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चंडीगढ़ः बिजली, शराब और नए वाहन की खरीदना महंगा, निगम ने लगाया गो सेस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 29 Jun 2018 11:29 PM IST
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पंजाब की तर्ज पर सिटी ब्यूटीफुल में गो सेस लगाने का फैसला शुक्रवार को नगर निगम की सदन ने ले लिया। ऐसे में अब बिजली, शराब की बोतल और नए वाहन खरीदना महंगा हो जाएगा। सदन ने बिजली की हर यूनिट पर दो पैसे गो सेस लगाने का फैसला लिया है। कमिश्नर का दावा है कि गो सेस लगने के बाद सड़क पर खुले में घूम रहीं गायों से शहरवासियों को मुक्ति दिला दी जाएगी।
मालूम हो कि दक्षिणी सेक्टरों में इस समय इसकी दिक्कत ज्यादा है। वहीं, सदन ने नया चार पहिया वाहन खरीदने पर 500, दोपहिया वाहन खरीदने पर 200 रुपये का गो सेस लगाने का निर्णय लिया है जबकि देसी शराब की बोतल पर 5 रुपये, प्रति व्हिस्की की बोतल पर 10 रुपये और बीयर 5 रुपये प्रति बोतल गो सेस लगाया है।
अब इस पास प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए प्रशासन के स्थानीय निकाय सचिव को भेजा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने पर इसे लागू कर दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक गो सेस से नगर निगम को हर साल 15 करोड़ से अधिक की कमाई होगी।
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वित्तीय हालत सुधारने को प्रशासक से मिलेंगे मेयर और पार्षद
नगर निगम की वित्तीय हालत सुधारने के लिए सभी पार्षदों ने सदन की बैठक में अपने सुझाव दिए। इसके बाद निर्णय लिया गया कि मेयर जुलाई माह के पहले सप्ताह में सभी पार्षदों को लेकर प्रशासक संग बैठक करेंगे और दिल्ली फाइनेंस कमिश्नर की चौथी रिपोर्ट के अनुसार 30 प्रतिशत ग्रांट की मांग करेंगे।
साथ ही कमिश्नर के सुझाव पर यह प्रस्ताव भी पास किया गया है कि वित्तीय हालत सुधारने के लिए फरीदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस की सलाह ली जाएगी। कमिश्नर ने बताया कि इसके लिए उनकी वहां के एक सीनियर अधिकारी से बात भी हो गई है। यह उन्हें बताएगा कि किस तरह से वह अपने खर्चे कम करके आय के साधन बढ़ा सकते हैं।
कांग्रेस और भाजपा पार्षदों में जमकर बहस
सदन की बैठक में वित्तीय हालत की सुधार पर चर्चा करते हुए कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच जमकर बहस हुई। भाजपा पार्षदों ने नगर निगम की वित्तीय हालत खस्ता होने के लिए साल 2016 से पहले के कांग्रेस कार्यकाल को जिम्मेवार बताया जबकि कांग्रेस ने इसके लिए भाजपा को जिम्मेवार बताया। कमिश्नर ने बताया कि अभी भी 25 करोड़ रुपये के बिल ऐसे हैं जो कि नगर निगम ने ठेकेदारों के देने हैं।
कमिश्नर ने कहा कि अगर भविष्य में नए विकास के काम चाहिए तो आय के साधन बढ़ाने पड़ेंगे। कांग्रेस पार्षद गुरबख्श रावत, रविंदर कौर गुजराल और शीला फूल सिंह ने प्रशासन द्वारा नगर निगम को उनके शेयर के अनुसार फंड न देने पर मेयर देवेश मोदगिल के सामने धरना भी दिया लेकिन मेयर ने इस दौरान लंच की घोषणा कर दी। भाजपा पार्षद सतीश कैंथ ने सिनेमा हालों में चलने वाली फिल्मों के बीच जो विज्ञापन आते हैं, उस पर शुल्क लगाने का सुझाव दिया।
