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घर में निकला रेड सैंड बोआ, रेस्क्यू टीम ने जंगल में छोड़ा, करोड़ों में है कीमत
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चंडीगढ़। वन विभाग ने वीरवार को सेक्टर-19 के एक घर से सैंड बोआ (दो मुंहा) सांप को पकड़ा है। सांप को देखने के बाद घर के लोगों ने वन विभाग को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सांप को रेस्क्यू किया। कई कारणों की वजह से सैंड बोआ की कीमत करोड़ों में होती है।
रेड सैंड बोआ सांप दुर्लभ प्रजाति का सांप है। अधिकतर यह रेतीली जमीन पर रहता है। इस वजह से इसे सैंड बोआ सांप कहते हैं। इस सांप का इस्तेमाल कई बीमारियों को ठीक करने करने में किया जाता है। इसके अलावा कई और कारण हैं जिसकी वजह से इसकी तस्करी ज्यादा होती है। वन विभाग के उप निदेशक डॉ. अब्दुल क्यूम ने कहा कि वीरवार को सेक्टर-19 में एक सांप निकलने की सूचना मिली थी। जल्द ही विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। सांप को रेस्क्यू किया गया तो पता चला कि वह सैंड बोआ था। उन्होंने कहा कि सांप को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद सुखना सेंचुरी या सांप के रहने लायक अनुकूल जगह पर छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि ये सांप जहरीले नहीं होते और बहुत ही धीमी गति से चलते हैं। ये चूहा, गिलहरी, खरगोश, मेंढक आदि को अपना शिकार बनाते हैं और ज्यादातर समय रेतीले इलाकों में छुप कर रहते हैं। अब्दुल क्यूम ने सैंड बोआ सांप से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी अपने ट्विटर हैंडल से शेयर की।
रेड सैंड बोआ सांप की तस्करी की कुछ वजहें
- महंगे परफ्यूम बनाने के लिए इस सांप की तस्करी
- कैंसर के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है
- इस सांप के साथ ये अंधविश्वास जुड़ गया है कि इसको पालने से धन और संपत्ति की प्राप्ति होती है
- इसे तंत्र क्रियाओं में इस्तेमाल किया जाता है
- नशीली चीजों के लिए तस्करी
घर में दिखे सांप व अन्य जानवर तो एप या फोन कर दें जानकारी
घर या आसपास कोई सांप व अन्य वन्य जीव दिखाई देता है तो इसकी जानकारी शहरवासी फोटो के साथ वन विभाग को तुरंत भेज सकते हैं। इसके लिए विभाग ने एक मोबाइल एप भी बनाया है जिसका नाम वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू एप है। एप के माध्यम से उस जगह की सटीक लोकेशन भी भेजी जा सकेगी, जहां पर वन्य जीव दिखाई दिया होगा। लोग सीधे अपनी शिकायत फोटो के साथ ऐप पर ही भेज सकते हैं। इसके अलावा लोग हेल्पलाइन नंबर 0172-2700217 पर भी फोन कर सकते हैं।
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रेड सैंड बोआ सांप दुर्लभ प्रजाति का सांप है। अधिकतर यह रेतीली जमीन पर रहता है। इस वजह से इसे सैंड बोआ सांप कहते हैं। इस सांप का इस्तेमाल कई बीमारियों को ठीक करने करने में किया जाता है। इसके अलावा कई और कारण हैं जिसकी वजह से इसकी तस्करी ज्यादा होती है। वन विभाग के उप निदेशक डॉ. अब्दुल क्यूम ने कहा कि वीरवार को सेक्टर-19 में एक सांप निकलने की सूचना मिली थी। जल्द ही विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। सांप को रेस्क्यू किया गया तो पता चला कि वह सैंड बोआ था। उन्होंने कहा कि सांप को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद सुखना सेंचुरी या सांप के रहने लायक अनुकूल जगह पर छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि ये सांप जहरीले नहीं होते और बहुत ही धीमी गति से चलते हैं। ये चूहा, गिलहरी, खरगोश, मेंढक आदि को अपना शिकार बनाते हैं और ज्यादातर समय रेतीले इलाकों में छुप कर रहते हैं। अब्दुल क्यूम ने सैंड बोआ सांप से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी अपने ट्विटर हैंडल से शेयर की।
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रेड सैंड बोआ सांप की तस्करी की कुछ वजहें
- महंगे परफ्यूम बनाने के लिए इस सांप की तस्करी
- कैंसर के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है
- इस सांप के साथ ये अंधविश्वास जुड़ गया है कि इसको पालने से धन और संपत्ति की प्राप्ति होती है
- इसे तंत्र क्रियाओं में इस्तेमाल किया जाता है
- नशीली चीजों के लिए तस्करी
घर में दिखे सांप व अन्य जानवर तो एप या फोन कर दें जानकारी
घर या आसपास कोई सांप व अन्य वन्य जीव दिखाई देता है तो इसकी जानकारी शहरवासी फोटो के साथ वन विभाग को तुरंत भेज सकते हैं। इसके लिए विभाग ने एक मोबाइल एप भी बनाया है जिसका नाम वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू एप है। एप के माध्यम से उस जगह की सटीक लोकेशन भी भेजी जा सकेगी, जहां पर वन्य जीव दिखाई दिया होगा। लोग सीधे अपनी शिकायत फोटो के साथ ऐप पर ही भेज सकते हैं। इसके अलावा लोग हेल्पलाइन नंबर 0172-2700217 पर भी फोन कर सकते हैं।
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