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चंडीगढ़ रेपः जांच अधिकारी से क्रॉस एग्जामिनेशन
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 27 Mar 2014 10:19 AM IST
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पांच कांस्टेबलों पर दुराचार के आरोप के मामले में पीड़िता के बयान से पलटने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशुल शुक्ला की अदालत में पहली जांच अधिकारी उषा रानी का क्रॉस एग्जामिनेशन हुआ।
बचाव पक्ष के वकील रबिंद्रा पंडित ने ऊषा रानी से क्रॉस के दौरान पीड़िता के मेडिकल और सीआरपीसी-164 के तहत दर्ज बयानों से जुड़े सवाल किए।
पंडित के मुताबिक ऊषा रानी ने माना कि इस पूरे प्रकरण के दौरान काफी राजनैतिक दबाव बढ़ गया था। पीड़िता के बयानों के दौरान पुलिस वाले उसे अदालत में लेकर आते हैं, परंतु इस मामले में पुलिस वाले नहीं बल्कि राजनीतिक छवि के व्यक्ति उसे अदालत में लेकर पहुंचे थे।
पीड़िता के मेडिकल के दौरान सेक्टर-16 अस्पताल में देरी होने की बात मानते हुए ऊषा रानी ने कहा कि पीड़िता के मेडिकल के दौरान उसके परिजनों की मंजूरी आवश्यक होती है। वहीं इस मामले में उसके साथ सियासी लोग शामिल थे। उन्होंने उसके मेडिकल की मंजूरी दी थी। हालांकि बाद में पीड़िता की मां ने सहमति पत्र पर अंगूठा लगाया था।
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ऊषा रानी के क्रॉस एग्जामिनेशन के बाद अदालत ने केस की अगली सुनवाई के लिए दो अप्रैल की तारीख तय की है। जानकारी के मुताबिक बुधवार भी सुनवाई के दौरान पीड़िता अदालत में अक्षय से मिलने पहुंची हुई थी।
यह था मामला
खुड्डा लाहौरा निवासी दसवीं की छात्रा ने 19 दिसंबर 2013 को चंडीगढ़ पुलिस के पीसीआर और क्राइम ब्रांच में तैनात पांच कांस्टेबलों पर दुराचार और छेड़छाड़ की शिकायत दी थी। इस पर पुलिस ने पांचों के खिलाफ केस दर्जकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस ने पांचों को बर्खास्त करते हुए मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने के लिए जिला अदालत को लिखा था। जांच के लिए पुलिस ने डीएसपी कमला मीणा के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी।
एसआईटी ने 21 फरवरी को पांचों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। इसके बाद अदालत ने पांचों कांस्टेबलों पर आरोप तय किए थे। वहीं 21 मार्च को पीड़िता अपने बयान से पलट गई थी।
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बचाव पक्ष के वकील रबिंद्रा पंडित ने ऊषा रानी से क्रॉस के दौरान पीड़िता के मेडिकल और सीआरपीसी-164 के तहत दर्ज बयानों से जुड़े सवाल किए।
पंडित के मुताबिक ऊषा रानी ने माना कि इस पूरे प्रकरण के दौरान काफी राजनैतिक दबाव बढ़ गया था। पीड़िता के बयानों के दौरान पुलिस वाले उसे अदालत में लेकर आते हैं, परंतु इस मामले में पुलिस वाले नहीं बल्कि राजनीतिक छवि के व्यक्ति उसे अदालत में लेकर पहुंचे थे।
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पीड़िता के मेडिकल के दौरान सेक्टर-16 अस्पताल में देरी होने की बात मानते हुए ऊषा रानी ने कहा कि पीड़िता के मेडिकल के दौरान उसके परिजनों की मंजूरी आवश्यक होती है। वहीं इस मामले में उसके साथ सियासी लोग शामिल थे। उन्होंने उसके मेडिकल की मंजूरी दी थी। हालांकि बाद में पीड़िता की मां ने सहमति पत्र पर अंगूठा लगाया था।
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ऊषा रानी के क्रॉस एग्जामिनेशन के बाद अदालत ने केस की अगली सुनवाई के लिए दो अप्रैल की तारीख तय की है। जानकारी के मुताबिक बुधवार भी सुनवाई के दौरान पीड़िता अदालत में अक्षय से मिलने पहुंची हुई थी।
यह था मामला
खुड्डा लाहौरा निवासी दसवीं की छात्रा ने 19 दिसंबर 2013 को चंडीगढ़ पुलिस के पीसीआर और क्राइम ब्रांच में तैनात पांच कांस्टेबलों पर दुराचार और छेड़छाड़ की शिकायत दी थी। इस पर पुलिस ने पांचों के खिलाफ केस दर्जकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस ने पांचों को बर्खास्त करते हुए मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने के लिए जिला अदालत को लिखा था। जांच के लिए पुलिस ने डीएसपी कमला मीणा के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी।
एसआईटी ने 21 फरवरी को पांचों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। इसके बाद अदालत ने पांचों कांस्टेबलों पर आरोप तय किए थे। वहीं 21 मार्च को पीड़िता अपने बयान से पलट गई थी।