फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Chandigarh News in Hindi: Many loopholes in New Wardbandi in Chandigarh

चंडीगढ़ : एक में 11 हजार तो दूसरे वार्ड में 27 हजार मतदाता, सामने आने लगीं वार्डबंदी की खामियां

Sun, 13 Dec 2020 12:51 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 13 Dec 2020 12:51 PM IST
विज्ञापन
Chandigarh News in Hindi: Many loopholes in New Wardbandi in Chandigarh
चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : अमर उजाला

अगले वर्ष होने वाले नगर निगम चुनाव के लिए नई वार्डबंदी के मसौदे की खामियां सामने आने लगी हैं। इसमें सबसे बड़ी खामी वोटों के अंतर का है। पंजाब नगर निगम विधि के मुताबिक, हर वार्ड में वोटर की संख्या सामान होनी चाहिए। दस फीसदी वोटर ऊपर-नीचे हो सकते हैं, मगर इससे ज्यादा मान्य नहीं हैं। लेकिन नई वार्डबंदी में इसका ध्यान नहीं रखा गया है। दो वार्ड के बीच वोटरों का अंतर 16 हजार से ज्यादा है। 

विज्ञापन


वार्ड नंबर दो, जिसमें एक से दस सेक्टर शामिल हैं। वहां करीब 11 हजार वोटर हैं, जबकि वार्ड 15 में वोटरों की संख्या 27 हजार के आसपास है। इसी तरह से वार्ड एक में 13 हजार वोटर हैं, जबकि वार्ड 26 व 28 में करीब 24 हजार। इसका सबसे ज्यादा असर नगर निगम चुनाव के उम्मीदवार पर पड़ेगा।
विज्ञापन



नगर निगम चुनाव में हर उम्मीदवार को सामान चुनाव खर्च की स्वीकृति दी जाती है। लोकसभा चुनाव में वोटर संख्या के हिसाब से चुनावी खर्च की सीमा बढ़ जाती है लेकिन नगर निगम में ऐसा प्रावधान नहीं है। जाहिर है जिस वार्ड में वोट ज्यादा हैं, उसका क्षेत्रफल भी बड़ा होगा और चुनाव लड़ने में उतना ही खर्च करना पड़ेगा, जितना छोटी आबादी वाले वार्ड के उम्मीदवार को करना है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इसका असर वार्ड के विकास पर भी पड़ेगा। हालांकि चंडीगढ़ में वार्ड के मुताबिक पैसों का आवंटन नहीं होता है लेकिन जिसका इलाका बड़ा होगा, उसे अपने वार्ड के विकास के लिए ज्यादा जद्दोजहद करनी पड़ेगी। बजट के लिए जूझना पड़ेगा, इसीलिए एक्ट में प्रावधान भी दिया गया है कि हर वार्ड में वोटरों की संख्या सामान होनी चाहिए।

सेक्टर को अलग-अलग वार्ड में बांट दिया

अमूमन जब वार्डबंदी की जाती है तो इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वार्ड में पूरा सेक्टर शामिल हो। ऐसा नहीं होना चाहिए कि सेक्टर का आधा हिस्सा एक वार्ड में आता हो और दूसरा किसी दूसरे वार्ड में। नई वार्डबंदी में ऐसा ही हुआ है। सेक्टर-25 का एक हिस्सा वार्ड 13 में है, जबकि दूसरा हिस्सा वार्ड-16 में। सेक्टर-38 का भी एक हिस्सा वार्ड 25 में और दूसरा वार्ड 26 में है। इसी तरह से सेक्टर-45 का एक हिस्सा वार्ड 33 में है और दूसरा हिस्सा वार्ड 34 में। कुछ ऐसे भी वार्ड बनाए गए हैं, जहां सेक्टर के कुछ हिस्से को गांव के साथ जोड़ दिया गया है। इस पर लोग आपत्ति उठा रहे हैं।

इंदिरा और रेलवे कालोनी को एक वार्ड
वार्ड नंबर छह में रेलवे के साथ इंदिरा कालोनी को जोड़ दिया गया है जबकि इनके बीच की दूरी कम से कम डेढ़ से दो किमी की है। यह भी बात लोगों को हजम नहीं हो रही। कैसे एक पार्षद इन दोनों इलाकों को कवर कर पाएगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस बारे सोमवार को कुछ लोग आपत्ति दर्ज कराने के साथ कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं। 

साथ ही कुछ वार्ड में ऐसे नामों का उल्लेख किया गया है, जो फिलहाल अस्तित्व में ही नहीं है। वार्ड नंबर 32 में कालोनी नंबर पांच का जिक्र है, जबकि इसे काफी साल पहले ही खाली करवा लिया गया था। इसी तरह से पंडित कालोनी और नेहरू कालोनी भी अब नहीं हैं। वार्ड 19 का ततारपुर इलाके का नाम भी लोगों ने बहुत कम सुन रखा है।

नई वार्डबंदी में कई खामिया हैं। उन्हें उजागर करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने एक टीम बनाई है, जिसमें हरमेल केसरी, अमरजीत गुजराल व पवन शर्मा को शामिल किया गया है। कांग्रेस के पदाधिकारी के साथ यह लोग पेशे से वकील भी हैं। ये सभी बारीकी से मसौदे का अध्ययन कर रहे हैं। इनकी रिपोर्ट आने के बाद पार्टी आपत्ति दर्ज करवाएगी। - सुभाष चावला, पूर्व मेयर व कांग्रेस नेता चंडीगढ़।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed