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अमर उजाला संवाद में बोले चंडीगढ़वासी- अफसर और लोग नहीं जागे तो एनसीआर जैसा होगा हाल

Mon, 05 Aug 2019 12:02 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 05 Aug 2019 12:02 PM IST
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chandigarh people speaks on conditions off city in amar ujala samwad
अमर उजाला संवाद - फोटो : अमर उजाला
आज से एक दशक पहले तक रहने के लिहाज से चंडीगढ़ देश का सबसे मुफीद शहर माना जाता था। हरियाली से लबरेज खुली सड़कें थीं। न चोरी का डर था और न ही ट्रैफिक का शोर। सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त थी। दूर-दूर तक अतिक्रमण का नाम नहीं था। व्यापारी चैन की नींद सोते थे। सेक्टर हो या गांव, चारों तरफ खुशहाली थी। खुले आंगन में लोग सोते थे।
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अब अचानक इस शहर को क्या हो गया? हवा का रुख ही बदल गया। ऐसा लगता है कि मानो इस शहर को किसी की नजर लग गई। अतिक्रमण ने सड़कों का गला घोंट दिया है। वेंडर्स ने नियमों को तार-तार कर दिया। यातायात व्यवस्था भी बेपटरी हो गई है। चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ खड़े हो रहे हैं। खुले आसमान के नीचे सोने वाले लोग घरों में कुंडी लगाकर दहशत में जीने के लिए मजबूर हैं।
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इन सबके लिए आखिर जिम्मेदार है तो कौन। इसी मुद्दे पर रविवार को अमर उजाला कार्यालय में शहर के नामचीन लोगों से संवाद किया गया। इन सभी ने शहर को करीब से देखा है इसलिए व्यवस्था पर चोट करते हुए शहर की पीड़ा बताई। कहा, इस बदहाली के लिए न केवल अफसर बल्कि हम सब जिम्मेदार हैं। अगर अब नहीं जागे तो चंडीगढ़ को एनसीआर बनते देर नहीं लगेगी।
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गंदगी बनी समस्या, मॉनिटरिंग जरूरी
सेक्टर-15 निवासी चंडीगढ़ पंचकूला डायमंड क्लब 321 एटू की निदेशक कमला कहती हैं कि वह 1971 में यहां आई थी। उस समय सड़कें खाली थीं। मक्खियां नजर नहीं आती थीं। आंगन में सोते थे। चोरियां भी नहीं होती थीं। खुलापन महसूस होता था लेकिन आज जनसंख्या बढ़ी तो वाहन भी बढ़ गए। गंदगी बड़ी समस्या हो गई। कूड़ा उठाने वाले पूरा काम नहीं कर रहे हैं।
समाधान : नगर निगम सफाई को लेकर मॉनीटरिंग करे। जब ठीक से चेकिंग होगी तो सफाई व्यवस्था में सुधार होगा।

लोगों से संवाद तोड़ दिया गया
पूर्व मेयर एवं भाजपा पार्षद देवेश मोदगिल कहते हैं कि संवैधानिक रूप से किसी व्यक्ति को कहीं भी जाने या काम करने से नहीं रोका जा सकता। यहां भी लोग आए और जनसंख्या बढ़ी। इंफ्रास्ट्रक्चर कम हुआ। उनकी व्यवस्था के लिए हमने काम किया। वेंडर्स की बायोमीट्रिक आदि की। पिछले सात महीनों में गतिरोध पैदा हुआ। लोगों से संवाद तोड़ दिया गया।
समाधान : माइंड सेट को बदलना होगा। लोगों से आपसी संवाद करना होगा। समस्या सुननी होगी और समाधान करने होंगे।

वेंडर्स से बढ़ रही समस्याएं
व्यापार मंडल महासचिव संजीव चड्ढा ने बताया कि वेंडर्स की संख्या छह हजार है लेकिन बैठ 25 हजार रहे हैं। दुकानदारों के बाहर इनके बैठने से मार्केट की वैल्यू खराब हो रही है। वेंडर्स का चालान नहीं हो रहा है, दुकानदारों का काटा जा रहा है। इन्हें रेगुलेट करना चाहिए था। वेंडर्स की गलती के कारण दुकानदारों को परेशानी हो रही है। साथ ही शहर में गाड़ियां बढ़ी हैं लेकिन पार्किंग कम हैं।
समाधान : यूटी कैडर बनाकर अफसर तैनात किए जाएं और जागरुकता पर काम हो। वेंडर्स की मॉनिटरिंग की जाए।

