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चंडीगढ़ रेपः पुलिस दबा रही है पूरा मामला
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 15 Apr 2014 10:15 AM IST
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खुडा लाहौरा में कांस्टेबलों द्वारा दुराचार मामले की पीड़िता पुलिस के खिलाफ न्याय की लड़ाई अकेले ही लड़ रही है। आरोपी कांस्टेबलों को पुलिस के अधिकारियों की ओर से पूरा सहयोग मिल रहा है।
शिकायत दर्ज कराते समय 19 दिसंबर को पीड़िता से जो दुर्व्यवहार हुआ उस मामले की जांच रिपोर्ट अभी तक अटकी है। इतना ही नहीं पीड़िता को बयान से मुकरने वाली लेडी कांस्टेबल का नाम सामने आने के बाद भी पुलिस की ओर से उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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शिकायत दर्ज कराते समय 19 दिसंबर को पीड़िता से जो दुर्व्यवहार हुआ उस मामले की जांच रिपोर्ट अभी तक अटकी है। इतना ही नहीं पीड़िता को बयान से मुकरने वाली लेडी कांस्टेबल का नाम सामने आने के बाद भी पुलिस की ओर से उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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इन आरोपों की होनी थी जांच
पीड़िता के भाई ने 22 दिसंबर को आईजी आरपी उपाध्याय को पत्र लिखकर पुलिस की जांच टीम पर ये आरोप लगाए थे।
- पुलिस थाने में अधिकारियों ने उनकी बहन पर आरोपी पुलिस कर्मचारियों के साथ समझौता करने का दबाव बनाया गया
- पीड़िता के बयान दर्ज करते समय आरोपी अक्षय और सुनील को सामने बैठाया गया।
- दोनों आरोपियों को कुर्सी पर बैठाया गया, जबकि पीड़िता और उसके भाई को नीचे कौने में बैठने को कहा।
- तत्कालीन जांच अधिकारी ने कहा कि यह बलात्कार नहीं प्रेम प्रसंग का मामला है।
- तत्कालीन जांच अधिकारी का व्यवहार पीड़िता के प्रति सही नहीं था। इसकी जांच करवाई जाए।
- उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है, मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
- मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी में उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया, जिन पर दबाव बनाने का आरोप है।
- पुलिस थाने में अधिकारियों ने उनकी बहन पर आरोपी पुलिस कर्मचारियों के साथ समझौता करने का दबाव बनाया गया
- पीड़िता के बयान दर्ज करते समय आरोपी अक्षय और सुनील को सामने बैठाया गया।
- दोनों आरोपियों को कुर्सी पर बैठाया गया, जबकि पीड़िता और उसके भाई को नीचे कौने में बैठने को कहा।
- तत्कालीन जांच अधिकारी ने कहा कि यह बलात्कार नहीं प्रेम प्रसंग का मामला है।
- तत्कालीन जांच अधिकारी का व्यवहार पीड़िता के प्रति सही नहीं था। इसकी जांच करवाई जाए।
- उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है, मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
- मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी में उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया, जिन पर दबाव बनाने का आरोप है।
कांस्टेबल कविता को खुली छूट
पीड़िता के वकील ब्रजेश्वर जसवाल का कहना है कि आरोपी कांस्टेबल अनिल की पत्नी (कांस्टेबल कविता) एसआईटी की जांच के समय से ही पीड़िता के संपर्क में थी। आरोपी महिला कांस्टेबल ने ही पीड़िता के साथ आरोपियों के परिजनों का समझौता करवाने का प्रयास किया। उनका कहना है कि महिला कांस्टेबल की पीड़िता के साथ कई बार मोबाइल पर बात हुई है। यह सब कुछ मोबाइल डिटेल से साबित हो रहा है।
बाबा रामदेव को मोहरा बनाया
पीड़ित पक्ष के अनुसार उनकी पहचान उजागर करने के लिए बाबा रामदेव को भारी भीड़ के साथ पुलिस अधिकारी उनके घर लेकर पहुंचे। इस वजह से पूरा परिवार अपमानित हुआ और मजबूरन उन्हें अपना पुश्तैनी घर बेचना पड़ा। वे जहां भी घर लेते हैं, पुलिस के दबाव में मकान मालिक जल्द ही उनसे घर खाली करवा लेते हैं। पीड़िता की पहचान उजागर होने पर युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष हरमेल केसरी की ओर से पुलिस विभाग में बाबा रामदेव की शिकायत की गई लेकिन यह जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
राजनीतिक दल भी कन्नी काट गए
मामला उजागर हुआ तो भाजपा और कांग्रेस ने सड़कों पर इस मामले को लेकर काफी राजनीति की। मगर धीरे-धीरे पूरा मामला ही मैनेज हो गया और न्याय की लड़ाई में पीड़िता अकेली रह गई। पीड़िता के भाई का कहना है कि शुरू से उनकी बहन पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि पूरा परिवार काफी परेशानी से जूझ रहा है। इसलिए सुरक्षा की भी मांग की गई है। बाबा रामदेव ने घर आकर मदद देने का वायदा किया और मीडिया में वाहवाही लूटी मगर उनका वादा भी झूठा साबित हुआ।
ये कहते हैं पुलिस अधिकारी
पीड़िता के भाई की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच पूरी होने वाली है। इसी माह रिपोर्ट आईजी को सौंप दी जाएगी।
-मनीष चौधरी, एसएसपी ट्रैफिक
-मनीष चौधरी, एसएसपी ट्रैफिक