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डेढ़ साल से नहीं बना 250 बेड का हॉस्पिटल, बजट की कमी
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 17 May 2016 10:37 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
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चंडीगढ़ पीजीआई में बन रहे 250 बेड के हास्पिटल का निर्माण कार्य बजट की कमी के चलते पिछले डेढ़ साल से ठप पड़ा है। काम रुकने से हास्पिटल का निर्माण कार्य दो साल पीछे चला गया है। निर्माण कार्य करने वाली एजेंसी सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (सीपीडब्ल्यूडी) का कहना है कि चार मंजिला बिल्डिंग का निर्माण हो चुका है। अब लिफ्ट, एयरकंडीशन, आक्सीजन, फर्नीचर सहित एक दर्जन कामों की स्वीकृति मांगी थी। एक साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है। पीजीआई के अधिकारिक सूत्रों ने दावा किया है कि फंड की कमी के कारण कामों को मंजूरी नहीं दी गई है। आज होने वाली स्टैडिंग फाइनेंस कमेटी की मीटिंग में भी बजट की मंजूरी का मुद्दा उठेगा।
डेढ़ साल पिछड़ने से क्या फर्क पड़ेगा
विशेषज्ञ बताते हैं कि निर्माण कार्य में डेढ़ साल पिछड़ने से हास्पिटल की निर्माण राशि में इजाफा होगा। उसके लिए बजट पास करवाने में काफी मुश्किले आएंगी। 250 बेड में से 80 प्राइवेट रूम, 40 बेड ईएनटी के लिए, 25 बेड लीवर और 25 बेड इंडोक्राइनोलाजी के लिए बनने थे। यदि इस हास्पिटल का निर्माण जल्द से जल्द होगा तो उन मरीजों के लिए फायदेमंद होगा, जिन्हें बेड नहीं मिलने से इलाज के लिए वापस लौटना पड़ता है। अभी रूम नहीं मिलने से मरीजों की सर्जरी टालनी पड़ती है या फिर उन्हें प्राइवेट में इलाज करवाना पड़ रहा है। इससे मरीजों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
कमेटी को अनुमानित लागत 182 करोड़ रुपये बताई
हाल ही में संसद के सत्र में पेश की गई पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि 250 बेड हास्पिटल की अनुमानित लागत 182 करोड़ रुपये है। कमेटी ने अनुमानित लागत की राशि को पास कर काम करने वाले एजेंसी को सीपीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्य करने के निर्देश दिए थे। पीजीआई की ओर से कमेटी को बताया गया था कि चौथी मंजिल का काम अंतिम दौर पर हैं। एलिवेटर्स और 66केवी सबस्टेशन को बनाने के लिए काम अंडर प्रासेस है।
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देरी से काम होने का एक कारण यह भी है
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पीजीआई में निर्माणाधीन प्रोजेक्टों की रफ्तार थमने के पीछे एक वजह अनुभवहीन अधिकारियों की नियुक्ति होना है। मौजूदा एसएचई का बैकग्राउंड सिविल नहीं है, जबकि जब से पीजीआई का निर्माण हुआ है, तब से नियुक्त होने वाले एसएचई का बैकग्राउंड सिविल होता था, क्योंकि पीजीआई में होने वाले 90 प्रतिशत काम सिविल से जुड़े होते हैं। अनुभवहीन अधिकारियों के होने से पीजीआई के काम रुक रहे हैं।
पीजीआई ने साधी चुप्पी
इस बारे में जब पीजीआई से पूछा गया तो तो उन्होंने सवालों पर चुप्पी साध ली है। पीजीआई की ओर से इस मुद्दे पर कोई भी जवाब नहीं दिया गया।
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डेढ़ साल पिछड़ने से क्या फर्क पड़ेगा
विशेषज्ञ बताते हैं कि निर्माण कार्य में डेढ़ साल पिछड़ने से हास्पिटल की निर्माण राशि में इजाफा होगा। उसके लिए बजट पास करवाने में काफी मुश्किले आएंगी। 250 बेड में से 80 प्राइवेट रूम, 40 बेड ईएनटी के लिए, 25 बेड लीवर और 25 बेड इंडोक्राइनोलाजी के लिए बनने थे। यदि इस हास्पिटल का निर्माण जल्द से जल्द होगा तो उन मरीजों के लिए फायदेमंद होगा, जिन्हें बेड नहीं मिलने से इलाज के लिए वापस लौटना पड़ता है। अभी रूम नहीं मिलने से मरीजों की सर्जरी टालनी पड़ती है या फिर उन्हें प्राइवेट में इलाज करवाना पड़ रहा है। इससे मरीजों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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कमेटी को अनुमानित लागत 182 करोड़ रुपये बताई
हाल ही में संसद के सत्र में पेश की गई पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि 250 बेड हास्पिटल की अनुमानित लागत 182 करोड़ रुपये है। कमेटी ने अनुमानित लागत की राशि को पास कर काम करने वाले एजेंसी को सीपीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्य करने के निर्देश दिए थे। पीजीआई की ओर से कमेटी को बताया गया था कि चौथी मंजिल का काम अंतिम दौर पर हैं। एलिवेटर्स और 66केवी सबस्टेशन को बनाने के लिए काम अंडर प्रासेस है।
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देरी से काम होने का एक कारण यह भी है
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पीजीआई में निर्माणाधीन प्रोजेक्टों की रफ्तार थमने के पीछे एक वजह अनुभवहीन अधिकारियों की नियुक्ति होना है। मौजूदा एसएचई का बैकग्राउंड सिविल नहीं है, जबकि जब से पीजीआई का निर्माण हुआ है, तब से नियुक्त होने वाले एसएचई का बैकग्राउंड सिविल होता था, क्योंकि पीजीआई में होने वाले 90 प्रतिशत काम सिविल से जुड़े होते हैं। अनुभवहीन अधिकारियों के होने से पीजीआई के काम रुक रहे हैं।
पीजीआई ने साधी चुप्पी
इस बारे में जब पीजीआई से पूछा गया तो तो उन्होंने सवालों पर चुप्पी साध ली है। पीजीआई की ओर से इस मुद्दे पर कोई भी जवाब नहीं दिया गया।