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एक माह से बंद PGI की इमरजेंसी ओटी, नहीं हो पाते ऑपरेशन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 07 Mar 2017 09:25 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
- फोटो : DEMO Pics
पीजीआई इमरजेंसी की ओटी नंबर-7 पिछले एक महीने से बंद पड़ी है। इससे ऑपरेशन भी टाले जा रहे हैं। हालांकि कुछ ऑपरेशन दूसरे ओटी में ट्रांसफर किए जा रहे हैं, लेकिन इससे मरीजों के ऑपरेशन में देरी से हो रहे हैं। ओटी नंबर-7 के बंद होने का कारण लाइटें खराब होना बताया जा रहा है। इस संबंध में पीजीआई का कहना है कि जिस कंपनी की लाइट थी, अब वो बाहर से सामान आयात कर रही है। इसलिए इसे ठीक होने में वक्त लग रहा है।
ऑपरेशन के दौरान निकल गया था लाइट का डोम
सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि आठ फरवरी को ओटी नंबर-7 में जनरल सर्जरी के एक पेशेंट का ऑपरेशन चल रहा था। तभी लाइट का डोम निकल गया। इससे ऑपरेशन मुश्किल में पड़ गया। ओटी में रखी स्टैंड लाइट से ऑपरेशन को पूरा किया गया और उसके बाद ओटी में ताला लगा दिया गया है। बता दें कि पहले भी लाइट खराब हुई थी, लेकिन उस दौरान अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इस हादसे से मरीज की जान को खतरा भी हो सकता था।
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ऑपरेशन के दौरान निकल गया था लाइट का डोम
सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि आठ फरवरी को ओटी नंबर-7 में जनरल सर्जरी के एक पेशेंट का ऑपरेशन चल रहा था। तभी लाइट का डोम निकल गया। इससे ऑपरेशन मुश्किल में पड़ गया। ओटी में रखी स्टैंड लाइट से ऑपरेशन को पूरा किया गया और उसके बाद ओटी में ताला लगा दिया गया है। बता दें कि पहले भी लाइट खराब हुई थी, लेकिन उस दौरान अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इस हादसे से मरीज की जान को खतरा भी हो सकता था।
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मरीजों के ऑपरेशन में हो रही देरी
तीन साल पहले किया था कंडम घोषित
पीजीआई में इमरजेंसी विभाग की लाइटों का रख-रखाव हमेशा से एक मुद्दा रहा है। इसका खामियाजा डॉक्टर और कर्मचारियों को उठाना पड़ता है। अक्सर लाइटें खराब होने की शिकायत रहती है, लेकिन इसे पीजीआई प्रशासन गंभीरता से नहीं लेता है। बताया जा रहा है कि दो साल पहले ही ओटी नंबर-4 और ओटी नंबर-7 में लाइटें लगाई गई थीं। ओटी नंबर-4 की भी लाइट खराब है। उसे भी पकड़कर ऑपरेशन करना पड़ता है। इसी तरह से ओटी नंबर-2, 3 और 5 की लाइटें भी कंडम घोषित की जा चुकी हैं। पीजीआई के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने उन्हें दो से तीन साल पहले कंडम घोषित कर दिया था। इस बारे में सभी सर्जन, एचओडी और स्टाफ को पता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें ठीक नहीं किया जा रहा है।
रोज होते थे पांच से छह ऑपरेशन
इमरजेंसी ओटी नंबर-7 में रोजाना पांच से छह ऑपरेशन होते थे। इसमें प्लास्टिक सर्जरी, ईएनटी और डेंटल के ऑपरेशन होते थे। अब ये ऑपरेशन ओटी नंबर-5 में ट्रांसफर किए जा रहे हैं। इससे ओटी नंबर-5 पर लोड बढ़ गया है। इससे एक ही दिन में दोनों ओटी के सभी ऑपरेशन नहीं हो पाते हैं। साथ ही ऑपरेशन टलने से मरीजों की भी परेशानी बढ़ गई है।
लाइटें खराब होने के कारण ओटी को बंद कर दिया गया है। लाइट से संबंधित सामान को कंपनी को बाहर से आयात कर रही है। उसके बाद ही लाइट ठीक हो पाने की स्थिति में होगी।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई
पीजीआई में इमरजेंसी विभाग की लाइटों का रख-रखाव हमेशा से एक मुद्दा रहा है। इसका खामियाजा डॉक्टर और कर्मचारियों को उठाना पड़ता है। अक्सर लाइटें खराब होने की शिकायत रहती है, लेकिन इसे पीजीआई प्रशासन गंभीरता से नहीं लेता है। बताया जा रहा है कि दो साल पहले ही ओटी नंबर-4 और ओटी नंबर-7 में लाइटें लगाई गई थीं। ओटी नंबर-4 की भी लाइट खराब है। उसे भी पकड़कर ऑपरेशन करना पड़ता है। इसी तरह से ओटी नंबर-2, 3 और 5 की लाइटें भी कंडम घोषित की जा चुकी हैं। पीजीआई के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने उन्हें दो से तीन साल पहले कंडम घोषित कर दिया था। इस बारे में सभी सर्जन, एचओडी और स्टाफ को पता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें ठीक नहीं किया जा रहा है।
रोज होते थे पांच से छह ऑपरेशन
इमरजेंसी ओटी नंबर-7 में रोजाना पांच से छह ऑपरेशन होते थे। इसमें प्लास्टिक सर्जरी, ईएनटी और डेंटल के ऑपरेशन होते थे। अब ये ऑपरेशन ओटी नंबर-5 में ट्रांसफर किए जा रहे हैं। इससे ओटी नंबर-5 पर लोड बढ़ गया है। इससे एक ही दिन में दोनों ओटी के सभी ऑपरेशन नहीं हो पाते हैं। साथ ही ऑपरेशन टलने से मरीजों की भी परेशानी बढ़ गई है।
लाइटें खराब होने के कारण ओटी को बंद कर दिया गया है। लाइट से संबंधित सामान को कंपनी को बाहर से आयात कर रही है। उसके बाद ही लाइट ठीक हो पाने की स्थिति में होगी।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई