इलाज पर भी महंगाई की मार: चंडीगढ़ पीजीआई ने बढ़ाया जांच शुल्क, 10 गुना बढ़ोतरी से मरीज परेशान
जांच शुल्क बढ़ाने के मामले में पीजीआई प्रशासन की दलील हैरान करने वाली है। पीजीआई प्रवक्ता प्रो. अशोक कुमार के अनुसार, इम्युनोपैथालॉजी की जांच दरों में वृद्धि नहीं की गई है। सिर्फ जांच का नाम बदला गया है।
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चंडीगढ़ पीजीआई ने गुपचुप तरीके से जांच शुल्क दस गुना तक बढ़ा दिया है। उन विभागों में जांच के शुल्क सबसे ज्यादा बढ़ाए गए हैं, जहां मरीजों की संख्या ज्यादा है। सस्ते इलाज के लिए दूरदराज से पीजीआई आने वाले मरीजों को जांच के लिए अब कई गुना अधिक शुल्क अदा करना पड़ रहा है।
पीजीआई प्रशासन ने 22 जनवरी 2022 को एक आदेश जारी कर तीन प्रमुख विभागों में जांच शुल्क की दरों में बढ़ोतरी की सूचना वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। इनमें इम्युनोपैथालॉजी, फार्मोकोलॉजी और हिस्टोपैथालॉजी विभाग शामिल हैं। हालांकि पीजीआई की ओर से जांच शुल्क बढ़ाने की वजह नहीं बताई गई है।
बता दें कि रेफरल सेंटर होने के चलते पीजीआई में कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। हिस्टोपैथोलॉजी से जुड़ी बायोप्सी जांच के लिए सबसे ज्यादा नमूने दिए जाते हैं जबकि नशा उन्मूलन केंद्र में आने वाले मरीजों को फार्मोकोलॉजी से संबंधित जांचें कराई जातीं हैं। इन दोनों विभागों में जांच का शुल्क दो से 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है।
बढ़ी कीमतों पर पीजीआई की दलील
जांच शुल्क बढ़ाने के मामले में पीजीआई प्रशासन की दलील हैरान करने वाली है। पीजीआई प्रवक्ता प्रो. अशोक कुमार के अनुसार, इम्युनोपैथालॉजी की जांच दरों में वृद्धि नहीं की गई है। सिर्फ जांच का नाम बदला गया है। वहीं हिस्टोपैथालॉजी की जांच दर बढ़ाने को लेकर पीजीआई का कहना है कि उसका निर्धारण वास्तविक लागत के अनुसार किया गया है। लाभ-हानि का मानक वहां लागू नहीं होता जबकि पीजीआई की वेबसाइट पर दी गई जांच सूची में बढ़ी हुई दर को दर्शाया जा रहा है। सिर्फ जांच कोड की जगह न्यू कोड लिख दिया गया है।
पैसों की कमी नहीं तो शुल्क क्यों बढ़ाया, बताए पीजीआई
पीजीआई प्रशासन तो हर बार बजट पास होने पर दावा करता है कि उसे पैसों की कोई कमी नहीं। ऐसे में अचानक जांच की दरों में इतना इजाफा क्यों किया गया, इसका जवाब भी देना चाहिए। -गुरुदेव यादव, मलोया
तो पीजीआई को सरकार से मदद मांगनी चाहिए
सस्ती दर पर इलाज के लिए मरीज आसपास के प्रदेशों से पीजीआई आते हैं। मरीजों पर अचानक इलाज व जांच का भार बढ़ाना गलत है। अगर पैसों की कमी थी तो पीजीआई को सरकार से मदद मांगनी चाहिए थी। -शिवाकांत पाण्डेय, धनास
पीजीआई में जनता को सस्ती दर पर मिले इलाज
जनता को सस्ती दर पर इलाज मिलना चाहिए। अगर पीजीआई ने अचानकजांच शुल्क में इजाफा किया है तो यह भी बताना होगा कि उससे प्राप्त पैसे को मरीजों के किस हित में लगाया जा रहा है। -प्रदीप कुमार, हल्लोमाजरा
कर्मचारियों की मांग शाम छह बजे तक लिए जाएं नमूने
ओपीडी में आने वाले मरीजों की समस्या को ध्यान में रखते हुए पीजीआई कर्मचारी संघ गैर संकाय ने नमूने लेने की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। संघ ने पीजीआई के प्रभारी निदेशक प्रो. सुरजीत सिंह को पत्र भी लिखा है। इसमें बताया गया है कि एम्स दिल्ली में नमूना लेने की समय सीमा को बढ़ाकर शाम 6 बजे तक कर दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि दूरदराज से आने वाले मरीजों को जांच के लिए दोबारा न आना पड़े। वहीं पीजीआई में दोपहर एक बजे के बाद नमूना नहीं लिया जाता जबकि ओपीडी दोपहर 3 बजे तक चलती है। ऐसे में अगर नमूना लेने की समयावधि बढ़ा दी जाए तो मरीजों को राहत मिलेगी।