बढ़ रहा है चंडीगढ़ में नशा
मनोनीत पार्षद शिप्रा बंसल कहती हैं कि यहां क्राइम बढ़ रहा है। गर्ल्स सेफ नहीं हैं। कॉलेजों की बाहर इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पंजाब में नशा अधिक होने की बात कहते हैं लेकिन इसमें अब चंडीगढ़ भी पीछे नहीं रहा। कालोनियों में बच्चे ड्रग ले रहे हैं। ट्रैफिक कंट्रोल नहीं हो पा रहा है। लाइटें लगा दी गईं लेकिन रोकने वाला कोई नहीं है।
समाधान : नशे के खिलाफ अभियान चले। प्रशासन व निगम तालमेल से काम करें। फाइलें निगम से जाएं तो प्रशासन शीघ्र कार्रवाई करे।  

पेड़ों को बचाना जरूरी
पर्यावरणविद राहुल महाजन कहते हैं कि शहर हरियाली ने लिए जाना जाता रहा है। हरियाली को बचाना सभी का काम है। इस समय पेड़ों पर दीमक लगी हुई है। पेड़ों को बदलने के लिए 6.80 लाख रुपये का काम दिया गया है लेकिन इसे टुकड़ों में करवाए जाने की बात की जा रही है जो ठीक नहीं है। अगर ऐसा करना है तो फिर इतने पैसे लगाने की क्या जरूरत है। एमसी का काम पैसा कमाना ही नहीं, इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
समाधान : शहर के पेड़ों को दीमक से बचाएं। साथ ही सभी लोगों की इसमें भागीदारी हो। निगम भी अपना काम करे।

पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन की समस्या बढ़ी
सीएचबी हाउसिंग वेलफेयर एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट नरेश कोहली कहते हैं कि शहर में शहर में वाहनों की संख्या में वृद्धि होने से ट्रैफिक की समस्या बढ़ती जा रही है। एक्सीडेंट हो रहे हैं। प्रदूषण बढ़ रहा है। पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को इसकी दिक्कत हो रही है। यह लगातार बढ़ती रही तो और समस्याएं पैदा होंगी। इसके लिए सोचना होगा।
समाधान : मेट्रो व मोनो रेल में से जो भी संभव हो वह शुरू करनी होगी। ट्राइसिटी को इसका लाभ दिया जाए।

वेंडर्स की जगह दुकानदारों के चालान हो रहे
व्यापारी सुशील बंसल कहते हैं कि सेक्टर 17 में वेंडर पॉलीथिन का प्रयोग कर रहे हैं लेकिन बदनाम दुकानदार हो रहे हैं। उनके कारण दुकानदारों पर कार्रवाई हो रही है। पुलिस-कारपोरेशन एक-दूसरे पर टाल देते हैं। स्कूटर व बाइक भी यह ओपन में चल रहे हैं। यही नहीं जो लाइसेंस इन्हें जिस चीज की बिक्री के लिए दिया गया है वह सामान यह नहीं बेचकर दूसरा बेच रहे हैं। बच्चों को बैठाकर गाड़ियों में घुमाते हैं जो अनसेफ हैं।
समाधान : वेंडर्स की मॉनीटरिंग हो और कार्रवाई भी। लाइसेंस जिस चीज के लिए दिया गया है वही सामान बिके।

शहर में सुरक्षित नहीं रहे बुजुर्ग
सामाजिक कार्यकर्ता रवि रावत कहते हैं कि शहर में क्राइम लगातार बढ़ रहा है। बुजुर्ग सुरक्षित नहीं हैं। आज ही सेक्टर 40 में मर्डर हुआ है। स्नैचिंग आम बात हो गई है। दो से तीन दिन में किसी न किसी का मर्डर हो रहा है। लोगों में दहशत है। घरों के बाहर बैठने के लिए भी सोचना पड़ रहा है। लोगों के लिए यह समस्या बढ़ रही है।
समाधान : पुलिस को अपनी ताकत कर्मचारियों की तैनाती करके बढ़ानी चाहिए। जनसंख्या के मुताबिक सुरक्षा कर्मी होने चाहिए।

पीजी के लिए पॉलिसी नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता प्रिंस भंडूला कहते हैं कि शहर में बड़े पैमाने पर पेइंग गेस्ट का कारोबार किया जा रहा है। छोटे-छोटे मकानों में इतने लोग रखे जा रहे हैं। यह रात को मनमर्जी के मुताबिक घूमते हैं। इसके कारण क्राइम भी हो रहा है। मकान मालिक किराए पर देकर मकान भूल जाते हैं। उसकी मॉनिटरिंग नहीं है। कोई पॉलिसी नहीं है।
समाधान : पेइंग गेस्ट के लिए पॉलिसी बनाई जानी चाहिए।

कलेक्टर रेट जब चाहे तब बढ़ रहे
प्रापर्टी कंसल्टेंट एसोसिएशन के महासचिव गुरनाम सिंह कहते हैं कि पिछले चार साल में वेंडर्स की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई। पैसे देकर लाइसेंस लिए जा रहे हैं। कलेक्टर रेट जब चाहे बढ़ रहे हैं और जब चाहे कम हो रहे हैं। बाकी स्टेट में क्या चल रहा है इस पर ध्यान अधिकारी नहीं देते हैं। इससे लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। जनसंख्या बढ़ने से भी दिक्कतें खड़ी हुई हैं।
समाधान : सांसद व नगर निगम को कार्रवाई करने के लिए पावर मिलनी चाहिए। साथ ही जागरुकता बढ़ानी चाहिए।

