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हाल बेहालः FD तोड़कर चंडीगढ़ नगर निगम चला रहा खर्च
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 14 Feb 2016 09:38 AM IST
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चंडीगढ़ नगर निगम की वित्तीय स्थिति लगातार पतली हो रही है। अगर यही हाल रहा तो अगले दो साल में निगम कंगाली की स्थिति में पहुंच सकता है। इसका बड़ा कारण यह है कि नगर निगम की बैंक में जमा 500 करोड़ की एफडी में लगातार सेंध लगती जा रही है। इसे लेकर न अधिकारी और न ही पार्षद चिंतित हैं।
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आय के साधन बढ़ाने की तरफ भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। नगर निगम की पिछले 5 साल में हर साल होने वाली कमाई 145 से 155 करोड़ के बीच है। प्रशासन की ओर से भी नगर निगम की ग्रांट में लगातार कटौती की जा रही है जिस कारण निगम को अपने कामों के लिए एफडी तुड़वानी पड़ रही है।
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शुक्रवार को नगर निगम की ओर से जो 1072 करोड़ रुपये का जो बजट पास किया गया, उसमें बताया गया है कि इस समय 173 करोड़ रुपये की एफडी रह गई है। यह 500 करोड़ की एफड़ी 10 साल पहले नगर निगम ने अपनी सरकारी प्रापर्टी बेचकर जमा की थी।
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नगर निगम ने पास बजट में से दावा किया गया है कि 547 करोड़ की ग्रांट प्लान बजट से प्रशासन से लेने का प्रयास किया जाएगा जिसकी उम्मीद कम है क्योंकि अब तक नगर निगम को प्लान बजट में 150 करोड़ से ज्यादा नहीं मिला है। ऐसे में एफडी पर बोझ पड़ना लाजमी है। ऐसे में भविष्य में विकास के बड़े प्रोजेक्ट प्रभावित होने की उम्मीद है।
ब्याज से कर्मचारियों का वेतन का भुगतान
तीन साल पहले तक नगर निगम को इस 500 करोड़ की एफडी से हर साल 40 करोड़ रुपये की कमाई ब्याज के तौर पर होती थी। इससे नगर निगम अपने सरकारी कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कर देता था। लेकिन अब यह एफडी में कटौती होती जा रही है।
वित्त एवं अनुबंध कमेटी के सदस्य सुभाष चावला ने शुक्रवार को जब बजट पास हो रहा था तो इसका जिक्र करते हुए कहा था कि ऐसा न हो कि चंडीगढ़ की हालत दिल्ली जैसी हो जाए। दिल्ली नगर निगम अपने सफाई कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहा है।
पानी सप्लाई से हर साल 59 करोड़ का घाटा
जनस्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस समय शहरवासियों को पानी की सप्लाई करने से हर साल 59 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है और इस घाटे को पूरा करने के लिए पानी के रेट बढ़ाने जरूरी हैं, लेकिन पार्षद इसके लिए तैयार नहीं है। जबकि प्रशासन ने भी दबाव बना रखा है। नगर निगम की ओर से हर साल लोगों के घर तक पानी पहुंचाने में 125.84 करोड़ रुपये की लागत आ रही है लेकिन कमाई आधी 65.45 करोड़ रुपये की हो रही है।
एफडी तुड़वाकर किया पंजाब को 98 करोड़ का भुगतान
नगर निगम ने पिछले साल कजौली वाटर वर्क्स के पांचवें और छठे फेज की दो नई लाइनों से पानी लेने के लिए 98 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान पंजाब को किया है। यह राशि एफड़ी तुड़वाकर की गई । अभी इस प्रोजेक्ट के लिए निगम को 250 करोड़ और चाहिए जिसका बजट में भी प्रावाधान रखा गया है ।हालाकि मेयर की ओर दावा किया गया कि यह राशि प्रशासन से अलग से नगर निगम को देगा अगर ऐसा न हुआ तो इसी साल बाकी बची एफड़ी तुड़वानी होगी।
चौथे दिल्ली फाइनेंस कमीशन की सिफारिश के अनुसार नगर निगम को 30 प्रतिशत ग्रांट मिलनी चाहिए। इस बार प्रशासन से ज्यादा से ज्यादा ग्रांट लेने का प्रयास किया जाएगा। नगर निगम पर वित्तीय संकट नहीं आने दिया जाएगा। पिछले सालों के मुकाबले में इस बार निगम को ज्यादा ग्रांट मिलेगी।
- अरुण सूद, मेयर
नगर निगम कमाई के साधन बढ़ाना तो दूर, पानी और टैक्स के डिफाल्टरों से रिकवरी भी नहीं ले पा रहा है। पानी की बर्बादी से लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है जिसे निगम रोक नहीं पा रहा है।
- डीएस संधू, मनोनीत पार्षद