम्मीद है। जिसे ध्यान में रखकर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। लोगों के सहयोग और सुझावों से ही स्मार्ट सिटी प्रपोजल को तैयार किया जाएगा।
- विजय कुमार देव, एडवाइजर यूटी

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