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चंडीगढ़: महामारी में भी नहीं रुके अंग प्रत्यारोपण, पीजीआई ने 37 लोगों को दिया नया जीवन 

Thu, 08 Jul 2021 11:45 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़  Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 08 Jul 2021 11:45 AM IST
सार

पीजीआई के डॉक्टरों ने अप्रैल 2020 से अब तक किडनी प्रत्यारोपण कर 34 मरीजों की जान बचाई। वहीं दूसरे शहरों के तीन मरीजों को भी अंग भेजे गए।
 

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Chandigarh PGI give Life to 37 Patients by Organ Transplantation During Covid
पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कोरोना महामारी के संकट भरे दौर में भी पीजीआई ने अंग प्रत्यारोपण कर 37 मरीजों को नया जीवन दिया। संक्रमण के खतरे के बीच पीजीआई के डॉक्टरों ने अंगदाताओं के परिवार की मदद से जरूरतमंद मरीजों का ऑपरेशन कर उनकी जान बचाई। पीजीआई में अप्रैल 2020 से अब तक जिन 37 मरीजों को जीवनदान मिला, उनमें से कई की हालत गंभीर थी। 37 में से 34 मरीजों में किडनी प्रत्यारोपित कर उनकी जान बचाई गई। वहीं, ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अन्य शहरों में तीन जरूरतमंद मरीजों में सफलतापूर्वक लीवर प्रत्यारोपित कराया गया।
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कोरोना काल में किस अंग के कितने प्रत्यारोपण
अंग                                       प्रत्यारोपण
किडनी                                      34
हृदय                                          1
किडनी और पैंक्रियाज एक साथ      2
(आंकडे़ अप्रैल 2020 से अब तक के हैं)

अंग प्रत्यारोपण से 13 साल के किशोर को दिया नया जीवन

केस- 1
पंजाब निवासी कीरत सिंह (बदला हुआ नाम) की महामारी के दौरान दूसरी बार किडनी प्रत्यारोपित की गई। वर्ष 2013 में उनकी किडनी फेल हो गई थी। 3 साल तक डायलिसिस कराने के बाद पहली बार 2016 में उनमें किडनी प्रत्यारोपित की गई। इसके बाद वर्ष 2019 में उनकी किडनी दोबारा फेल हो गई और वे पुन: डायलिसिस पर आ गए। कोविड काल में पीजीआई में दोबारा किडनी प्रत्यारोपण कर उनकी जान बचाई गई।

केस- 2
चंडीगढ़ निवासी 13 वर्षीय एक किशोर को कोरोना काल में अंगदान के जरिए हृदय मिला है, जिसे पीजीआई के डॉक्टरों ने उस बच्चे में प्रत्यारोपित कर उसे एक नया जीवन प्रदान किया। कोविड की पहली लहर के दौरान जुलाई 2020 में पीजीआई में यह प्रत्यारोपण किया गया। पीजीआई में यह अब तक का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण का मामला है।

मौत के बाद इन अंगों को कर सकते हैं दान
डॉक्टरों के मुताबिक, मौत के बाद अंगदान करके एक व्यक्ति कम से कम आठ लोगों की जान बचा सकता है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग दान किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति अनिवार्य है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैंक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, गर्भाशय, अंडाशय, चेहरा, आंखें, मिडिल ईयर बोन, त्वचा, हड्डी, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कॉर्निया, हार्ट वाल्व, नर्वस, अंगुलियां और अंगूठे दान किए जा सकते हैं।

ये लोग नहीं कर सकते अंगदान
जिसे कैंसर, डायबिटीज जैसी घातक बीमारी नहीं है, वह व्यक्ति अंगदान कर सकता है। कैंसर और एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, सेप्सिस या इन्ट्रावेनस दवाओं का इस्तेमाल करने वाले अंगदान नहीं कर सकते।
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जीवित रहते हुए दान किए जाने वाले अंग

यकृत -  यकृत (लीवर) में पुनर्निर्माण की क्षमता होती है। यदि यकृत का एक हिस्सा दान कर दिया जाए तो वह फिर से वृद्धि या उसी स्थिति को प्राप्त कर लेता है।
गुर्दा - मनुष्य एक गुर्दे (किडनी) से भी जीवित रह सकता है, इसलिए दूसरे गुर्दे को दान किया जा सकता है।
फेफड़े - फेफड़े के एक भाग को दान किया जा सकता है। यह यकृत के विपरीत हैं, क्योंकि फेफड़ों में पुनर्निर्माण की क्षमता नहीं होती है।
अग्न्याशय - अग्न्याशय का एक भाग दान किया जा सकता है।
आंत -  आंत का एक हिस्सा दान किया जा सकता है।

पीजीआई में 2015 से अब तक कितना अंगदान
वर्ष                       अंगदान
2015                       70
2016                       64
2017                      104
2018                       82
2019                       69
2020                   मार्च से अब तक 37

कोरोना काल में भी पीजीआई में अंगदान की प्रक्रिया संचालित होती रही। यह हमारे कुशल विशेषज्ञों के बेहतर प्रबंधन व अंगदाता परिवारों के सहयोग का ही नतीजा है। पीजीआई का यही प्रयास है कि कोविड के साथ ही नॉन कोविड मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधा बिना बाधा के उपलब्ध होती रहे।  -प्रो. जगतराम, निदेशक, पीजीआई

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