{"_id":"5feecfb98ebc3e3c554fc01b","slug":"chandigarh-scientist-made-advance-electrostatic-disinfection-machine","type":"story","status":"publish","title_hn":"जहां पहुंचना आसान नहीं था, युवा वैज्ञानिक ने वहां से कोरोना संक्रमण हटाने के लिए बनाई मशीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जहां पहुंचना आसान नहीं था, युवा वैज्ञानिक ने वहां से कोरोना संक्रमण हटाने के लिए बनाई मशीन
Fri, 01 Jan 2021 01:01 PM IST
निवेदिता वर्मा
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 01 Jan 2021 01:01 PM IST
विज्ञापन
डॉ. मनोज पटेल और उनके द्वारा बनाई गई मशीन।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना संक्रमण से लड़ने में वैज्ञानिकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। मुश्किल वक्त में देश को उन्होंने ऐसे हथियार उपलब्ध कराए जिससे कोरोना के खिलाफ युद्ध आसान बन गया। इसमें चंडीगढ़ स्थित सीएसआईओ (केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन) के युवा वैज्ञानिक मनोज पटेल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने एक ऐसी मशीन बनाई जो उन जगहों को संक्रमण मुक्त करता है, जहां पहुंचना आसान नहीं होता।
विज्ञापन
दरअसल पॉजिटिव मरीज के बातचीत व खांसने के दौरान निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों से कोरोना का फैलाव होता है। ये बूंदें किसी भी सतह पर मौजूद रह सकती हैं और इनके संपर्क में आने से व्यक्ति पॉजिटिव हो जाता है।
विज्ञापन
डॉ. पटेल ने इस परेशानी को समझा और इसे खत्म करने के लिए एडवांस इलेक्ट्रोस्टैटिक डिसइंफेक्शन मशीन तैयार की। साथ ही यह मशीन दूसरी पारंपरिक मशीन के मुकाबले बहुत ही कम कीटाणुशोधन सामग्री का इस्तेमाल करता है। इसकी मदद से सार्वजनिक स्थानों पर भी छोटी से छोटी जगह को संक्रमण मुक्त करता है। इस मशीन का इस्तेमाल बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, सिनेमा हॉल, पशुधन, चिकित्सा उपकरणों, अस्पताल, होटल, रेस्टोरेंट, कार्यालयों और घर पर किया जा सकता है। भारत सरकार के आत्मनिर्भर अभियान में यह बहुत बड़ा योगदान है।
विज्ञापन
डॉ. पटेल ने बताया कि वे पिछले आठ वर्ष से एडवांस इलेक्ट्रोस्टैटिक छिड़काव तकनीक में काम कर रहे हैं और किसानों के लिए कई प्रौद्योगिकी विकसित की। जब महामारी आई तो इसका नया रूप तैयार करने के बारे में सोचा। ट्रायल में पास होने के बाद मशीन की तकनीक को महाराष्ट्र, उत्तराखंड और कर्नाटक में स्थापित कंपनियों को ट्रांसफर कर दी गई। अप्रैल में यह मशीन बाजार में भी आ गई।
इसके अलावा डॉ. पटेल कई सारे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से कृषि अधारित यंत्र, पर्यावरण, फूड सेफ्टी व पोषक, हवाई स्प्रे व ड्रोन प्रौद्योगिकी शामिल है। वे अब तक इलेक्ट्रोस्टैटिक कीटनाशक स्प्रेयर, इलेक्ट्रोस्टैटिक डस्ट मिटिगेशन, स्मॉग कंट्रोल डिवाइस, एयर प्रेशर इलेक्ट्रिक स्विच, इलेक्ट्रोस्टैटिक कोटिंग सिस्टम संबंधित प्रौद्योगिकी विकसित कर चुके हैं। वे औद्योगिक परियोजनाओं की सामाजिक समस्याओं पर भी काम कर रहे हैं।
डॉ. पटेल को अब तक मिल चुके हैं कई अवार्ड व स्कालरशिप
- आईईटीई हरी रामजीटोशनीवाल अवार्ड
- सीएसआईआर यंग साइंटिस्ट अवार्ड
- सुशीला शर्मा न्यू आइडिया अवार्ड
- आईईआई यंग इंजीनियर अवार्ड
- एनआरडीसी नेशनल ससाइटिल इनोवेशन अवार्ड
- गांधीयन यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन अवार्ड
- स्कोच स्मार्ट टेक्नोलॉजी अवार्ड
- साल 2017 में टॉप- 40 इनोवेटर में चुने गए