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सीएचबी ने माना- बैंक और कर्मियों की गलती से हुआ ऐसा, अब से ऑनलाइन भुगतान करने की सलाह
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने माना है कि लोगों के साथ बैंक और सीएचबी कर्मचारियों की गलती की वजह से कुछ लोगों के मकान का किराया उनके खाते में ट्रांसफर नहीं हुआ है। अमर उजाला में 23 फरवरी को ‘सीएचबी की गलती से हजारों लोग बने डिफॉल्टर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद बोर्ड ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर लोगों को ऑनलाइन ही भुगतान करने की सलाह दी है। साथ ही इस गलती की सुधार का आश्वासन दिया है।
सीएचबी ने सफाई में कहा है कि ऐसा चालान में गलत जानकारी भरने या फिर बोर्ड कर्मचारी द्वारा की गई गलती से हुआ है। सीएचबी ने बताया है कि इन कारणों से बोर्ड के पास 112 करोड़ रुपये सस्पेंस खाते में पड़े थे, लेकिन बीते दिनों में बोर्ड ने इनमें से 111 करोड़ रुपये संबंधित खातों में भेज दिए हैं। बोर्ड के पास अभी भी एक करोड़ रुपये सस्पेंस खाते में पड़े हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह पैसा इनमें से ही कई लोगों का है। बोर्ड ने लोगों से आग्रह किया है कि अगर उनके पास ऐसी कोई रसीद है, जो बोर्ड की वेबसाइट पर अपडेट नहीं है तो वह रसीद की फोटोकॉपी के साथ एक पत्र लिखकर सेक्टर-9 स्थित सीएचबी के रिसेप्शन पर जमा करा दें। संबंधित व्यक्ति की राशि को उसी तारीख में जमा करा दिया जाएगा और ब्याज को भी ठीक कर दिया जाएगा। बोर्ड ने लोगों को सलाह दी है कि वह अब किराया आदि को ऑनलाइन ही जमा कराएं, ताकि भविष्य में इस तरह की गलती से बचा जाए। साथ ही ऑनलाइन भुगतान पर तुरंत ही रसीद भी मिल जाती है और बेवसाइट पर भी अपडेट हो जाता है।
लोगों की मांग- ईडब्ल्यूएस कालोनी में ही लगे शिविर
सीएचबी की गलती से लोग भी खफा हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने तो पहले ही पैसा जमा करा दिया है। अगर बोर्ड ने अपनी बेवसाइट पर भुगतान को अपडेट नहीं किया है तो इसमें उनकी क्या गलती है। इसलिए बोर्ड को धनास, मलोया व अन्य सभी जगह जहां-जहां पर रहने वाले लोगों के साथ ऐसा हुआ है, बोर्ड को वहीं पर शिविर लगाना चाहिए ताकि अब लोगों को अपनी दिहाड़ी तोड़कर सेक्टर-9 में सीएचबी के चक्कर न काटने पड़े। हालांकि बोर्ड के अधिकारियों ने इस मांग पर अभी कुछ नहीं कहा है।
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लोगों के पास भुगतान की रसीद है, लेकिन बोर्ड के पास पैसे जमा नहीं हैं
सीएचबी ने हाल ही में किफायती किराया आवासीय योजना एआरएचसी) और स्मॉल फ्लैट्स निवासियों के लिए 'अकाउंट स्टेटमेंट' की सुविधा शुरू की है। इसमें लोग देख सकते हैं कि अब तक उन्होंने कब-कब और कितना किराया जमा किया है। जब कुछ लोगों ने वेबसाइट की जानकारी और पुरानी पड़ी रसीदों को मिलाया तो पाया कि अकाउंट स्टेटमेंट से कुछ भुगतान गायब हैं, लेकिन उसी भुगतान की उनके पास रसीद मौजूद है अब क्योंकि बोर्ड को उस भुगतान की जानकारी नहीं है, तो बोर्ड यह मानकर चलता है कि व्यक्ति ने राशि का भुगतान ही नहीं किया है। ऐसे लोगों को रेंट डिफॉल्टर की सूची में डाल दिया गया है और जो राशि जमा नहीं है, उस पर साढ़े 12 प्रतिशत का ब्याज लगा दिया है। ऐसा हजारों लोगों के साथ हुआ है।
कोट
