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PGI Strike: इमरजेंसी में हड़ताल करवा सेक्टर-15 में परांठे खाने चले गए थे डॉक्टर साहब, स्वास्थ्य मंत्रालय सख्त

Sat, 19 Oct 2024 01:22 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 19 Oct 2024 01:22 PM IST
सार

बीते सात अक्तूबर की रात इमरजेंसी में एक मरीज के महिला तीमारदार की ओर से जूनियर महिला रेजिडेंट डॉक्टर को धक्का देने बाद रेजिडेंट डॉक्टर तीन घंटे से ज्यादा समय तक मरीजों का इलाज बंद कर हड़ताल पर चले गए थे। इस मामले में महिला तीमारदार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

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Chandigarh PGI Strike Report during emergency by doctors
पीजीआई में डॉक्टरों की हड़ताल - फोटो : संवाद/फाइल

विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई में रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन की ओर से इमरजेंसी बंद कर हड़ताल करने के मामले को स्वास्थ्य मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल का कहना है कि डॉक्टरों की हड़ताल को संस्थान और मंत्रालय गंभीरता से ले रहे हैं क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों का हड़ताल पर जाना एक गंभीर अपराध और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है। 
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बीते सात अक्तूबर की रात इमरजेंसी में एक मरीज के महिला तीमारदार की ओर से जूनियर महिला रेजिडेंट डॉक्टर को धक्का देने बाद रेजिडेंट डॉक्टर तीन घंटे से ज्यादा समय तक मरीजों का इलाज बंद कर हड़ताल पर चले गए थे। इस मामले में महिला तीमारदार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
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रिपोर्ट में खुलासा

इमरजेंसी में हड़ताल के दौरान पीजीआई निदेशक के साथ दौरे पर पर रहे एक सीनियर फैकल्टी ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट प्रो. विवेक लाल को सौंपी है। सीनियर फैकल्टी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हड़ताल के दौरान वह निदेशक के साथ इमरजेंसी में राउंड पर थे। इमरजेंसी में पहुंचने पर पता चला कि रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हरिहरन यहां पर नहीं हैं। उनके सहकर्मियों ने बताया कि मामले को तूल देकर वह खुद सेक्टर-15 में परांठा खाने चले गए हैं। फैकल्टी की रिपोर्ट में कई अलग-अलग बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई है। 

इसमें बताया गया है कि इमरजेंसी में हड़ताल के दौरान रात 11 बजे इमरजेंसी मेडिकल ओपीडी में लगभग 50 रेजिडेंट डॉक्टर मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन वहां संगठन के अध्यक्ष नहीं थे। पूछे जाने पर बताया गया कि वह सेक्टर 15 में एक रेजिडेंट के साथ परांठा खा रहे हैं। उन्होंने आगे बताया है कि 3 घंटे से ज्यादा समय के लिए इमरजेंसी बाधित रखना और मरीजों की देखभाल में बाधा डालकर खुद अस्पताल से गायब रहना गंभीर मामला है। वहीं, दूसरी तरफ आरोप का खंडन करते हुए संगठन के अध्यक्ष डॉ. हरिहरन का कहना है कि उन्होंने डॉक्टर के साथ इमरजेंसी में हुई बदसलूकी के बारे में निदेशक को बताया था। हालांकि, निदेशक और सीनियर फैकल्टी के देर रात इमरजेंसी में राउंड पर आने के दौरान वह इमरजेंसी में अपना फोन रिचार्ज करने के लिए बाहर चले गए थे।

कोलकाता की घटना को लेकर फिर की हड़ताल

सीनियर फैकल्टी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि इमरजेंसी में हड़ताल के बाद रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने कोलकाता की घटना के संदर्भ में फिर पीजीआई में हड़ताल कॉल कर दी जबकि उस घटना को लेकर इस बार एम्स दिल्ली, निमहंस बंगलूरू और जेआईपीएमईआर पुडुचेरी सहित देश के राष्ट्रीय महत्व के किसी संस्थान में इस तरह काम बंद नहीं किया गया।

इतना ही नहीं, संगठन के अध्यक्ष ने एम्स दिल्ली के रेजिडेंट डॉक्टरों से अपील की कि वह विरोध में पीजीआई डॉक्टर के साथ शामिल हों और पश्चिम बंगाल के डॉक्टर के लिए एकजुटता दिखाएं, जबकि पीजीआई प्रशासन ने हड़ताल के दौरान आधिकारिक आंकड़े जारी करते हुए बताया था कि उस हड़ताल में पीजीआई के लगभग 80 प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टर शामिल नहीं हुए थे। उन्हें आपातकालीन ड्यूटी पर रखा गया था। उसे दौरान ही पीजीआई में अनुबंध पर तैनात हजारों कर्मचारियों के हड़ताल में थे। ऐसी स्थिति में रेजिडेंट डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने का निर्णय लेने के बजाय प्रशासन के साथ खड़े होकर मरीजों के देखभाल के लिए समर्थन देना चाहिए था जबकि हड़ताल न करने के लिए पीजीआई प्रशासन ने उनसे बार-बार अपील की थी। अधिकांश रेजिडेंट डॉक्टरों के शामिल न होने के कारण हड़ताल विफल हो गई थी।

 
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