यूटी कैडर बनना चाहिए
प्रापर्टी कंसल्टेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलजीत सिंह मिंटो कहते हैं कि अधिकारी यहां आते हैं और चले जाते हैं। यूटी का अपना कोई कैडर नहीं है। इसी कारण अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह वहन नहीं करते हैं। यहां जनता की कोई सुनने को तैयार नहीं है। जिम्मेदारी किसी की हो तो वह जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते।
समाधान : यूटी कैडर अलग से बने ताकि जनता की समस्या यहां सुनने वाले अधिकारी हों और अपनी जिम्मेदारी समझें।

शहर में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं
यूटी कर्मचारी यूनियन लीडर बलविंदर कहते हैं कि जलालाबाद से वह आए हैं तो देखा कि वहां सब चीजें व्यवस्थित हैं। पंजाब में ट्रैफिक लाइट पर पुलिस खड़ी है। संचालन ठीक हो रहा है लेकिन यहां यातायात व्यवस्थित नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा सफाई की पूरी व्यवस्था नहीं है। लोग आते हैं लेकिन काम नहीं कर रहे हैं। खुद ही सफाई करनी पड़ रही है।
समाधान : सफाई व्यवस्था की निगम ठीक से मॉनीटरिंग करे। कर्मियों को समझाया जाए कि वह काम करें अन्यथा कार्रवाई होगी।

कक्षा आठ तक फेल न करने की पॉलिसी ठीक नहीं
यूटी इंप्लाइज कर्मचारी यूनियन के महासचिव डॉ. धर्मेंद्र कहते हैं कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कक्षा आठ तक बच्चों को फेल न करने की पॉलिसी से बच्चे बिगड़ रहे हैं। उन्हें डर नहीं रहा है कि पढ़ाई करेंगे तो ही पास होंगे। इसके कारण कुछ बच्चे नशे की तरफ जा रहे हैं। इंक्रोचमेंट यहां बढ़ रहा है। यातायात व्यवस्था को लेकर लोग जागरुक नहीं हैं।
समाधान : कक्षा आठ तक के बच्चों को फेल न करने की पॉलिसी बदली जाए। यूटी का अपना कैडर हो और रोजगार सृजित हों।

जरूरत के हिसाब सें मिलें सुविधाएं
युवा उद्यमी कौशल कहते हैं कि शहर में जो भी सुविधाएं दी गई हैं उनका लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है। अंडरपास ऐसी जगह बनाया गया है जहां लोग कम गुजरते हैं। इसी तरह मल्टी पार्किंग कुछ जगह बनाई गई हैं। वहां वाहन अधिक पहुंचने चाहिए लेकिन वाहन ही नहीं खड़े हो रहे हैं। उनकी उपयोगिता पूरी सिद्ध नहीं हो रही है।
समाधान : पॉलिसी जो भी बनाई जाएं उसमें जनता की भागीदारी होनी चाहिए।

पूरी ट्राइसिटी में कुत्तों का आतंक
चंडीगढ़ पंचकूला डायमंड क्लब 321 एटू की सचिव सतवंत कौर पम्मी कहती हैं कि ट्राइसिटी में लावारिस कुत्ते बड़ी समस्या बन गए हैं। वह बच्चों से लेकर बड़ों तक को काट रहे हैं। इसके अलावा महिला सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। घर में हमेशा कुंडी लगाकर रखनी पड़ रही है। कीमती सामान घरों में नहीं रख पा रहे हैं। मेरे साथ स्नैचिंग हुई है। इससे और डर महसूस हो रहा है। सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
समाधान : विदेशी तर्ज पर सफाई के लिए गाड़ियां निगम मंगवाए। साथ ही सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं।

सरकारी स्कूलों का बुरा हाल
चंडीगढ़ पंचकूला डायमंड क्लब 321 एटू की ट्रेजरार आशा काहलो कहती हैं कि सरकारी स्कूलों की स्थिति अच्छी नहीं है। स्लम एरिया के स्कूल में हम गए थे। वहां बच्चे ठंड में जमीन पर बैठे मिले। ऐसे में वह ठंड से मुकाबला करेंगे या फिर पढ़ाई करेंगे। हमने वहां टाट पट्टी मुहैया कराई। साथ ही मक्खियां अधिक आती थी तो गर्मियों में पंखे आदि की व्यवस्था भी दी है।
समाधान : सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को बढ़ाना होगा। यदि बजट मिल रहा है तो उसके उपयोग को देखना होगा।
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