साल के अंत तक निजी हाथों में होगी चंडीगढ़ की बिजली, प्रशासन को जनवरी में पूरा करना है काम
- केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ पर बनाया दबाव, प्रशासन को जनवरी में पूरा करना है काम
- कंसल्टेंट हायर, बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर तैयार हो रहा खाका
विस्तार
साल के अंत तक शहर की बिजली प्राइवेट कंपनियों के हाथों में होगी। केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन को जनवरी 2021 तक का समय दिया है, लेकिन प्रशासन इस काम को साल के अंत तक ही पूरा कर लेना चाहता है। बीते दिनों पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीके मिश्रा, कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा और गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के साथ वीसी के जरिये हुई बैठक में भी शहर के बिजली के निजीकरण को लेकर चर्चा की गई थी।
शहर के बिजली विभाग को किस तरह से प्राइवेट हाथों में दिया जा सकता है, इसके लिए कंसल्टेंट हायर करने की प्रक्रिया पिछले साल ही शुरू हो गई थी। कई बार टेंडर किए गए, जिसमें पावर फाइनेंस कारपोरेशन ने एक इंटरनेशनल कंपनी डेलॉयट को निजीकरण के सभी पेंच को सुलझाने का काम सौंपा है। यह कंपनी शहर के बिजली विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों, पावर सप्लाई समेत कई अन्य तरह की जानकारियों को एकत्रित कर रही है। इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार होगी।
इसी आधार पर निजीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। गौरतलब है कि शहर में इस समय 2.47 लाख लोग बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अन्य कॉमर्शियल, स्माल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं। चंडीगढ़ की अपनी खुद की बिजली नहीं है, वह डिस्ट्रीब्यूशन का काम करता है। इसके बावजूद पिछले कई साल से विभाग लाभ में ही चल रहा है।
क्यों बिजली को निजी हाथों में देने पर आतुर है प्रशासन?
जब पूरा देश कोविड 19 महामारी से लड़ रहा है खासकर स्वास्थ्य, सफाई और बिजली सेक्टर में लगे सरकारी कर्मचारी कोरोना वॉरियर्स की अहम भूमिका अदा कर रहे हैं और ऐसे संकट के दौर में बिजली विभाग को निजी हाथों में देने पर प्रशासन क्यों आतुर है, इसे लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यह सवाल प्रशासन के कई अधिकारियों से पूछा गया, जिस पर ज्यादातर का कहना था कि यह फैसला केंद्र सरकार का है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने पीएम मोदी के 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज पर चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण का निजीकरण करने की घोषणा की थी।
कंपनिया सेवा करने नहीं, मुनाफा कमाने आएंगी
चंडीगढ़ का बिजली विभाग पहले ही काफी बेहतर काम कर रहा है। प्रशासन भले कह रहा है कि बिजली के निजीकरण से कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन हकीकत यह है कि प्राइवेट कंपनियां सेवा करने शहर में नहीं आएंगी, बल्कि मुनाफा कमाने के लिए काम करेंगी। ऐसे में जब पंजाब, हरियाणा के मुकाबले शहर की बिजली सस्ती है तो क्या गारंटी है कि दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। - गोपाल दत्त जोशी, जनरल सेक्रेटरी, यूटी पावरमैन यूनियन (चंडीगढ़)
बिजली विभाग के निजीकरण से नुकसान होना तय
बिजली के निजीकरण को लेकर शुरू में कई फायदे गिनाए जाएंगे लेकिन बाद में कंपनियां अपना मुनाफा देखेंगी। निजीकरण से नुकसान होना तय है। कर्मचारियों को भी कई तरह की मुश्किलों का कामना करना पड़ेगा। नगर निगम के कॉरपोरेशन बनने के वक्त कई तरह के सपने दिखाए गए थे, लेकिन आज हकीकत यह है कि नगर निगम के पास अपने कर्मचारियों को सैलरी देने तक के पैसे नहीं है। - बलविंदर सिंह, प्रेसिडेंट, चंडीगढ़ सब-ऑर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन (यूटी)
केंद्र सरकार ने सभी केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली के निजीकरण का फैसला किया है। चंडीगढ़ में भी इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जनवरी 2021 तक का समय है लेकिन हम इससे पहले निजीकरण की प्रक्रिया को पूरा कर लेंगे। - मनोज परिदा, एडवाइजर