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एक शख्स, जिसे शहर से इतना प्यार कि सिस्टम से जूझ जाता
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 08 Feb 2016 12:18 PM IST
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मिलिए एक ऐसे शख्स से, जो अपने शहर से और शहरवासियों से इतना प्यार करता है कि उनके लिए सिस्टम से जूझ जाता है। ये हैं एडवोकेट अजय जग्गा, जो उम्मीद की ऐसी मशाल हैं, जिन्होंने शहरवासियों के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया है।
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फिर चाहे होटलों में मनमाने ढंग से लगने वाला सर्विस चार्ज हो या फिर शहर की धरोहर हेरिटेज फर्नीचर को बिकने से रोकने का मुद्दा। पावर टैरिफ बढ़ाने की बात हो या फिर डीजल ऑटो का मुद्दा। अजय पिछले कई सालों से इन मुद्दों को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन से लड़ रहे हैं। कई मोर्चों पर उनकी जीत भी हुई है, लेकिन वे लड़ाई आगे जारी रखना चाहते हैं।
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पावर टैरिफ बढ़ाने से शुरू हुई थी लड़ाई
साल 1995 में चंडीगढ़ प्रशासन का बिजली का काफी बिल बकाया था। अपनी माली हालत को सुधारने के लिए उसने बिजली बिल वसूलने के बजाए पावर टैरिफ बढ़ाने का फैसला लिया। अजय जग्गा ने इसका विरोध जताया। उनका कहना था कि यदि माली हालत सुधारनी है तो बकाया बिल वसूला जाए न कि पावर टैरिफ बढ़ाया जाए। वे इस मसले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आर्डर दिया कि वे पावर टैरिफ बढ़ाने के बजाए बकाया बिल वसूले और उस दौरान बिजली के रेट बढ़ने से रुक गए।
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साल 2006 में उन्हें सूचना मिली
शहर की धरोहर को बचाने के लिए प्रशासन को मजबूबर किया कि चंडीगढ़ का एक मेनहोल ब्रिटेन में दस लाख 87 हजार में बेचा गया है। बाद में पता चला कि यहां पर उसे मात्र 300 रुपये में बेचा गया था। उन्होंने कई बार चंडीगढ़ प्रशासन को पत्र लिखकर अवैध नीलामी रोकने के लिए पत्र लिखा, लेकिन प्रशासन ने नहीं सुना। उन्होंने दलील दी कि चंडीगढ़ प्रशासन शहरवासियों पर कई तरह के टैक्स लगाती है।
यदि इन फर्नीचर को अंतरराष्ट्र्रीय बाजार में बेचा जाए तो काफी अच्छी कीमत मिलेगी और टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी या फिर हेरिटेज के लिए एक म्यूजियम बना दिया जाए। हाईकोर्ट में मामला पहुंचा और चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि वे हेरिटेज फर्नीचर को संरक्षित रखेंगे और इसकी सुरक्षा का ध्यान रखेंगे। हेरिटेज मामले में अब प्रशासन ने एक प्रोटेक्शन सेल बनाया है।
सर्विस चार्ज की लड़ाई
होटल इंडस्ट्री की ओर से लगाए जाने वाला सर्विस चार्ज का मसला भी अजय जग्गा ने उठाया। वे हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने आर्डर दिया कि इसे सही तरीके से लागू करने का आदेश दिया।