कांग्रेस पार्षद दल के नेता देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि जब से भाजपा का नगर निगम में कब्जा हुआ है तब से नगर निगम की वित्तीय हालत खस्ता हुई है और अब शहरवासियों पर नए-नए टैक्स लगाए जा रहे हैं। मनोनीत पार्षद चरणजीव सिंह ने कहा कि अच्छी सुविधाएं देने के लिए थोड़े बहुत शहरवासियों के टैक्स बढ़ा देने चाहिए।
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मालूम हो कि दक्षिणी सेक्टरों में इस समय इसकी दिक्कत ज्यादा है। वहीं, सदन ने नया चार पहिया वाहन खरीदने पर 500, दोपहिया वाहन खरीदने पर 200 रुपये का गो सेस लगाने का निर्णय लिया है जबकि देसी शराब की बोतल पर 5 रुपये, प्रति व्हिस्की की बोतल पर 10 रुपये और बीयर 5 रुपये प्रति बोतल गो सेस लगाया है।
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अब इस पास प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए प्रशासन के स्थानीय निकाय सचिव को भेजा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने पर इसे लागू कर दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक गो सेस से नगर निगम को हर साल 15 करोड़ से अधिक की कमाई होगी।
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वित्तीय हालत सुधारने को प्रशासक से मिलेंगे मेयर और पार्षद
नगर निगम की वित्तीय हालत सुधारने के लिए सभी पार्षदों ने सदन की बैठक में अपने सुझाव दिए। इसके बाद निर्णय लिया गया कि मेयर जुलाई माह के पहले सप्ताह में सभी पार्षदों को लेकर प्रशासक संग बैठक करेंगे और दिल्ली फाइनेंस कमिश्नर की चौथी रिपोर्ट के अनुसार 30 प्रतिशत ग्रांट की मांग करेंगे।
साथ ही कमिश्नर के सुझाव पर यह प्रस्ताव भी पास किया गया है कि वित्तीय हालत सुधारने के लिए फरीदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस की सलाह ली जाएगी। कमिश्नर ने बताया कि इसके लिए उनकी वहां के एक सीनियर अधिकारी से बात भी हो गई है। यह उन्हें बताएगा कि किस तरह से वह अपने खर्चे कम करके आय के साधन बढ़ा सकते हैं।
कांग्रेस और भाजपा पार्षदों में जमकर बहस
सदन की बैठक में वित्तीय हालत की सुधार पर चर्चा करते हुए कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच जमकर बहस हुई। भाजपा पार्षदों ने नगर निगम की वित्तीय हालत खस्ता होने के लिए साल 2016 से पहले के कांग्रेस कार्यकाल को जिम्मेवार बताया जबकि कांग्रेस ने इसके लिए भाजपा को जिम्मेवार बताया। कमिश्नर ने बताया कि अभी भी 25 करोड़ रुपये के बिल ऐसे हैं जो कि नगर निगम ने ठेकेदारों के देने हैं।
कमिश्नर ने कहा कि अगर भविष्य में नए विकास के काम चाहिए तो आय के साधन बढ़ाने पड़ेंगे। कांग्रेस पार्षद गुरबख्श रावत, रविंदर कौर गुजराल और शीला फूल सिंह ने प्रशासन द्वारा नगर निगम को उनके शेयर के अनुसार फंड न देने पर मेयर देवेश मोदगिल के सामने धरना भी दिया लेकिन मेयर ने इस दौरान लंच की घोषणा कर दी। भाजपा पार्षद सतीश कैंथ ने सिनेमा हालों में चलने वाली फिल्मों के बीच जो विज्ञापन आते हैं, उस पर शुल्क लगाने का सुझाव दिया।
कांग्रेस पार्षद दल के नेता देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि जब से भाजपा का नगर निगम में कब्जा हुआ है तब से नगर निगम की वित्तीय हालत खस्ता हुई है और अब शहरवासियों पर नए-नए टैक्स लगाए जा रहे हैं। मनोनीत पार्षद चरणजीव सिंह ने कहा कि अच्छी सुविधाएं देने के लिए थोड़े बहुत शहरवासियों के टैक्स बढ़ा देने चाहिए।