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स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के लिए चंडीगढ़ के पास अभी एक और मौका बाकी, शहरवासी करें सहयोग
Thu, 02 Jan 2020 11:33 AM IST
खुशबू गोयल
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 02 Jan 2020 11:33 AM IST
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स्वच्छ भारत
- फोटो : फाइल फोटो
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स्वच्छता रैंकिंग की दूसरी तिमाही में भी पिछड़ने के बाद एक बार फिर नगर निगम चंडीगढ़ के अधिकारी व कर्मचारी शहरवासियों के निशाने पर हैं। हालांकि रैंकिंग में सुधार के लिए अभी भी एक मौका बचा है। तीसरी तिमाही का सर्वे हो चुका है और अब केवल चौथे तिमाही का सर्वे बाकी है। इसके लिए एक टीम इसी चंडीगढ़ आएगी, जो स्वच्छता व्यवस्था के साथ शहरवासियों से जानकारी हासिल करेगी। उसके बाद कुल नंबरों के आधार पर फाइनल रैंकिंग तय की जाएगी।
ऐसे में शहरवासियों के सहयोग से स्वच्छता रैंकिंग में अभी भी कुछ सुधार किया जा सकता है। शहर में स्वच्छता रैंकिंग के लिए तीन-तीन माह में कुल चार बार परिणाम दिए जाते हैं और इन्हीं के आधार पर पूरे साल की फाइनल रैंकिंग तय होती है। स्वच्छता रैंकिंग 2020 की पहली तिमाही में चंडीगढ़ को 11वां स्थान मिला था जबकि दूसरी तिमाही में चंडीगढ़ नीचे फिसलकर 27वीं रैंक पर चला गया। तीसरी तिमाही के लिए 31 दिसंबर तक जानकारियां भेजी जा चुकी हैं।
अब अंतिम और आखिरी तिमाही के लिए 4 जनवरी से 31 जनवरी के बीच एक टीम आएगी जो सर्वे करेगी। शहर में कचरे के निस्तारण की व्यवस्थाओं को देखेगी। उसके बाद लोगों से जानकारी लेगी। उसके आधार पर अंतिम रैंकिंग जारी होगी। ऐसे में लोगों की ओर से दी गई जानकारी भी रैंकिंग सुधारने में महत्वपूर्ण होगी। ज्ञात हो कि वर्ष 2018 में चंडीगढ़ स्वच्छता अभियान में देश में तीसरे स्थान पर था। उसके बाद वर्ष 2019 की स्वच्छता रैंकिंग में चंडीगढ़ लुढ़ककर 20वें स्थान पर चला गया।
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इसके लिए अधिकारियों से लेकर निगम के पार्षदों तक को काफी अलोचना झेलनी पड़ी थी।
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ऐसे में शहरवासियों के सहयोग से स्वच्छता रैंकिंग में अभी भी कुछ सुधार किया जा सकता है। शहर में स्वच्छता रैंकिंग के लिए तीन-तीन माह में कुल चार बार परिणाम दिए जाते हैं और इन्हीं के आधार पर पूरे साल की फाइनल रैंकिंग तय होती है। स्वच्छता रैंकिंग 2020 की पहली तिमाही में चंडीगढ़ को 11वां स्थान मिला था जबकि दूसरी तिमाही में चंडीगढ़ नीचे फिसलकर 27वीं रैंक पर चला गया। तीसरी तिमाही के लिए 31 दिसंबर तक जानकारियां भेजी जा चुकी हैं।
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अब अंतिम और आखिरी तिमाही के लिए 4 जनवरी से 31 जनवरी के बीच एक टीम आएगी जो सर्वे करेगी। शहर में कचरे के निस्तारण की व्यवस्थाओं को देखेगी। उसके बाद लोगों से जानकारी लेगी। उसके आधार पर अंतिम रैंकिंग जारी होगी। ऐसे में लोगों की ओर से दी गई जानकारी भी रैंकिंग सुधारने में महत्वपूर्ण होगी। ज्ञात हो कि वर्ष 2018 में चंडीगढ़ स्वच्छता अभियान में देश में तीसरे स्थान पर था। उसके बाद वर्ष 2019 की स्वच्छता रैंकिंग में चंडीगढ़ लुढ़ककर 20वें स्थान पर चला गया।
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इसके लिए अधिकारियों से लेकर निगम के पार्षदों तक को काफी अलोचना झेलनी पड़ी थी।
कमिश्नर बोले, जेपी प्लांट के कारण खराब हुई रैंकिंग
कमिश्नर केके यादव ने स्वच्छता रैंकिंग की दो तिमाही में फिसलने का कारण जेपी प्लांट को ठहराया है। कमिश्नर का कहना है कि जेपी प्लांट ठीक से कचरे का निस्तारण करता तो शहर के कचरे को डंपिंग ग्राउंड पर नहीं फेंकना पड़ता। वहीं गीला और सूखा कचरा अलग अलग लेने के लिए डोर टु डोर कचरा कलेक्टरों से भी थोड़ी देरी से समझौता हुआ।
कांग्रेस ने प्रशासक को भेजा पत्र, भंग हो निगम
विपक्ष के नेता व कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने रैंकिंग गिरने के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को पत्र भेजा है। पत्र में नववर्ष की बधाई देने के साथ शहर की सफाई की मुद्दा उठाया है। पत्र में बबला ने कहा कि भाजपा के पार्षद आपस में ही टांग खिचाई करते हैं। काम के प्रति पार्षदों का ध्यान ही नहीं है। तत्कालीन मेयर देवेश मोदगिल के समय यदि सूखा गीला कचरा अलग अलग करने के लिए समझौता हो गया होता तो शायद रैंकिंग में थोड़ा सुधार हो जाता। भाजपा सिर्फ टैक्स बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। कांग्रेस पार्षद ने निगम को भंग करने की मांग की है।
हर माह करोड़ों खर्च, फिर क्यों यह स्थिति
निगम में सफाई व्यवस्था तीन वर्गों में बंटी है। एक हिस्सा नगर निगम के कर्मचारी साफ करते हैं, दूसरा हिस्सा लॉयंस कंपनी को दिया गया है और तीसरा हिस्सा टीडीएस कंपनी को दिया गया है। लॉयंस कंपनी को हर माह साढ़े चार करोड़ का पेमेंट दिया जाता है। वहीं टीडीएस कंपनी को भी लगभग दो करोड़ रुपए हर माह दिया जाता है। निगम अपने कर्मचारियों पर भी साढ़े तीन करोड़ रुपये हर माह खर्च करती है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि तीन अलग-अलग क्षेत्र बंटे होने के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था गड़बड़ क्यों है।
हाल ही में लगाया था लॉयंस कंपनी पर जुर्माना
सफाई व्यवस्था की लापरवाही को देखते हुए भाजपा नेता नरेंद्र चौधरी ने मामले को जोरशोर से उठाया था। निगम कमिश्नर से लेकर प्रशासक तक इसके शिकायत की। उसके बाद पिछले माह नगर निगम ने लॉयंस कंपनी पर लापरवाही बरतने पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि पूरे साल में लॉयंस कंपनी पर निगम ने लगभग दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। ऐसे में निगम को अपने क्षेत्रों और टीडीएस कंपनी के क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था को भी देखना होगा।
हम अपने स्तर पर पूरा प्रयास कर रहे हैं। लोग सहयोग करेंगे तो शहर की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने में हमें काफी मदद मिलेगी।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
कांग्रेस ने प्रशासक को भेजा पत्र, भंग हो निगम
विपक्ष के नेता व कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने रैंकिंग गिरने के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को पत्र भेजा है। पत्र में नववर्ष की बधाई देने के साथ शहर की सफाई की मुद्दा उठाया है। पत्र में बबला ने कहा कि भाजपा के पार्षद आपस में ही टांग खिचाई करते हैं। काम के प्रति पार्षदों का ध्यान ही नहीं है। तत्कालीन मेयर देवेश मोदगिल के समय यदि सूखा गीला कचरा अलग अलग करने के लिए समझौता हो गया होता तो शायद रैंकिंग में थोड़ा सुधार हो जाता। भाजपा सिर्फ टैक्स बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। कांग्रेस पार्षद ने निगम को भंग करने की मांग की है।
हर माह करोड़ों खर्च, फिर क्यों यह स्थिति
निगम में सफाई व्यवस्था तीन वर्गों में बंटी है। एक हिस्सा नगर निगम के कर्मचारी साफ करते हैं, दूसरा हिस्सा लॉयंस कंपनी को दिया गया है और तीसरा हिस्सा टीडीएस कंपनी को दिया गया है। लॉयंस कंपनी को हर माह साढ़े चार करोड़ का पेमेंट दिया जाता है। वहीं टीडीएस कंपनी को भी लगभग दो करोड़ रुपए हर माह दिया जाता है। निगम अपने कर्मचारियों पर भी साढ़े तीन करोड़ रुपये हर माह खर्च करती है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि तीन अलग-अलग क्षेत्र बंटे होने के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था गड़बड़ क्यों है।
हाल ही में लगाया था लॉयंस कंपनी पर जुर्माना
सफाई व्यवस्था की लापरवाही को देखते हुए भाजपा नेता नरेंद्र चौधरी ने मामले को जोरशोर से उठाया था। निगम कमिश्नर से लेकर प्रशासक तक इसके शिकायत की। उसके बाद पिछले माह नगर निगम ने लॉयंस कंपनी पर लापरवाही बरतने पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि पूरे साल में लॉयंस कंपनी पर निगम ने लगभग दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। ऐसे में निगम को अपने क्षेत्रों और टीडीएस कंपनी के क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था को भी देखना होगा।
हम अपने स्तर पर पूरा प्रयास कर रहे हैं। लोग सहयोग करेंगे तो शहर की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने में हमें काफी मदद मिलेगी।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम