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पीजीआई में चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा हुक्का बार खत्म करने में विफल
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चंडीगढ़। स्ट्रेटेजिक इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च (एसआईपीएचईआर) की ओर से ई-रिसोर्स के सहयोग से सीओटीपीए और अन्य तंबाकू विरोधी कानूनों के बेहतर कार्यान्वयन के लिए रविवार को पीजीआई में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। तंबाकू नियंत्रण केंद्र (ई-आरसीटीसी), सामुदायिक चिकित्सा विभाग, पीजीआई और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से हुई चर्चा में बताया कि तंबाकू के उपयोग से कैंसर सहित 14 प्रतिशत गैर संचारी रोग होते हैं। इसके परिणामस्वरूप भारत में 1.4 मिलियन मौतें होती हैं। इस दौरान डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा सरकार हुक्का बार को खत्म करने में विफल साबित हो रही है।
रिसोर्स सेंटर फॉर टोबैको कंट्रोल (ई-आरसीटीसी) के डायरेक्टर और डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई के प्रोफेसर सोनू गोयल ने कहा कि दुनिया में सालाना 70 लाख मौतें होती हैं। उन्होंने तंबाकू बेचने वाले विक्रेता को तंबाकू विक्रेताओं की जागरूकता के साथ अनुपालन में सुधार करने और युवाओं में तंबाकू के उपयोग को कम करने के लिए तंबाकू नियंत्रण कानूनों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया। डॉ. राकेश गुप्ता ने उत्तर भारत के तीन क्षेत्राधिकारों में तंबाकू विक्रेताओं के लिए हाल ही में आयोजित जागरूकता अभियान के अपने अनुभव साझा किया। उन्होंने 750 से अधिक बिक्री बिंदुओं पर सीओटीपीए सहित तंबाकू विरोधी कानूनों के अनुपालन के अवलोकन के आधार पर कहा कि तंबाकू विक्रेता तंबाकू विरोधी कानूनों से अनजान है और इसका अनुपालन खराब है। उन्होंने चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा सरकार को हुक्का बार को खत्म करने के प्रक्रिया में विफल बताया। डॉ. अर्पित गुप्ता ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान दिशा निर्देश प्रस्तुत किए जाने का प्रस्ताव दिया। पीयू के प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार ने तंबाकू उत्पाद अपशिष्ट पर लागू प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के बारे में विस्तार से बताया। सीसीपीआर की चेयरपर्सन हरजिंदर कौर ने कहा कि चाइल्ड प्रोटेक्शन राइट्स आयोग का विचार था कि तंबाकू नियंत्रण और बच्चों को इस ड्रग की लत से बचाने में सीपीसीआर की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है।
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रिसोर्स सेंटर फॉर टोबैको कंट्रोल (ई-आरसीटीसी) के डायरेक्टर और डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई के प्रोफेसर सोनू गोयल ने कहा कि दुनिया में सालाना 70 लाख मौतें होती हैं। उन्होंने तंबाकू बेचने वाले विक्रेता को तंबाकू विक्रेताओं की जागरूकता के साथ अनुपालन में सुधार करने और युवाओं में तंबाकू के उपयोग को कम करने के लिए तंबाकू नियंत्रण कानूनों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया। डॉ. राकेश गुप्ता ने उत्तर भारत के तीन क्षेत्राधिकारों में तंबाकू विक्रेताओं के लिए हाल ही में आयोजित जागरूकता अभियान के अपने अनुभव साझा किया। उन्होंने 750 से अधिक बिक्री बिंदुओं पर सीओटीपीए सहित तंबाकू विरोधी कानूनों के अनुपालन के अवलोकन के आधार पर कहा कि तंबाकू विक्रेता तंबाकू विरोधी कानूनों से अनजान है और इसका अनुपालन खराब है। उन्होंने चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा सरकार को हुक्का बार को खत्म करने के प्रक्रिया में विफल बताया। डॉ. अर्पित गुप्ता ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान दिशा निर्देश प्रस्तुत किए जाने का प्रस्ताव दिया। पीयू के प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार ने तंबाकू उत्पाद अपशिष्ट पर लागू प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के बारे में विस्तार से बताया। सीसीपीआर की चेयरपर्सन हरजिंदर कौर ने कहा कि चाइल्ड प्रोटेक्शन राइट्स आयोग का विचार था कि तंबाकू नियंत्रण और बच्चों को इस ड्रग की लत से बचाने में सीपीसीआर की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है।
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