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चंडीगढ़ रेपः जांच अधिकारी के बयान हुए दर्ज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 26 Mar 2014 10:05 AM IST
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दुराचारी पुलिस गैंग मामले में पीड़िता के बयान से पलटने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशुल शुक्ला की अदालत में पहली जांच अधिकारी उषा रानी के बयान दर्ज हुए।
बयानों में उन्होंने कहा कि दसवीं कक्षा की पीड़ित छात्रा 19 दिसंबर को चौकी में आई थी और कांस्टेबलों द्वारा दुराचार करने के बारे में जानकारी दी थी।
उन्होंने तुरंत मामले के बारे में डीएसपी आशीष कपूर को बताया, जिसके बाद पीड़िता को लेकर डीएसपी के पास गईं और डीएसपी के कहने पर पांचों कांस्टेबलों पर अलग-अलग धाराओं के तहत बयान दर्ज किए गए थे।
जबकि बचाव पक्ष के वकील हरीश भारद्वाज ने कहा पीड़िता ने बयानों में कहा था कि वह खुद अपनी भाई के साथी डीएसपी आशीष कपूर के दफ्तर पहुंची थीं। उसके बाद डीएसपी ने जांच अधिकारी को अपने दफ्तर बुलाया था।
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उन्होंने बताया कि पीड़िता की मेडिकल लीगल रिपोर्ट पर सुनीता धवन, एक पार्षद और अशोक जसवाल के हस्ताक्षर थे। बचाव पक्ष के वकील हरीश भारद्वाज ने कहा कि पुलिस ने मामला राजनीतिक दबाव में दर्ज किया था।
मामले की सुनवाई 25 मार्च को होगी। गौरतलब है कि 1 मार्च को पीड़ित भी अपने बयानों से पलट चुकी है।
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बयानों में उन्होंने कहा कि दसवीं कक्षा की पीड़ित छात्रा 19 दिसंबर को चौकी में आई थी और कांस्टेबलों द्वारा दुराचार करने के बारे में जानकारी दी थी।
उन्होंने तुरंत मामले के बारे में डीएसपी आशीष कपूर को बताया, जिसके बाद पीड़िता को लेकर डीएसपी के पास गईं और डीएसपी के कहने पर पांचों कांस्टेबलों पर अलग-अलग धाराओं के तहत बयान दर्ज किए गए थे।
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जबकि बचाव पक्ष के वकील हरीश भारद्वाज ने कहा पीड़िता ने बयानों में कहा था कि वह खुद अपनी भाई के साथी डीएसपी आशीष कपूर के दफ्तर पहुंची थीं। उसके बाद डीएसपी ने जांच अधिकारी को अपने दफ्तर बुलाया था।
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उन्होंने बताया कि पीड़िता की मेडिकल लीगल रिपोर्ट पर सुनीता धवन, एक पार्षद और अशोक जसवाल के हस्ताक्षर थे। बचाव पक्ष के वकील हरीश भारद्वाज ने कहा कि पुलिस ने मामला राजनीतिक दबाव में दर्ज किया था।
मामले की सुनवाई 25 मार्च को होगी। गौरतलब है कि 1 मार्च को पीड़ित भी अपने बयानों से पलट चुकी है।