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Chandigarh: मलेरिया के संक्रमण से बचाएगा पृश्निपर्णी, PGI के मेडिकल पैरासिटालॉजी विभाग की छात्रा ने किया शोध

Tue, 25 Apr 2023 10:30 AM IST
नवीन दलाल वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़ Published by: नवीन दलाल Updated Tue, 25 Apr 2023 10:30 AM IST
सार

शोध छात्रा रिचा यादव ने बताया कि आईसीएमआर के फेलोशिप में 24 दिसंबर, 2018 को काम शुरू किया गया था। इन-विट्रो (प्रयोगशाला) परिणामों के आधार पर कहा जा सकता है कि पौधे का अर्क मलेरिया परजीवी के खिलाफ प्रभावी है क्योंकि परिणामों ने मलेरिया परजीवी के खिलाफ उच्च क्षमता और प्रभावशीलता दिखाई है।

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Chandigarh: Prusniparni will save from malaria infection, research done by student of Medical Parasitology
mosquito malaria - फोटो : istock

विस्तार

औषधीय गुणों के लिए मशहूर पृश्निपर्णी (पिठवन) पौधा मलेरिया के परजीवी को समाप्त कर सकता है। पीजीआई के मेडिकल पैरासिटालॉजी विभाग की पीएचडी छात्रा ने यह अपने शोध के परिमाण में साबित किया है। इस शोध प्रोजेक्ट को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के फेलोशिप में किया गया है।

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यह पौधा मलेरिया के परजीवी को समाप्त करने में कारगर
शोध छात्रा रिचा यादव ने बताया कि आईसीएमआर के फेलोशिप में 24 दिसंबर, 2018 को काम शुरू किया गया था। इन-विट्रो (प्रयोगशाला) परिणामों के आधार पर कहा जा सकता है कि पौधे का अर्क मलेरिया परजीवी के खिलाफ प्रभावी है क्योंकि परिणामों ने मलेरिया परजीवी के खिलाफ उच्च क्षमता और प्रभावशीलता दिखाई है। संक्रमण के प्रारंभिक चरण में परजीवी को मारने की आवृत्ति रोगी को इस घातक संक्रमण से उबरने में मदद कर सकती है। रिचा यादव ने पीजीआई के पूर्व डीन एकेडमिक व विभाग प्रमुख पोफ्रेसर राकेश सहगल के मार्गदर्शन में यह शोध किया है।
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पौधे के औषधीय गुण को मलेरिया के इलाज पर किया इस्तेमाल
इसके अलावा हेमोलिसिस परख और साइटोटॉक्सिसिटी परख की पुष्टि के अनुसार इस पौधे के अर्क के संपर्क में रक्त कोशिका और गुर्दे की कोशिका रेखाओं ने बहुत व्यवहार्यता दिखाई है। शोध परिणाम की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पशु मॉडल अध्ययन से परिणामों की पुष्टि की गई। चूहे पर किए गए परीक्षण का परिणाम भी सकारात्मक रहा है। शोध के लिए पीजीआई ने पृश्निपर्णी पौधे राष्ट्रीय वृक्ष आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, झांसी (उत्तर प्रदेश) से प्राप्त किए गए थे।

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ऐसे पाई सफलता

रिचा ने बताया कि पौधे के एक्टिव कपाउंड को तकनीकी मानक के आधार पर प्राप्त किया गया। उसके बाद लैब में मलेरिया कल्चर को विकसित किया गया। उस कल्चर को पृश्निपर्णी से निकाले गए कंपाउंड को तय मानक में दिया गया जिससे मलेरिया के परजीवी तेजी से समाप्त हुए। इस परिणाम का चूहों पर आकलन किया गया। चूहों को इस कंपाउंड से तैयार की गई दवा लिक्विड रूप में दी गई।

पीजीआई की कमेटी ने इसे स्वीकृति दे दी
चूहे पर इस दवा का कोई दुष्प्रभाव सामने नहीं आया। मानव पर इसके दुष्प्रभाव को आकलन करने के लिए लैब में आरबीसी और किडनी सेल लाइन पर इसका असर देखा गया। वहां भी परिणाम सकारात्मक रहा। पीजीआई की कमेटी ने इसे स्वीकृति दे दी है। इस शोध को एशियन पेसेफिक कांग्रेस ऑफ क्लीनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इन्फेक्शन के जुलाई में कोरिया में होने वाले 19वें कॉन्फ्रेंस में सम्मानित होने के लिए चयनित किया गया है।

पृश्निपर्णी के ये हैं औषधीय गुण

पिठवन का स्वाद कड़वा, कसैला और तासीर गर्म होती है। यह जलन, बुखार, अतिसार, रक्त-अतिसार, पेचिश, खूनी बवासीर, ज्यादा प्यास, उल्टी, सांप-बिच्छू के काटने पर प्रयोग होता है। इसके सेवन से खांसी और कफ नष्ट होता है।

आयुर्वेद की प्रमुख जड़ी बूटियों में से एक
पिठवन को डबरा, पीठावन, धवानी, चित्रपर्णी, अग्निपर्णी, और सित्तिरप्पलादी भी कहा जाता है, आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है। यह दशमूल में से एक है- दस औषधीय जड़ी बूटियों की जड़ों का संयोजन होता है। यह नेपाल, भारत, चीन और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। भारत में यह व्यापक रूप से बिहार, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में पाया जाता है। पृश्निपर्णी के अद्भुत स्वास्थ्य लाभों ने इसे आयुर्वेद की प्रमुख जड़ी बूटियों में से एक बना दिया है।

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