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चंडीगढ़ निगम की हालत: केंद्र से 200 करोड़ भी आ जाए तो भी दूर नहीं होगी कंगाली...150 करोड़ की देनदारी सिर पर
Mon, 21 Apr 2025 09:29 AM IST
निवेदिता वर्मा
प्रवीण राय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण राय, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 21 Apr 2025 09:29 AM IST
सार
इस बार नगर निगम ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1864.92 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। इसमें कर्मचारियों का वेतन, भत्ते, पेंशन न अन्य देने में 1197 करोड़ रुपये खर्च हो जाएंगे। इस बार नगर निगम का जितना वेतन और अन्य भत्तों में खर्च होगा उतना पैसा भी ग्रांट और अन्य मदों को जोड़कर नहीं हो पा रहा है।
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चंडीगढ़ नगर निगम
- फोटो : फाइल
विस्तार
चंडीगढ़ नगर निगम के लिए मेयर हरप्रीत काैर बबला और अधिकारियों ने केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपये का बजट मांगा है। इसको लिए पिछले दो महीने से लगातार प्रयास चल रहा है। यहां तक की इसके लिए मेयर देश के गृहमंत्री अमित शाह से भी गुहार लगा चुकी हैं। अब बजट मिलने में परेशानी और विकास कार्य ठीक से न होने से नाराज मेयर समेत भाजपा के सभी पार्षदों ने इस्तीफे की चेतावनी दे डाली है।
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लेकिन अगर यह बजट आ भी जाता है तो नगर निगम का वित्तीय संकट समाप्त नहीं होगा। आते ही करीब 150 करोड़ रुपये खर्च हो जाएगा। इसमें 35 करोड़ रुपये का भुगतान तो ठेकेदारों का है। उसके अलावा पेंशन मद से पैसा निकाला गया था और कर्मचारियों के बाकी मद का पैसा भी नहीं गया है।
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लेकिन अगर यह बजट आ भी जाता है तो नगर निगम का वित्तीय संकट समाप्त नहीं होगा। आते ही करीब 150 करोड़ रुपये खर्च हो जाएगा। इसमें 35 करोड़ रुपये का भुगतान तो ठेकेदारों का है। उसके अलावा पेंशन मद से पैसा निकाला गया था और कर्मचारियों के बाकी मद का पैसा भी नहीं गया है।
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625 करोड़ रुपये प्रशासन से मिलेंगे
प्रशासन से नगर निगम को 625 करोड़ रुपये मिलने हैं। इसके अलावा विभिन्न स्त्रोतों से 410 करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य रखा गया है। अभी यह पैसा भी नहीं आया है। जबकि संपत्ति कर बढ़ाने का पूरे शहर में विरोध शुरू हो गया है। खुद भाजपा के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि इसमें कुछ संशोधन हो सकता है। इस उम्मीद में लोग अभी संपत्ति कर जमा करने से बच रहे है। निगम ने पानी के बिल से 160 करोड़, संपत्ति कर से 66 करोड़ रुपये एकत्र करने का लक्ष्य रखा है।पूरे साल का वेतन देने में परेशान आएगी
सदन के अंदर नगर आयुक्त इस बार का जिक्र कर चुके हैं कि पूरे साल नगर निगम के पास जितना मद और टैक्स वसूली से पैसा आएगा वह कर्मचारियों के वेतन में ही खर्च हो जाएगा। ऐसे में विकास कार्य इस साल भी अटकेंगे। पार्षदों का आरोप है कि पिछले करीब एक साल से सारे काम अटके हुए हैं। नगर आयुक्त अमित कुमार ने कहा था कि बजट नहीं आया तो आने वाले समय में वित्तीय संकट और बढ़ जाएगा।हर महीने न्यूनतम 70 करोड़ का खर्च
निगम की हर महीने कमिटिड लायबिलिटी (प्रतिबद्ध देनदारियां) करीब 70 करोड़ रुपये की है। इसमें कर्मचारियों को वेतन, वेजेस, पेंशन व अन्य अनिवार्य बिलों का भुगतान आता है। वार्डों के विकास कार्यों पर किए जाने वाला खर्च अलग है। निगम की स्थिति इन दिनों ऐसी है कि उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली कई सड़कों की हालत खस्ता है, लेकिन पैसों की कमी की वजह से उन्हें बनवा नहीं पा रहा है।निगम शहर की 2000 किलोमीटर सड़कों और पार्किंग क्षेत्रों का रखरखाव करता है। इनमें से 270 किलोमीटर सड़कों और पार्किंग स्थलों को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। इसके लिए करीब 54 करोड़ रुपये चाहिए।