कैपिटल ऑफ पंजाब एक्ट-1952 में संशोधन का विरोध: एक सुर में बोले उद्योगपति- प्रशासन पहले नीड बेस चेंज को लागू करे, समस्याएं हो जाएंगी दूर
चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा कि उद्योगों का पलायन हो रहा है। पंचकूला और मोहाली ने उद्योगपतियों को काफी राहत दी है, चंडीगढ़ को भी उस तर्ज पर काम करना चाहिए। इंडस्ट्रियल एरिया की सभी संपत्तियां फ्री होल्ड होनी चाहिए।
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चंडीगढ़ में पिछले कई दिनों से कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट-1952 में संशोधन का विरोध हो रहा है। मामले को सुलझाने के लिए बुधवार को डीसी विनय प्रताप सिंह ने उद्योगपतियों, व्यापारियों और आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसमें करीब 40 लोग मौजूद रहे और सभी ने एक सुर में कहा कि प्रशासन पहले नीड बेस चेंज को लागू करे, इससे अधिकतर समस्याएं दूर हो जाएंगी।
यूटी गेस्ट में दोपहर 2.40 बजे पर शुरू हुई बैठक में नोटिस के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में भवन नियमों के उल्लंघन व दुरुपयोग पर 500 रुपये तक का जुर्माना लगता था। पिछले 70 वर्षों में बहुत कुछ बदल गया है। 500 रुपये की कीमत अब 1952 जैसी नहीं है इसलिए जुर्माने की राशि को बढ़ाने का प्रस्ताव बनाया गया है। 500 रुपये पर हर वर्ष 9 प्रतिशत की वृद्धि की गई तो यह राशि दो लाख बनी। ठीक इसी तरह पहले 20 रुपये प्रति दिन जुर्माने का प्रावधान था, उस पर भी आज तक हर साल 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद राशि 8000 रुपये बनी है। इसके बाद ही ये दाम प्रस्तावित किए गए हैं।
डीसी ने स्पष्ट किया कि जुर्माने के लिए दो लाख रुपये और 8000 रुपये (रोजाना के) अधिकतम हैं। ये जुर्माना सबसे बड़े और गंभीर उल्लंघन पर ही लगाया जाएगा। छोटी संपत्ति और उल्लंघन व दुरुपयोग के अनुसार ही जुर्माने की राशि तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि हर उल्लंघन पर दो लाख रुपये का ही जुर्माना लगेगा जो सच नहीं है। जुर्माने की राशि को हर साल पांच फीसदी बढ़ाने को लेकर डीसी ने कहा कि देश में महंगाई दर करीब आठ फीसदी है, इसलिए यह दर तय की गई है। हालांकि बैठक में मौजूद सभी लोगों ने इस दर को बहुत ज्यादा बताया।
2007 से लेकर अब तक जारी किए गए नोटिस किए जाएं रद्द
बैठक में मौजूद सभी लोगों ने एक-एक कर अपने सुझाव और आपत्तियां डीसी को बताईं। भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय टंडन ने कहा कि 2007 से लेकर अब तक जितने लोगों को नोटिस जारी हुए हैं, वो सभी असमंजस में है इसलिए वो सभी नोटिस रद्द किए जाएं। शहर के डिप्टी मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि नीड बेस्ड चेंज को लागू करना चाहिए। इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ के अध्यक्ष पंकज खन्ना ने कहा कि शहर के लिए बेसिक इंडस्ट्रियल पॉलिसी नहीं है। बड़े उद्योगों के लिए 2015 में एक पॉलिसी बनी लेकिन छोटे उद्योगों के लिए कुछ भी नहीं है। चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा कि उद्योगों का पलायन हो रहा है। पंचकूला और मोहाली ने उद्योगपतियों को काफी राहत दी है, चंडीगढ़ को भी उस तर्ज पर काम करना चाहिए। इंडस्ट्रियल एरिया की सभी संपत्तियां फ्री होल्ड होनी चाहिए।
कोई रिश्वत मांगे तो विजिलेंस को दें शिकायत : डीसी
बैठक में एक व्यापारी ने सरकारी दफ्तरों में घूसखोरी का मुद्दा उठाया तो डीसी ने कहा कि अगर उनके कार्यालय का कोई भी कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत उनसे करें। अगर वह नहीं मिलते तो सीधे विजिलेंस को शिकायत दें। डीसी ने कहा कि जो गलत करेगा, उसे सजा मिलेगी। डीसी ने कहा कि रिश्वत मांगने वाले को रंगेहाथ पकड़वाएं ताकि बाकियों को भी सबक मिले। कुछ उद्योगपतियों ने कहा कि जुर्माने की राशि को सरकार आमदनी का जरिया न समझे। व्यापारी और उद्योगपति कोरोना की वजह से पहले ही काफी परेशान हैं और उन्हें और तंग न किया जाए। इस पर डीसी ने स्पष्ट किया कि वो इसे कमाई नहीं समझते और वो खुद एक उद्योगपति के बेटे हैं।
व्यापारियों-उद्योगपतियों की मुख्य मांगें
- नीड बेस्ड चेंज लागू करें
- 2007 से लेकर अब तक जारी किए गए नोटिस तुरंत रद्द किए जाएं
- प्रशासन स्पष्ट करे कि किस इमारत के लिए क्या-क्या दुरुपयोग है और क्या-क्या उल्लंघन
- इंडस्ट्रियल एरिया की संपत्तियों को फ्री होल्ड करें
- पुराने लंबित मामलों को निपटाने के लिए शिविर लगाया जाए
- व्यावसायिक संपत्तियों के नियमों को आवासीय से अलग रखा जाए
- एफएआर को बढ़ाया जाए
- छोटे प्लॉट्स के लिए भी नीति लाई जाए