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चंडीगढ़: नगर निगम रोता रहा फंड का रोना, चार साल से प्रशासन के पास पड़े हैं 17 करोड़ रुपये
Sat, 06 Nov 2021 03:16 PM IST
निवेदिता वर्मा
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 06 Nov 2021 03:16 PM IST
सार
पिछले सालों से मेयर से लेकर पार्षद व आयुक्त बजट देने के लिए प्रशासन के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन बजट के अतिरिक्त वर्ष 2017 से पड़े अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर बजट की याद किसी को नहीं आई।
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चंडीगढ़ नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हमेशा फंड की कमी का रोना रोने वाले चंडीगढ़ नगर निगम के अधिकारी वर्ष 2017 से प्रशासन के पास पड़े 17 करोड़ रुपये के विशेष फंड का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। चार वर्षों में निगम के अधिकारी इस पैसे के इस्तेमाल के लिए कोई योजना तक नहीं बना पाए। नई आयुक्त के आने के बाद अधिकारियों को अब इस फंड की याद आई है। बताया जा रहा है कि अब इसके इस्तेमाल के लिए निगम योजना बना रहा है।
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प्रशासन ने इस वर्ष नगर निगम के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया। कोरोना के चलते केंद्र से बजट में कटौती का आदेश आ गया। उसके बाद निगम ने अपने कुछ विकास कार्यों को रोक दिया। फिर बताया गया कि बजट में कटौती नहीं होगी। इस दौरान रिवाइज्ड एस्टीमेट बजट में भी नगर निगम ने 200 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की मांग की। कई बार बजट को लेकर सदन में हंगामा तक हो चुका है। पिछले सालों में भी मेयर से लेकर पार्षद व आयुक्त बजट देने के लिए प्रशासन के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन बजट के अतिरिक्त वर्ष 2017 से पड़े अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर बजट की याद किसी को नहीं आई।
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गांव के लिए भी निकल सकता था बजट
निगम ने गांव के बीएंडआर और इलेक्ट्रिकल के कार्यों के लिए प्रशासन से अलग से बजट मांगा है। अधिकारी थोड़ा ध्यान देते तो इस फंड को गांव के विकास कार्य में उपयोग करके काम शुरू करा दिया गया होता। फिलहाल निगम गांव के आगे के कार्यों के लिए भी फंड का ही इंतजार कर रहा है, जबकि पार्षद चुनाव के कारण जल्दी से जल्दी गांव में विकास कार्यों के कार्यों का शुभारंभ करना चाहते हैं।
अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए योजना बना रहे हैं। अन्य प्रदेशों ने इस बजट का कैसे उपयोग किया है, यह भी देख रहे हैं। जल्द योजना बनाकर प्रशासन को भेजेंगे, ताकि इस बजट का भी सदुपयोग हो सके। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम