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चंडीगढ़: कोरोना बीमारी में हुए खर्च का नहीं मिल रहा रिफंड, कारण-स्वास्थ्य विभाग के पास रेट लिस्ट ही नहीं

Mon, 06 Sep 2021 03:56 PM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 06 Sep 2021 03:56 PM IST
सार

कोरोना महामारी में लोग तो बच गए, लेकिन सिस्टम में उलझ गए हैं। वहीं कुछ लोगों ने अपने परिजनों को भी बीमारी में गंवा दिया अब इलाज में हुए खर्च के लिए सरकारी दफ्तरों में धक्के खा रहे हैं।

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Chandigarh Health Department does not have any details about how much refund is given to Corona infected government employees
कोरोना वायरस। - फोटो : DEMO

विस्तार

चंडीगढ़ में कोरोना संक्रमित हो चुके सरकारी कर्मचारियों को इलाज पर हुए खर्च में से कितना रिफंड मिलना है इसका स्वास्थ्य विभाग के पास कोई ब्योरा नहीं है। कर्मचारी व उनके परिजनों की ओर से किए गए दावे पर स्वास्थ्य विभाग ने पत्र लिखकर स्पष्ट कहा है कि पंजाब की ओर से उन्हें बीमारी में रिफंड को लेकर रेट नहीं दिए गए हैं। इसलिए पंजाब स्वास्थ्य विभाग से इसका ब्योरा मांगा गया है। वहां से रेट तय होते ही दस्तावेजों को वैरिफाई कर दिया जाएगा। कर्मचारी यूनियन के पास ऐसे 10 से 12 केस पड़े हुए हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के पास काफी बिल दबे पड़े हैं।

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कोरोना महामारी में लोग तो बच गए, लेकिन सिस्टम में उलझ गए हैं। वहीं कुछ लोगों ने अपने परिजनों को भी बीमारी में गंवा दिया अब इलाज में हुए खर्च के लिए सरकारी दफ्तरों में धक्के खा रहे हैं। जो कर्मचारी लोगों के बिलों को पास करते थे, कोरोना संक्रमित हुए ऐसे रिटायर लोगों को खुद अपने कार्यालय में रिफंड के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं कुछ सरकारी कर्मचारियों की मौत के बाद उनके परिजनों के लिए काफी समस्या खड़ी हो गई है। लाखों रुपये का कर्जा लेने के बाद अब लोगों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है।
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सरकारी अस्पतालों का रेट तय, निजी अस्पतालों का जिक्र तक नहीं
निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि पंजाब की तरफ से आए पत्र में बताया गया है कि सेक्टर- 32, 16 और पीजीआई सहित सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज निशुल्क रहेगा, लेकिन निजी अस्पतालों में इलाज कराने पर रिफंड की क्या स्थिति रहेगी, इसकी जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर बीमारी के लिए रिफंड के मानक तय होते हैं, लेकिन पंजाब सरकार की ओर से कोरोना के लिए कोई रेट तय नहीं किए हैं। चंडीगढ़ में ज्यादातर पंजाब अधिनियम ही लागू होते हैं। इसलिए यहां भी स्वास्थ्य विभाग को सरकारी विभागों को रुपये रिफंड करने के लिए रेट देने में मुश्किल हो रही है।
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केस एक
चंडीगढ़ पुलिस में एएसआई के पद से रिटायर राजबाला की अप्रैल 2021 में तबियत खराब हो गई। परिजनों ने उन्हें सेक्टर 16 स्थित सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। वहां बेहतर इलाज न मिलने पर परिजन उन्हें निजी अस्पताल में लेकर चले गए। आठ दिन भर्ती रहने के बाद निजी अस्पताल में उनका बिल 2 लाख 70 हजार रुपये का बना। परिजनों ने पुलिस विभाग में रुपयों के रिफंड के लिए आवेदन किया। विभाग ने बिल स्वास्थ्य विभाग को वैरिफिकेशन के लिए भेजा। वहां से पत्र आया कि पंजाब ने कोरोना के लिए कोई रेट तय नहीं किए हैं। जिससे बताया जा सके कि किस व्यक्ति को कितना रुपया वापस देना है।

केस दो
प्रशासन में जेई के पद पर पदस्थ जीरकपुर निवासी ब्रजमोहन फरवरी 2021 में रिटायर हो गए थे। मार्च में उनकी तबियत खराब हुई तो परिजन उन्हें जीरकपुर के ही एक निजी अस्पताल में लेकर गए। कोरोना के लक्षण दिखने पर वहां से उन्हें खरड़ स्थित एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। लगभग 10 दिनों तक चले इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। इस दौरान उनका लगभग 4 लाख रुपये का बिल बन गया। परिजनों ने संस्कार के बाद चंडीगढ़ प्रशासन में रिफंड के लिए आवेदन किया। जहां से स्वास्थ्य विभाग को वेरीफिकेशन के लिए बिल भेज दिए गए। विभाग ने कहा कि पंजाब से इन बिलों को लेकर जवाब मांगा जाए।

हमने पंजाब सरकार को 10 दिन पहले पत्र लिखा है। इसमें निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले कर्मचारियों के बिलों के रिम्बर्समेंट के लिए रेट तय करने को कहा गया है। ताकि दावा करने वाले कर्मचारियों को जल्द भुगतान हो सके। - डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य 

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