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Chandigarh: प्राचीन रेशम मार्ग से भारत आया मल्टीपल स्क्लीरोसिस मर्ज, कश्मीर के विशेषज्ञों ने किया शोध

Sun, 12 Feb 2023 04:43 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 12 Feb 2023 04:43 PM IST
सार

प्रो. रोउफ ने बताया कि इस शोध के लिए इस मर्ज से ग्रस्त 30 मरीजों को चिह्नित किया गया। सभी मरीज कश्मीर के थे। उन मरीजों के जीन की जांच की गई तो उसमें कुछ नए जीन पाए गए। वे जीन ऐसे थे जिसके बारे में अब तक जानकारी ही नहीं है।

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Chandigarh: Multiple sclerosis merge came to India through the ancient silk route
Research

विस्तार

प्राचीन काल में भारत से विदेशों में व्यापार का मार्ग प्रशस्त करने वाले रेशम मार्ग ने देश में बीमारियों का भी आदान-प्रदान किया है। इस मार्ग ने देश की अर्थव्यवस्था के साथ ही भारतीयों के जीन में भी बदलाव लाया। चौंकाने वाली बात यह है कि विश्वभर के विशेषज्ञ जिस मल्टीपल स्क्लीरोसिस जैसे गंभीर मर्ज के कारण की तलाश कर रहे हैं, उसका एक कारण रेशम मार्ग भी है। इस बात को कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. रोउफ आसमी ने शोध से साबित किया है। उन्होंने यह जानकारी पीजीआई में न्यूरो ऑप्थोमोलॉजी पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में दी।
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प्रो. रोउफ ने बताया कि इस शोध के लिए इस मर्ज से ग्रस्त 30 मरीजों को चिह्नित किया गया। सभी मरीज कश्मीर के थे। उन मरीजों के जीन की जांच की गई तो उसमें कुछ नए जीन पाए गए। वे जीन ऐसे थे जिसके बारे में अब तक जानकारी ही नहीं है। उस जीन में लगातार म्यूटेशन हो रहा था, जबकि अन्य जीन में ऐसा नहीं था। उन 30 मरीजों में से 18 में अलग प्रकार के जीन पाए गए। इससे यह पता चलता है कि कश्मीर जो प्राचीन काल से विदेशों से सीधे सम्पर्क में रहा है। उसमें रेशम मार्ग का अहम रोल रहा है। उस मार्ग से होते हुए ही यह गंभर मर्ज भारत में आया है।
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मल्टीपल स्क्लीरोसिस रोक देता है संचार
मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र अर्थात रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क को प्रभावित करती है। जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली नसों के सुरक्षात्मक कवच को खा जाती है जिससे नस की क्षति होती है जो मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार को बाधित करती है।
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लक्षणों पर करें गौर
देखने में असुविधा, इसमें मस्तिष्क एवं शेष शरीर में मध्य होने वाले संघर्ष में पैदा होती है, संतुलन में कमी, अस्थिरता, बोलने में असुविधा, सिहरन महसूस करना, ध्यान केन्द्रित करने मे कठिनाई, शारीरिक अंगों मे कमजोरी।

रेशम मार्ग का इतिहास आप भी जान लें
रेशम मार्ग प्राचीनकाल और मध्यकाल में ऐतिहासिक व्यापारिक-सांस्कृतिक मार्गों का एक समूह था, जिसके माध्यम से एशिया, यूरोप और अफ्रीका जुड़े हुए थे। इसका सबसे जाना-माना हिस्सा पर्थ मार्ग है जो चीन से होकर पश्चिम की ओर पहले मध्य एशिया में और फिर यूरोप में जाता था। जिससे निकलती एक शाखा भारत की ओर जाती थी। सिल्क रुट का चीन, भारत, मिस्र, ईरान, अरब और प्राचीन रोम की महान सभ्यताओं के विकास पर गहरा असर पड़ा। इस मार्ग के द्वारा व्यापार के आलावा, ज्ञान, धर्म, संस्कृति, भाषाएं, विचारधाराएं, भिक्षु, तीर्थयात्री, सैनिक, घूमन्तू जातियां और बीमारियां भी फैलीं।


इस मर्ज का कारण इससे पहले तक ज्ञात नहीं था। लेकिन शोध से यह पता चल चुका है कि जीन इसका एक प्रमुख कारण है। इस शोध के परिणाम का आंकलन कर अब इसकी अगली कड़ी पर काम किया जा रहा है। - प्रो. रोउफ आसमी, शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख
 
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