अगर किसी व्यक्ति के पास कोई रसीद है, जो ऑनलाइन खाता विवरण में नहीं दिख रही है तो वह पत्र लिखकर रसीद को हाउसिंग बोर्ड के रिसेप्शन पर जमा करा सकता है। बोर्ड उस राशि को रसीद पर अंकित दिन के तहत ही वेबसाइट पर अपडेट करेगा और फिर ब्याज की राशि भी ठीक कर दी जाएगी।
- यशपाल गर्ग, सीईओ, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड
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सीएचबी ने सफाई में कहा है कि ऐसा चालान में गलत जानकारी भरने या फिर बोर्ड कर्मचारी द्वारा की गई गलती से हुआ है। सीएचबी ने बताया है कि इन कारणों से बोर्ड के पास 112 करोड़ रुपये सस्पेंस खाते में पड़े थे, लेकिन बीते दिनों में बोर्ड ने इनमें से 111 करोड़ रुपये संबंधित खातों में भेज दिए हैं। बोर्ड के पास अभी भी एक करोड़ रुपये सस्पेंस खाते में पड़े हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह पैसा इनमें से ही कई लोगों का है। बोर्ड ने लोगों से आग्रह किया है कि अगर उनके पास ऐसी कोई रसीद है, जो बोर्ड की वेबसाइट पर अपडेट नहीं है तो वह रसीद की फोटोकॉपी के साथ एक पत्र लिखकर सेक्टर-9 स्थित सीएचबी के रिसेप्शन पर जमा करा दें। संबंधित व्यक्ति की राशि को उसी तारीख में जमा करा दिया जाएगा और ब्याज को भी ठीक कर दिया जाएगा। बोर्ड ने लोगों को सलाह दी है कि वह अब किराया आदि को ऑनलाइन ही जमा कराएं, ताकि भविष्य में इस तरह की गलती से बचा जाए। साथ ही ऑनलाइन भुगतान पर तुरंत ही रसीद भी मिल जाती है और बेवसाइट पर भी अपडेट हो जाता है।
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लोगों की मांग- ईडब्ल्यूएस कालोनी में ही लगे शिविर
सीएचबी की गलती से लोग भी खफा हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने तो पहले ही पैसा जमा करा दिया है। अगर बोर्ड ने अपनी बेवसाइट पर भुगतान को अपडेट नहीं किया है तो इसमें उनकी क्या गलती है। इसलिए बोर्ड को धनास, मलोया व अन्य सभी जगह जहां-जहां पर रहने वाले लोगों के साथ ऐसा हुआ है, बोर्ड को वहीं पर शिविर लगाना चाहिए ताकि अब लोगों को अपनी दिहाड़ी तोड़कर सेक्टर-9 में सीएचबी के चक्कर न काटने पड़े। हालांकि बोर्ड के अधिकारियों ने इस मांग पर अभी कुछ नहीं कहा है।
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लोगों के पास भुगतान की रसीद है, लेकिन बोर्ड के पास पैसे जमा नहीं हैं
सीएचबी ने हाल ही में किफायती किराया आवासीय योजना एआरएचसी) और स्मॉल फ्लैट्स निवासियों के लिए 'अकाउंट स्टेटमेंट' की सुविधा शुरू की है। इसमें लोग देख सकते हैं कि अब तक उन्होंने कब-कब और कितना किराया जमा किया है। जब कुछ लोगों ने वेबसाइट की जानकारी और पुरानी पड़ी रसीदों को मिलाया तो पाया कि अकाउंट स्टेटमेंट से कुछ भुगतान गायब हैं, लेकिन उसी भुगतान की उनके पास रसीद मौजूद है अब क्योंकि बोर्ड को उस भुगतान की जानकारी नहीं है, तो बोर्ड यह मानकर चलता है कि व्यक्ति ने राशि का भुगतान ही नहीं किया है। ऐसे लोगों को रेंट डिफॉल्टर की सूची में डाल दिया गया है और जो राशि जमा नहीं है, उस पर साढ़े 12 प्रतिशत का ब्याज लगा दिया है। ऐसा हजारों लोगों के साथ हुआ है।
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अगर किसी व्यक्ति के पास कोई रसीद है, जो ऑनलाइन खाता विवरण में नहीं दिख रही है तो वह पत्र लिखकर रसीद को हाउसिंग बोर्ड के रिसेप्शन पर जमा करा सकता है। बोर्ड उस राशि को रसीद पर अंकित दिन के तहत ही वेबसाइट पर अपडेट करेगा और फिर ब्याज की राशि भी ठीक कर दी जाएगी।
- यशपाल गर्ग, सीईओ, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड